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पुराना नियम · 1 शमूएल · अध्याय 12 / 31

1 शमूएल 12

1फिर शमूएल ने समस्त इस्राएल से कहा, “देखो, तुमने मुझसे जो कुछ कहा वह सब मैंने सुना है, और मैंने तुम्हारे ऊपर राजा नियुक्त किया है।

2और अब यह तुम्हारा राजा तुम्हारे आगे-आगे चल रहा है। परन्तु मेरे तो बाल पक गए और मैं बूढ़ा हो चला हूँ। मेरे पुत्र तुम्हारे साथ है। मैं अपने बचपन से आज तक तुम्हारी अगुवाई करता आ रहा हूँ।

3मैं तुम्हारे सामने हूँ। यहोवा और उसके अभिषिक्त के सामने मेरे विषय साक्षी दो। मैंने किसका बैल लिया? या किसका गदहा छीना? मैंने किसको धोखा दिया? मैंने किस पर अत्याचार किया, या किसके हाथ से घूस लेकर अपनी आँखों में धूल झोंकी? मैं तुम्हें उसे लौटा दूँगा।”

4तब उन्हेांने कहा, “तू ने हमें धोखा नहीं दिया, न हम पर अत्याचार किया, न किसी व्यक्ति के हाथ से कुछ लिया है।”

5उसने उनसे कहा, “यहोवा तुम्हारा साक्षी है और आज उसका अभिषिक्त भी साक्षी है कि तुमने मेरे विरोध में कुछ नहीं पाया है।” उन्होंने उत्तर दिया, “हां, वह साक्षी है।”

6तब शमूएल ने लोगों से कहा, “यहोवा ही ने मूसा और हारून को नियुक्त किया, तथा वही तुम्हारें पूर्वजों को मिस्र देश से निकाल लाया।

7अतः अब तुम ठहरे रहो कि यहोवा ने जो-जो धार्मिकता के कार्य तुम्हारे तथा तुम्हारे पूर्वजों के लिए किये, उनका वर्णन मैं यहोवा के सामने करूँ।

8जब याकूब मिस्र में गया, और तुम्हारे पूर्वजों ने यहोवा को पुकारा तब यहोवा ने मूसा और हारून को भेजा जिन्हाेंने तुम्हारे पूर्वजों को मिस्र से निकाला, और उन्हें इस स्थान में बसाया।

9परन्तु वे अपने परमेश्वर यहोवा को भूल गए। अतः उसने उनको हासोर की सेना के सेनापति सीसरा, पलिश्तियों तथा मोआब के राजा के हाथ बेच डाला और वे उनसे लड़े।

10तब उन्होंने यहोवा को पुकार कर कहा, ‘हमने पाप किया है, क्योंकि हमने यहोवा को त्याग कर बाल और अश्तारोत की सेवा की है। परन्तु अब हमारे शत्रुओं से हमें छुड़ा ले। और हम तेरी सेवा करेंगे।’

11तब यहोवा ने यरुब्बाल, बदान, यिप्तह और शमूएल को भेजकर तुम्हारे चारों ओर के शत्रुओं से तुम्हें छुड़ाया जिससे कि तुम सुरक्षित रहने लगे।

12जब तुमने देखा कि अम्मोनियों का राजा नहाश तुम पर चढ़ आया तब यघपि परमेश्वर यहोवा तुम्हारा राजा था, फिर भी तुमने मुझसे कहा, ‘नहीं, हम पर राजा ही राज्य करे।’

13अतः अब जिस राजा को तुमने चुना है और जिसकी तुमने मांग की वह यहां है। देखो, यहोवा ने तुम पर राजा नियुक्त कर दिया है।

14यदि तुम यहोवा का भय मानो और उसकी आराधना करो, और उसकी वाणी सुनो और यहोवा की आज्ञाओं के विरुद्ध विद्रोह न करो, तो तुम और जो राजा तुम पर राज्य करता है, दोनों ही अपने परमेश्वर यहोवा के पीछे-पीछे चलोगे।

15और यदि तुम यहोवा की वाणी न सुनो, परन्तु यहोवा की आज्ञा के विरुद्ध विद्रोह करो तो यहोवा का हाथ जिस प्रकार तुम्हारे पूर्वजों के विरुद्ध था उसी प्रकार तुम्हारे विरुद्ध भी रहेगा।

16अब भी ठहरे रहो, और इस महान् कार्य को देखो जिसे यहोवा तुम्हारी आंखों के सामने करेगा।

17क्या आज गेहूँ की कटनी नहीं हो रही है? मैं यहोवा को पुकारूँगा कि वह गर्जन और वर्षा भेजे। तब तुम जान लोगे और देखोगे कि अपने लिए राजा मांग कर तुमने यहोवा की दृष्टि में बड़ी दुष्टता की है।”

18अतः शमूएल ने यहोवा को पुकारा। तब यहोवा ने उसी दिन गर्जन और वर्षा भेजी जिससे सब लोग यहोवा और शमूएल से बहुत डर गए।

19तब सब लोगों ने शमूएल से कहा, “अपने परमेश्वर यहोवा से अपने दासों के लिए प्रार्थना कर कि हम मर न जाएं क्योंकि हमने अपने लिए राजा की मांग करके सब पापों को और भी बढ़ा दिया है।”

20शमूएल ने लोगों से कहा, “डरो मत। तुमने यह सब बुराई तो की है, फिर भी यहोवा के पीछे चलना मत त्यागो, परन्तु अपने सम्पूर्ण हृदय से यहोवा की उपासना करो।

21और तुम कदापि न हटना। अन्यथा व्यर्थ वस्तुओं के पीछे जाओगे जो न लाभ पहुँचा सकती और न छुड़ा सकती हैं क्योंकि वे व्यर्थ है।

22यहोवा तो अपने महान् नाम के कारण अपनी प्रजा को नहीं त्यागेगा क्योंकि उसे यह भला लगा कि वह तुम्हें अपनी निज प्रजा बनाए।

23फिर भी जहाँ तक मेरा सम्बन्ध है ऐसा न हो कि मैं तुम्हारे लिए प्रार्थना करना छोड़कर यहोवा के विरुद्ध पाप करूँ। परन्तु मैं तो तुम्हें अच्छेे और सीधे मार्ग की शिक्षा देता रहूँगा।

24केवल इतना हो कि तुम यहोवा का भय मानो और अपने सम्पूर्ण मन और सच्चाई से उसकी आराधना करो, क्योंकि विचार करो कि उसने तुम्हारें लिए कैसे-कैसे महान् कार्य किए है।

25परन्तु यदि तुम बुराई करते ही रहोगे तो तुम और तुम्हारा राजा, दोनों मिट जाओगे।”

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)