नया नियम · 1 तीमुथियुस · अध्याय 3 / 6
1 तीमुथियुस 3
1यह कथन सत्य है कि यदि कोई अध्यक्ष बनने के अभिलाजा रखता है तो वह एक भला कार्य करने की इच्छा करता है।
2इसलिए अवश्य है कि अध्यक्ष निर्दोष हो, एक ही पत्नी का पति हो, संयमी, समझदार, सम्माननीय, अतिथि सत्कार करने वाला और शिक्षा देने में निपुण हो।
3शराबी या मारपीट करने वाला न हो, परन्तु नम्र हो, झगड़ालू और धन का लोभी न हो।
4वह घर का अच्छा प्रबन्ध करता हो, अपने बाल-बच्चों को ऐसे अनुशासन में रखता हो कि वे उसका सम्मान करे।
5यदि कोई व्यक्ति अपने ही घर का प्रबन्ध करना नहीं जानता, तो वह परमेश्वर की कलीसिया की देखभाल कैसे करेगा?
6वह कोई नया चेला न हो, कहीं ऐसा न हो कि अहंकार में पड़कर वह शैतान के समान दण्ड का भागी हो जाए।
7कलीसिया के बाहर के लोगों में वह सुनामी हो, कहीं ऐसा न हो कि किसी दोष में पड़कर वह शैतान के फन्दे में फंस जाए।
8इसी प्रकार धर्म-सेवक भी प्रतिज्ठित व्यक्ति हों, दो-मुंहे या पियक्कड़ न हों और न नीच कमाई के लोभी हों,
9परन्तु विश्वास के भेद को निर्मल विवेक से सुरक्षित रखने वाले हो।
10और ये भी पहिले परखे जाएं, तब यदि दोष रहित हों तो धर्म-सेवक की भांति इन्हें सेवा करने दो।
11इसी प्रकार स्त्रियां भी सम्माननीय हों, द्वेजपूर्ण गपशप करने वाली न हों, परन्तु संयमी तथा सब बातों में विश्वासयोग्य हो।
12धर्म-सेवक एक पत्नी का पति हो और अपने बाल-बच्चों तथा परिवार का अच्छा प्रबन्धक हो।
13क्योंकि जिन्होंने धर्म-सेवकों का कार्य अच्छी तरह से पूरा किया है, वे अपने लिए तो एक उच्च सम्मान तथा उस विश्वास में जो मसीह यीशु में है, दृढ़ निश्चय प्राप्त करते है।
14मैं यह आशा करते हुए कि तुम्हारे पास शीघ्र आऊंगा तुम्हें ये बातें लिख रहा हू।
15यदि मेरे आने में विलम्ब हो जाए तो तुझे मालूम रहे कि परमेश्वर के परिवार में, जो जीवित परमेश्वर की कलीसिया और सत्य का स्तम्भ तथा आधार है, तेरा व्यवहार कैसा होना चाहिए।
16और निस्सन्देह भक्ति का भेद बड़ा गम्भीर है-वह जो शरीर में होकर प्रकट हुआ, आत्मा द्वारा धर्मी प्रमाणित हुआ, स्वर्गदूतों को दिखाई दिया, ग़ैरयहूदियों में उसका प्रचार हुआ, जगत में उस पर विश्वास किया गया और महिमा में ऊपर उठा लिया गया।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)