पुराना नियम · 1 शमूएल · अध्याय 9 / 31
1 शमूएल 9
1बिन्यामीन कुल का एक मनुष्य था जिसका नाम कीश था, जो अबीएल का पुत्र, जो सरोर का, जो बकरोत का और जो अपीह का पुत्र था। वह एक बिन्यामीनी का पुत्र तथा पराक्रमी शूरवीर था।
2उसका एक पुत्र था जिसका नाम शाऊल था। वह जवान और सर्वांग सुन्दर था। इस्राएलियों में उससे बढ़कर सुन्दर कोई दूसरा पुरुष नहीं था। वह इतना ऊँचा था कि प्रत्येक उसके कांधे तक ही आता था।
3तब ऐसा हुआ कि शाऊल के पिता कीश की गदहियां खो गई थी। अतः उसने अपने पुत्र शाऊल से कहा, “उठ, सेवकों में से एक सेवक को अपने साथ लेकर जा और गदहियों को खोज ला।”
4तब वह एप्रैम के पहाड़ी प्रदेश तथा शलीशा के देश से होकर हुए निकला, परन्तु उन्हें नहीं पाया। तब वे शालीम के देश से हाकर निकले, परन्तु वे वहाँ भी नहीं थी। तब वह बिन्यमीनियों के देश से होकर निकला फिर भी उन्हें नहीं पाया।
5जब वे सूफ के देश में आए तब शाऊल ने अपने साथ के सेवक से कहा, “आ, हम घर लौट चलें, कहीं ऐसा न हो कि मेरा पिता गदहियों की चिन्ता छोड़कर हमारी चिन्ता करने लगे।”
6तब सेवक ने उससे कहा, “देख, इस नगर में परमेश्वर का एक जन है जो लोगों में आदरणीय है। वह जो कुछ कहता है वह निश्चय सच होता है। आ, हम वहाँ चले। कदाचित् जिस यात्रा पर हम निकले हैं उसके विषय में वह हमें कुछ बता सके।”
7शाऊल ने अपने सेवक से कहा, “परन्तु देख, यदि हम जाएं तो उसके लिए क्या ले जाएंगे? क्योकि हमारी थैलियों में रोटियां नहीं रह गईं, और परमेश्वर के जन को देने के लिए हमारे पास कोई भेंट नहीं है। हमारे पास है भी क्या?”
8तब सेवक ने शाऊल को पुनः उत्तर दिया, “देख, मेरे हाथ में चांदी के शेकेल का एक चौथाई है। परमेश्वर के जन को मैं यही दूँगा, और वह हमें मार्ग दर्शाएगा।”
9पूर्वकाल के इस्राएल में जब कोई व्यक्ति परमेश्वर से पूछने को जाता तब वह कहता था, “आओ, हम दर्शी के पास चलें,” क्योंकि अब जो नबी कहलाता है, वह प्राचीनकाल में दर्शी कहलाता था
10तब शाऊल ने अपने सेवक से कहा, “तूने ठीक कहा; आ, चले।” अतः वे नगर को गए जहाँ परमेश्वर का जन था।
11चढ़ाई पर चढ़ते हुए जब वे नगर को जा रहे थे तब उन्हें कुछ युवतियां मिलीं जो जल भरने जा रही थी। उन्होंने उनसे पूछा, “क्या दर्शी यहाँ है?”
12उन्होंने उनको उत्तर दिया, “हां, है। देखो, वह तुम्हारे आगे जा रहा है। जल्दी करो, वह आज ही नगर में आया है, क्योंकि आज लोगों ने ऊँचे स्थान पर बलि का आयोजन किया है।
13जैसे ही तुम नगर में प्रवेश करोगे, इससे पहिले कि वह ऊँचे स्थान पर भोजन करने जाए तुम्हारी उससे भेंट हो जाएगी। क्योकि लोग उसके पहुँचने से पहले भोजन नहीं करेंगे। बलि के लिए उसी को धन्यवाद करना होगा। इसके बाद ही आमंत्रित लोग भोजन कर पाएंगे। इसलिए, जल्दी जाओ। वह तुमको इसी समय मिल जाएगा।”
14अतः वे नगर में चढ़ गए। जैसे ही वे नगर में पहुँचे, देखो, शमूएल ऊँचे स्थान को जाने के लिए उनकी ओर बढ़ता चला आ रहा था।
15शाऊल के आने से एक दिन पूर्व यहोवा ने शमूएल पर यह कहकर प्रकट कर दिया था,
16“कल प्रायः इसी समय मैं बिन्यामीन के देश से एक पुरुष को तेरे पास भेजूंगा। तू मेरी प्रजा इस्राएल का राजा होने के लिए उसका अभिषेक करना। वही मेरी प्रजा को पलिश्तियों के हाथ से छुटकारा देगा। क्योंकि मैंने अपनी प्रजा पर ध्यान दिया है उनकी पुकार मुझ तक पहुँची है।”
17जब शमूएल ने शाऊल को देखा तब यहोवा ने उससे कहा, “देख, यही वह पुरुष है, जिसके विषय में मैंने तुझसे कहा था कि यही मेरी प्रजा पर राज्य करेगा।”
18तब शाऊल फाटक के पास शमूएल से आ मिला, और कहा, “कृपया मुझे बता कि दर्शी का घर कहां है?”
19शमूएल ने शाऊल को उत्तर दिया, “मैं ही दर्शी हूँ। मुझसे पहले ऊँचे स्थान पर चढ़ जा, क्योंकि तू आज मेरे साथ भोजन करेगा। प्रातःकाल मेैं तेरे मन की सब बातें बताकर तुझे जाने दूँगा।
20जहाँ तक तेरी गदहियों का प्रश्न है जो तीन दिन पूर्व खो गई थीं, उनकी कोई चिन्ता न कर क्योंकि वे मिल चुकी है। इस्राएल में जो कुछ चाहने योग्य है वह किसके लिए है? क्या वह सब तेरे और तेरे पिता के परिवार के लिए नहीं?”
21तब शाऊल ने उत्तर दिया, “क्या मैं बिन्यामीन गोत्र का नहीं, जो इस्राएल के कुलों में सबसे छोटा है? फिर क्या मेरा परिवार बिन्यामीनियों के परिवार में सबसे नगण्य नहीं? फिर तू मुझसे ऐसा क्यों कहता है?”
22तब शमूएल, शाऊल और उसके सेवक को अपने साथ बड़े कमरे में ले आया, और लगभग तीस आमंत्रित अतिथियों के बीच उसे प्रमुख आसन पर बिठाया।
23फिर शमूएल ने रसोइए से कहा, “उस भाग को ले आ जिसे मैंने तुझे देकर कहा था, ‘इसे अलग रखना’।”
24रसोइए ने रान को मांस सहित लाकर शाऊल के सामने परोस दिया। तब शमूएल ने कहा, “यह वह मांस है जो बचा कर रखा गया है। इसे अपने सामने रख कर खा, क्योंकि यह तेरे लिए इसी निर्धारित समय के लिए रखा गया था। जैसा कि मैंने कहा था कि मैंने लोगों को आमंत्रित किया है।” अतः शाऊल ने उस दिन शमूएल के साथ भोजन किया।
25जब वे ऊँचे स्थान से उतर कर नगर में आए तब शमूएल ने शाऊल से घर की छत पर बातें की।
26फिर वे तड़के उठे। पौ फटते ही शमूएल ने शाऊल को छत पर बुला कर कहा, “उठ, मैं तुझे विदा करूँगा।” शाऊल उठा। तब वह और शमूएल सड़क पर बाहर निकल गए।
27जब वे नगर के छोर पर पहुँच रहे थेे तब शमूएल ने शाऊल से कहा, “सेवक से कह कि वह चलकर हमसे आगे बढ़ जाए, परन्तु अभी तू खड़ा रह जिससे कि मैं तुझे परमेश्वर का वचन सुनाऊँ।”
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)