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पुराना नियम · 1 राजा · अध्याय 19 / 22

1 राजा 19

1तब अहाब ने ईज़ेबेल को वह सब बताया जो एलिय्याह ने किया था, कि उसने सब नबियों को तलवार से कैसे मार डाला।

2तब ईजेबेल ने एलिय्याह के पास एक दूत को यह कहने के लिए भेजा, “यदि मैं कल इसी समय तक तेरा प्राण उन्हीं के समान न कर डालूं तो देवता मेरे साथ वैसा ही वरन् उससे भी अधिक करे।”

3और वह डर गया और उठ कर प्राण बचाने को भागा और यहूदा के बेर्शेबा को पहुंचकर उसने अपने सेवक को वहीं छोड़ दिया

4और स्वयं जंगल में एक दिन के मार्ग पर जाकर एक झाऊ के पेड़ के नीचे बैठ गया। वहां उसने यह कहकर अपनी मृत्यु के लिए प्रार्थना की, “हे यहोवा, अब बहुत हो चुका। मेरा प्राण ले ले, क्योंकि मैं अपने पूर्वजों से अच्छा नहीं हू।”

5और वह झाऊ के पेड़ के नीचे लेट गया और सो गया, और देखो, एक स्वर्गदूत ने उसे छूकर उससे कहा, “उठ और खा।”

6तब उसने दृष्टि करके देखा कि गर्म पत्थरों पर पकी हुई एक रोटी, और एक सुराही पानी मेरे सिरहाने रखा है। अतः वह खा-पीकर फिर लेट गया।

7दूसरी बार यहोवा के दूत ने फिर आकर उसे छुआ और कहा, “उठ और खा, क्योंकि तुझे बहुत लम्बी यात्रा करनी है।”

8तब उसने उठकर खाया-पीया, और उसी भोजन के बल पर चालीस दिन और चालीस रात चलते-चलते परमेश्वर के पर्वत होरेब को पहुंचा।

9तब वह वहां जाकर एक गुफा में ठहर गया, और देखो, यहोवा का यह वचन उसके पास पहुंचा, और उसने उससे कहा, “हे एलिय्याह, तू यहां क्या कर रहा है?”

10और उसने कहा, “सेनाओं के परमेश्वर यहोवा के लिए मुझे बड़ी धुन है; क्योंकि इस्राएलियों ने तेरी वाचा को त्याग दिया, तेरी वेदियों को गिरा दिया, और तेरे नबियों को तलवार से घात किया है। और मैं ही अकेला बच गया हूं; और वे मेरे प्राण के भी खोजी है।”

11अतः उसने कहा, “आगे बढ़ कर पर्वत पर यहोवा के सम्मुख खड़ा हो।” और देखो, यहोवा पास से होकर निकला। और एक प्रचंड आंधी से यहोवा के सामने पहाड़ तड़कने लगे और चट्टानें टूटने लगीं; परन्तु यहोवा उस आंधी में न था। फिर आंधी के बाद भूकम्प हुआ, परन्तु यहोवा उस भूकम्प में नहीं था।

12फिर भूकम्प के बाद आग दिखाई दी, और यहोवा उस आग में न था; फिर आग के बाद एक धीमी आवाज़ सुनाई दी।

13और ऐसा हुआ कि जब एलिय्याह ने इसे सुना तो उसने अपना मुंह चादर से ढांप लिया और बाहर जाकर गुफा के द्वार पर खड़ा हो गया। और देखो, उसे एक आवाज़ सुनाई दी, “हे एलिय्याह, तू यहां क्या कर रहा है?”

14तब उसने उत्तर दिया, “सेनाओं के परमेश्वर यहोवा के लिए मुझे बड़ी धुन है; क्योंकि इस्राएलियों ने तेरी वाचा को त्याग दिया, तेरी वेदियों को गिरा दिया, और तेरे नबियों को तलवार से घात किया है। और मैं ही अकेला बच गया हूं, और वे मेरे प्राण के भी खोजी है।”

15यहोवा ने उससे कहा, “जा, दमिश्क के जंगल को लौट जा, और जब तू वहां पहुंचे तो तू सीरिया का राजा होने के लिए हजाएल का अभिषेक करना,

16और इस्राएल का राजा होने के लिए निमशी के पोते येहू का अभिषेक करना; और आबेल-महोला के शापात के पुत्र एलीशा का अपने स्थान पर नबी होने के लिए अभिषेक करना।

17और ऐसा होगा कि जो हजाएल की तलवार से बच जाएगा उसे येहू मार डालेगा, और जो येहू की तलवार से बच जाएगा उसे एलीशा मार डालेगा।

18फिर भी मैं इस्राएल में ऐसे सात हज़ार लोगों को बचाए रखूंगा जिन्होंने बाल के आगे घुटने नहीं टेके और न अपने मुंह से उसे चूमा है।”

19अतः वह वहां से चल पड़ा, और शापात का पुत्र एलीशा उसे मिला जो अपने आगे बारह जोड़ी बैल लिए हुए हल जोत रहा था और स्वयं बारहवीं के साथ था। और एलिय्याह ने उसके पास जाकर अपनी चादर उस पर डाल दी।

20तब वह बैलों को छोड़ कर एलिय्याह के पीछे दौड़ा, और कहने लगा, “मुझे अपने माता-पिता को चूम लेने दे, तब मैं तेरे पीछे चलूंगा।” और उसने उससे कहा, “लौट जा, मैंने तुझे कब रोका है?”

21तब वह उसके पीछे जाने से लौट गया, और एक जोड़ी बैल लेकर उनको बलि किया, और बैलों का हल आदि जलाकर उनका मांस पकाया और लोगों को दिया और उन्होंने खाया; तब वह उठा और एलिय्याह के पीछे चला और उसकी सेवा-टहल करने लगा।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)