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पुराना नियम · 1 शमूएल · अध्याय 6 / 31

1 शमूएल 6

1यहोवा का सन्दूक सात माह तक पलिश्तियों के देश में रहा।

2तब पलिश्तियों ने पुरोहितों और भावी कहने वालों को बुलाकर कहा, “यहोवा के सन्दूक का हम क्या करें? बताओ कि हम उसको उसके स्थान में वापस कैेसे भेजे।”

3तब उन्होंने उत्तर दिया, “यदि तुम इस्राएल के परमेश्वर के सन्दूक को वापस भेजो तो उसे खाली न भेजना। परन्तु तुम उसके लिए निश्चय दोषबलि भेजना। तब तुम चंगे हो जाओगे, और तुम्हें ज्ञात हो जाएगा कि उसका हाथ तुम पर से क्यों नहीं उठा है।”

4तब उन्होंने पूछा, “बदले में हम उसको कौन सी दोषबलि भेजें?” उन्होंने कहा, “पलिश्ती अधिकारियों की संख्या के अनुसार सोने की पांच गिल्टियां और सोने के पांच चूहे, क्योंकि तुम और तुम्हारे सब अधिकारी एक ही महामारी से ग्रसित थे।

5अतः तुम अपनी गिल्टियों तथा अपने देश को उजाड़नेवाले चूहों की आकृतियां बनाओ। इस प्रकार तुम इस्राएल के परमेश्वर की महिमा करोगे। सम्भव है, वह तुम पर से, तुम्हारे देवताओं और तुम्हारे देश पर से अपना हाथ उठा ले।

6तुम अपने हृदय ऐसे कठोर क्यों करते हो जैसे मिस्रियों और पि़फ़रौन ने अपने हृदय कठोर कर लिए थे? जब उसने उनके साथ कठोरता दिखाई, तब क्या उन्होंने उन लोगों को जाने न दिया? और क्या वे चले नहीं गए?

7इसलिए, अब एक नई गाड़ी बनाओ, और दो दूधारू गायें लो जिन पर अब तक जुआ न रखा गया हो। इन गायों को गाड़ी में जोतो, और उनके बछड़ों को उनसे अलग करके घर ले जाओ।

8फिर यहोवा के सन्दूक को लेकर गाड़ी पर रख दो। और दोषबलि के रूप में लौटाई जाने वाली सोने की वस्तुओं को एक अलग सन्दूक में रखकर उसके पास रख दो। तब उसे रवाना कर दो, वह चली जाए।

9और उसे देखते रहना। यदि वह अपने ही क्षेत्र बेतशेमेश के मार्ग पर जाए तो जान लेना यह महा अनष्टि उसी के कारण हम पर हुआ है। यदि नहीं, तो हम जान जाएंगे कि उसके हाथ की मार हम पर नहीं पड़ी थी, परन्तु यह मात्र एक संयोग था।”

10तब उन लोगों ने वैसा ही किया, और दो दूधारू गायें लेकर गाड़ी में जोत दीं, और उनके बछड़ों को घर में बन्द कर दिया,

11फिर यहोवा के सन्दूक को तथा दूसरे सन्दूक में सोने के चूहों और अपनी गिल्टियों की समानता में बनी वस्तुओं को गाड़ी पर रख दिया।

12और गायों ने सीधे बेतशेमेश का मार्ग लिया। वे रम्भाती हुई मुख्य मार्ग पर आगे बढ़ती गईं, न दाहिने मुड़ीं न बाए। पलिश्तियों के अधिकारी बेतशेमेश की सीमा तक उनके पीछे-पीछे गए।

13इस समय बेतशेमेश के लोग घाटी में गेहूं की कटनी कर रहे थे। उन्होंने आंखें उठाईं तो सन्दूक को देखा, और उसे देखने के कारण आनन्दित हुए।

14गाड़ी बेतशेमेशी यहोशू के खेत में प्रवेश कर एक बड़े पत्थर के समीप ठहर गई। तब उन्होंने गाड़ी की लकड़ी को चीरा और गायों को यहोवा के लिए होमबलि करके चढ़ा दिया।

15लेवियों ने यहोवा के सन्दूक और उसके साथ वाले सन्दूक को, जिसमें सोने की वस्तुएं रखी थीं, गाड़ी पर से उतार कर बड़े पत्थर पर रख दिया। और बेतशेमेश के लोगों ने उसी दिन यहोवा के लिए होमबलि और बलिदान चढ़ाए।

16पलिश्तियों के पांचों अधिकारियों ने इसे देखा और उसी दिन एक्रोन लौट गए।

17पलिश्तियों ने दोषबलि स्वरूप यहोवा को सोने की जो गिल्टियां चढ़ाईं वे ये हैं, अर्थात् एक अश्दोद के लिए, एक गाज़ा के लिए, एक अश्कलोन के लिए, एक गत के लिए और एक एक्रोन के लिए।

18और वे सोने के चूहे पलिश्तियों के उन पांचों अधिकारियों के नगरों की गिनती के अनुसार थे, चाहे वे शहरपनाह वाले नगर हों, या बिना शहरपनाह वाले। वह बड़ा पत्थर जिस पर यहेवा का सन्दूक रखा गया था, आज तक बेतशेमेशी यहोशू के खेत में साक्षी है।

19और उसने बेतशेमेश के कुछ मनुष्यों को मार डाला क्योंकि उन्होंने यहोवा के सन्दूक के भीतर झांका था। उसने नगर की प्रजा में से पचास हज़ार सत्तर मनुष्यों को मार डाला। इस कारण लोगों ने बड़ा विलाप किया क्योंकि यहोवा ने लोगों का बड़ा संहार किया था।

20बेतशेमेश के लोगों ने कहा, “इस पवित्र परमेश्वर, यहोवा के सामने कौन खड़ा रह सकता है? और हमारे पास से वह किसके पास चला जाए?”

21इसलिए, उन्होंने किर्यत-यारीम के निवासियों के पास यह कहने को दूत भेजे, “पलिश्तियों ने यहोवा के सन्दूक को लौटा दिया है। आकर उसे अपने यहां ले जाओ।”

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)