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पुराना नियम · 1 शमूएल · अध्याय 7 / 31

1 शमूएल 7

1तब किर्यत-यारीम के लोग आए और यहोवा के सन्दूक को ले गए, और उसे अबीनादाब के घर में जो पहाड़ी पर था लाकर रख दिया। तब यहोवा के सन्दूक की देखभाल करने के लिए अबीनादाब के पुत्र एलीआज़ार को पवित्र किया।

2जिस दिन से सन्दूक किर्यत-यारीम में रखा गया था बहुत समय अर्थात् बीस वर्ष बीत गए थे। इधर इस्राएल का सम्पूर्ण घराना यहोवा के लिए विलाप करता रहा।

3तब शमूएल ने इस्राएल के सम्पूर्ण घराने से कहा, “यदि तुम पूरे हृदय से यहोवा की ओर फिरो, अन्यजातियों के देवताओं और अश्तारोत देवी को अपने मध्य से दूर करो, और अपने हृदय यहोवा की ओर लगाकर केवल उसी की आराधना करो, तो वह तुम्हें पलिश्तियों के हाथ से छुड़ाएगा।”

4अतः इस्राएलियों ने बाल और अश्तारोत को दूर किया, और केवल यहोवा की आराधना करने लगे।

5तब शमूएल ने कहा, “सम्पूर्ण इस्राएल को मिस्पा में एकत्रित करो। तब मैं तुम्हारे लिए यहोवा से प्रार्थना करूँगा।”

6सो वे मिस्पा में एकत्रित हुए। और उन्होंने जल भर कर यहोवा के सामने उण्डेल दिया, और उस दिन उपवास किया और वहां कहा, “हमने यहोवा के विरुद्ध पाप किया है।” तब शमूएल ने मिस्पा में इस्राएलियों का न्याय किया।

7जब पलिश्तियों ने सुना कि इस्राएल मिस्पा में एकत्रित हुए हैं तब पलिश्तियों के अधिकारियों ने इस्राएल पर आक्रमण कर दिया। जब इस्राएलियों ने यह सुना तो वे पलिश्तियों से भयभीत हो गए।

8तब इस्राएलियों ने शमूएल से कहा, “हमारे परमेश्वर यहोवा से हमारे लिए प्रार्थना करना न छोड़ जिससे वह हमें पलिश्तियों के हाथ से बचाए।”

9अतः शमूएल ने एक दूध-पीता मेमना लेकर उसको यहोवा के लिए सम्पूर्ण होमबलि किया, और शमूएल ने इस्राएल के लिए यहोवा से गिड़गिड़ाकर प्रार्थना की और यहोवा ने उसको उत्तर दिया।

10शमूएल तो होमबलि चढ़ा ही रहा था कि पलिश्ती इस्राएल के विरुद्ध चढ़ाई करने समीप आ गए। परन्तु उस दिन यहोवा ने पलिश्तियों के विरुद्ध बड़ी गड़गड़ाहट के साथ भयंकर गर्जना की, और उनको घबरा दिया जिससे उनके पाँव इस्राएल के सामने उखड़ गए।

11तब इस्राएल के पुरुषों से मिस्पा से बाहर जाकर पलिश्तियों का पीछा किया, और बेतकर के नीचे तक उन्हें मारते चले गए।

12तब शमूएल ने एक पत्थर लेकर मिस्पा और शेन के बीच स्थापित किया, तथा यह कहकर उसका नाम एबेनेज़ेर रखा, “यहाँ तक यहोवा ने हमारी सहायता की है।”

13इस प्रकार, पलिश्ती दबा दिए गए, और वे फिर कभी इस्राएल की सीमा के भीतर नहीं आए। शमूएल के जीवनभर यहोवा का हाथ पलिश्तियों के विरुद्ध बना रहा।

14तब एक्रोन से गत तक जितने नगर पलिश्तियों ने छीन लिए थे वे इस्राएल को पुनः प्राप्त हो गए। इस्राएल ने अपनी सीमाओं को पलिश्तियों से छुड़ा लिया। इस प्रकार, इस्राएल और अमोरियों के बीच शान्ति स्थापित हुई।

15शमूएल अपने जीवन-भर इस्राएल का न्याय करता रहा।

16वह प्रति वर्ष बेतेल, गिलगाल, और मिस्पा का घूम-घूमकर दौरा करके इन सब स्थानों में इस्राएल का न्याय किया करता था।

17तब वह रामा को लौट जाया करता था जहाँ उसका घर था, और वहाँ भी इस्राएल का न्याय किया करता था। वहाँ उसने यहोवा के लिए एक वेदी बनाई।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)