पुराना नियम · 2 इतिहास · अध्याय 1 / 36
2 इतिहास 1
1अब दाऊद का पुत्र सुलैमान अपने राज्य में स्थिर हो गया, और उसका परमेश्वर यहोवा उसके साथ था और उसे अत्यधिक बढ़ाता रहा।
2और सुलैमान ने समस्त इस्राएल से अर्थात् सहस्रपतियों तथा शतपतियों, न्यायियों तथा सम्पूर्ण इस्राएल के सब अगुवों से जो अपने-अपने पिता के घरानों के मुखिए थे, बातें की।
3तब सुलैमान सम्पूर्ण मंडली के साथ गिबोन के ऊंचे स्थान पर गया, क्योंकि परमेश्वर का मिलापवाला तम्बू, जिसे यहोवा के दास मूसा ने जंगल में बनाया था, वहीं पर था।
4परन्तु परमेश्वर के सन्दूक को दाऊद किर्यत-यारीम से उस स्थान पर ले आया था जो उसने उसके लिए तैयार किया था; क्योंकि उसने उसके लिए यरूशलेम में एक तम्बू खड़ा किया था।
5तब कांसे की वह वेदी जो हूर के पोते, ऊरी के पुत्र बसलेल ने बनाई थी, गिबोन मेें यहोवा के निवास के सामने थी; अतः सुलैमान मंडली सहित वहां गया।
6और सुलैमान वहीं मिलापवाले तम्बू की कांस्य-वेदी के पास यहोवा के सामने गया और उसने उस पर एक हजार होमबलि चढ़ाए।
7उसी रात परमेश्वर ने सुलैमान को दर्शन देकर उससे कहा, “जो कुछ तू चाहे कि मैं तुझे दूं, वह मांग।”
8सुलैमान ने परमेश्वर से कहा, “तूने मेरे पिता दाऊद पर बड़ी करफ़णा की और मुझे उसके स्थान पर राजा बनाया है।
9अब, हे यहोवा परमेश्वर, जो वचन तूने मेरे पिता दाऊद को दिया था वह पूरा हुआ है; क्योंकि तूने मुझे एक ऐसी जाति का राजा बनाया है जो पृथ्वी के धूलि-कणों के सदृश असंख्य है।
10अतः अब मुझे बुद्धि और ज्ञान प्रदान कर कि मैं इस प्रजा की अगुवाई करूं, क्योंकि तेरी इस महान् जाति पर कौन शासन कर सकता है?”
11और परमेश्वर ने सुलैमान से कहा, “इसलिए कि तेरे मन में यह बात थी और तूने न तो धन, न सम्पत्ति न सम्मान न बैरियों के प्राण और न ही अपने लिए दीर्घायु मांगी है, परन्तु तूने अपने लिए बुद्धि और ज्ञान मांगा है कि मेरे लोगों का जिन पर मैंने तुझे राजा नियुक्त किया है, शासन कर सके,
12तुझे बुद्धि और ज्ञान दिया जाता है। और मैं तुझे इतना धन, सम्पत्ति और सम्मान दूंगा, जितना न तो तुझसे पहले किसी राजा को मिला और न ही तेरे बाद किसी राजा को मिलेगा।”
13अतः सुलैमान गिबोन के ऊंचे स्थान, अर्थात् मिलापवाले तम्बू के सामने से यरूशलेम चला गया और इस्राएल पर राज्य करने लगा।
14और सुलैमान ने रथ और घुड़सवार इकट्ठे कर लिए। उसके पास एक हजार चार सौ रथ और बारह हजार घुड़सवार थे; और उसने उन्हें रथ वाले नगरों में तथा राजा के पास यरूशलेम में रखा।
15और यरूशलेम में बहुतायत के कारण राजा ने सोने-चांदी को पत्थर के समान और देवदार को तराई के गूलर के समान कर दिया।
16और सुलैमान के यहां घोड़ों का आयात मिस्र और कोए से होता था और राजा के व्यापारी उन्हें दाम देकर कोए से मंगाते थे।
17मिस्र से एक रथ चांदी के छः सौ शेकेल में, और एक घोड़ा डेढ़ सौ शेकेल में आयात होता था और उसी प्रकार वे हित्तियों और अराम के सब राजाओं को भी भेजे जाते थे।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)