Loading account

पुराना नियम · 2 इतिहास · अध्याय 12 / 36

2 इतिहास 12

1और ऐसा हुआ कि जब रहूबियाम का राज्य स्थिर एवं दृढ़ हो गया, तब उसने यहोवा की व्यवस्था को त्याग दिया।

2और ऐसा हुआ कि यहोवा के प्रति किए गए उनके विश्वासघात के कारण राजा रहूबियाम के पांचवें वर्ष में मिस्र के राजा शीशक ने

3एक हजार दो सौ रथ तथा साठ हजार घुड़सवार लेकर यरूशलेम पर चढ़ाई कर दी। और जो लोग मिस्र से उसके साथ आए, अर्थात् लिबियाई, सुक्किय्यी और इथियोपियाई वे असंख्य थे।

4और उसने यहूदा के गढ़ वाले नगरों को अपने अधिकार में कर लिया, और यरूशलेम तक आ गया।

5तब शमायाह नबी रहूबियाम तथा यहूदा के शासकों के पास आया जो शीशक के भय से यरूशलेम में इकट्ठे हुए थे, और उसने उनसे कहा, “यहोवा यों कहता हैः तुमने मुझे त्याग दिया है, अतः मैंने तुमको त्यागकर शीशक के हाथ में कर दिया है।”

6अतः इस्राएल के शासकों तथा राजा ने अपने को दीन किया और कहा, “यहोवा धर्मी है।”

7और जब यहोवा ने देखा कि उन्होंने अपने आपको दीन किया है, तो यहोवा का वचन शमायाह के पास इस प्रकार से आया, “उन्होंने अपने को दीन किया है, अतः मैं उनको नष्ट नहीं करूंगा, वरन् मैं उनको कुछ सीमा तक छुटकारा दूंगा, और मेरा प्रकोप शीशक के द्वारा यरूशलेम पर न भड़केगा।

8परन्तु वे उसके दास तो होंगे जिससे कि वे जान लें कि मेरी सेवा तथा देश-देश के राज्यों की सेवा में क्या अन्तर है।”

9अतः मिस्र का राजा शीशक यरूशलेम पर चढ़ाई करके यहोवा के भवन और राजमहल का ख़जाना ले गया। वह सब कुछ ले गया, यहां तक कि उस सोने की ढालों को भी ले गया, जिन्हें सुलैमान ने बनवाईं थी।

10तब राजा रहूबियाम ने उनके बदले कांसे की ढालें बनवाईं, और उन्हें रक्षक-दल के प्रधाानों को सौंप दिया जो राजभवन के द्वार पर पहरा देते थे।

11और ऐसा था कि जब-जब राजा यहोवा के भवन में प्रवेश करता था, रक्षक आकर उन्हें उठा ले जाते थे और तब वे उन्हें पहरेदारों की कोठरी में वापस रख देते थे।

12और जब उसने अपने को दीन किया, उस पर से यहोवा का क्रोध टल गया जिससे उसने उसका सर्वनाश नहीं किया वरन् यहूदा की दशा में कुछ सुधार भी हुआ।

13अतः यरूशलेम में राजा रहूबियाम ने सुदृढ़ होकर शासन किया। जब रहूबियाम राज्य करने लगा, तो उसकी आयु इकतालीस वर्ष की थी, और उसने यरूशलेम में सत्रह वर्ष तक राज्य किया अर्थात् उस नगर में जिसे यहोवा ने इस्राएल के समस्त गोत्रों में से चुन लिया था कि वहां उसका नाम रहे। उसकी माता का नाम नामा था जो अम्मोनी थी।

14उसने बुरा किया क्योंकि उसने अपना मन यहोवा की ओर न लगाया।

15क्या आरम्भ से अन्त तक रहूबियाम के कार्य शमायाह नबी और इद्दो दर्शी के लेखों में वंशावली के अनुसार नहीं लिखे हैं? और रहूबियाम तथा यारोबाम में निरन्तर युद्ध होते रहे।

16और रहूबियाम अपने पूर्वजों के साथ सो गया, और उसे दाऊद नगर में मिट्टी दी गई। और उसका पुत्र अबिय्याह उसके स्थान पर राजा हुआ।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)