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पुराना नियम · 1 शमूएल · अध्याय 11 / 31

1 शमूएल 11

1अब अम्मोनी नाहाश ने याबेश- गिलाद पर चढ़ाई करके घेराबन्दी कर दी। तब याबेश के सब लोगों ने नाहाश से कहा, “हमारे साथ वाचा बाँध, तब हम तेरी सेवा करेंगे।”

2परन्तु अम्मोनी नाहाश ने उनसे कहा, “मैं एक ही शर्त पर तुम्हारे साथ सन्धि करूँगा कि मैं तुममें से प्रत्येक की दाहिनी आँख निकाल लूँगा, और इस प्रकार सम्पूर्ण इस्राएल को अपमानित करूँगा।”

3तब याबेश के प्राचीनों ने उससे कहा, “हमें सात दिनों का अवसर दे कि हम इस्राएल के कोने-कोने में दूत भेज सके। तब यदि हमें छुड़ाने वाला कोई न मिले तो हम तेरे पास आएंगे।”

4तब दूत शाऊल के गिबा में आए, और लोगों के सुनते हुए यह सन्देश उन्हें सुनाया और सब लोग चिल्ला-चिल्लाकर रोने लगे।

5अब देखो, शाऊल बैलों के पीछे-पीछे खेत से चला आ रहा था। उसने कहा, “लोगों को क्या हो गया है? वे क्यों रो रहे हैं?” अतः उन्होंने शाऊल को याबेश के दूतों का सन्देश कह सुनाया।

6इस सन्देश को सुनते ही परमेश्वर का आत्मा शाऊल पर सामर्थ से उतरा, और वह अत्यंत क्रोधित हुआ।

7तब उसने एक जोड़े बैल लेकर उनको टुकड़े-टुकड़े करके काट डाला। फिर उनको दूतों के द्वारा इस्राएल के कोने-कोने में इस सन्देश के साथ भेजा कि जो कोई शाऊल और शमूएल के पीछे न आए उसके बैलों के साथ ऐसा ही किया जाएगा। तब यहोवा का भय लोगों पर छा गया, और वे एक मन होकर निकल आए।

8उसने बेजेक में उनकी गिनती की, और इस्राएलियों के तीन लाख तथा यहूदा के तीस हज़ार पुरुष थे।

9उन्होंने आए हुए उन दूतों से कहा, “योबेश-गिलाद के लोगों से तुम कहना कि कल धूप तेज होने के समय तक तुम छुटकारा पा जाओगे।” अतः दूतों ने जाकर याबेश के लोगों को यह सन्देश दिया जिससे वे प्रफुल्लित हो उठे।

10तब याबेश के लोगों ने कहा, “कल हम तुम्हारे पास निकल आएंगे, और जो कुछ तुम्हें अच्छा लगे वही हमारे साथ करना।”

11दूसरे दिन प्रातःकाल ऐसा हुआ कि शाऊल ने लोगों को तीन दलों में बांट दिया, और वे रात के अन्तिम पहर छावनी के बीच घुस गए और अम्मोनियों को धूप तेज होने तक मारते रहे। और ऐसा हुआ कि जो बच निकले वे यहाँ तक तितर-बितर हो गए कि उनमें से कोई दो जन भी एक साथ न रहे।

12तब लोगों ने शमूएल से कहा, “वह कौन है जिसने कहा था, ‘क्या शाऊल हम पर राज्य करेगा?’ उन मनुष्यों को लाओ कि हम उन को मार डाले।”

13परन्तु शाऊल ने कहा, “आज कोई मनुष्य मारा नहीं जाएगा क्योंकि यहोवा ने आज इस्राएलियों को छुटकारा दिया है।”

14तब शमूएल ने लोगों से कहा, “अब आओ, हम गिलगाल को चलें और वहाँ राज्य को पुनः स्थापित करे।”

15अतः सब लोग गिलगाल को गए, और वहाँ यहोवा के सामने उन्होंने शाऊल को राजा बनाया। वहाँ उन्होंने यहोवा के सामने मेलबलि भी चढ़ाए, और वहाँ शाऊल सहित इस्राएल के सब लोगों ने अत्यधिक आनन्द मनाया।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)