पुराना नियम · 2 इतिहास · अध्याय 14 / 36
2 इतिहास 14
1अतः अबिय्याह अपने पूर्वजों के संग सो गया और उसको दाऊद नगर में मिट्टी दी गई; और उसका पुत्र आसा उसके स्थान पर राजा बना। उसके दिनों में देश में दस वर्ष तक शान्ति बनी रही।
2और आसा ने वही किया जो उसके परमेश्वर यहोवा की दृष्टि में भला और उचित था,
3क्योंकि उसने पराई वेदियों और ऊंचे स्थानों को हटा दिया, पूजा की लाटों को तोड़ दिया तथा अशेराओं को काट डाला।
4और यहूदा के लोगों को आज्ञा दी कि अपने पूर्वजों के परमेश्वर यहोवा की खोज करें तथा व्यवस्था और आज्ञा को माने।
5उसने यहूदा के सारे नगरों से ऊंचे स्थानों तथा धूप-वेदियों को हटा दिया। उसके शासन-काल मेें राज्य में शान्ति बनी रही।
6उसने यहूदा में गढ़वाले नगरों का निर्माण किया क्योंकि देश में शान्ति थी, और उन वर्षों में किसी ने उससे युद्ध नहीं किया। क्योंकि यहोवा ने उसे पूर्ण विश्राम दिया था।
7अतः उसने यहूदा के लोगों से कहा, “आओ, हम इन नगरों का निर्माण करें और उनके चारों ओर शहरपनाह तथा गढ़ बनाएं और उनमें फाटक तथा बेंड़ें लगाए। यह देश तो अभी तक हमारा ही है, क्योंकि हमने अपने परमेश्वर यहोवा की खोज की है; हमने उसे खोजा है, और उसने हमें चारों ओर से शान्ति दी है।” अतः उन्होंने उनका निर्माण किया और सम्पन्न हुए।
8आसा की सेना में यहूदा से तीन लाख योद्धा थे जो बड़ी बड़ी ढालों और बर्छियों से लैस थे तथा बिन्यामीन से दो लाख अस्सी हजार थे जो ढाल और धनुष से लैस थे; ये सब-के-सब शूरवीर थे।
9तब इथियोपिया-वासी जेरह ने दस लाख योद्धाओं और तीन सौ रथों की सेना लेकर उन पर चढ़ाई कर दी और मारेशा तक आ गया।
10अतः आसा उसका सामना करने निकला। उन्होंने मरेशा के निकट सापता घाटी में युद्ध के लिए मोर्चा बांधा।
11तब आसा ने अपने परमेश्वर यहोवा की दुहाई देकर कहा, “हे यहोवा, सामर्थी के विरफ़द्ध युद्ध में निर्बल की सहायता करने वाला तुझे छोड़ और कौन है; इसलिए हे हमारे परमेश्वर यहोवा, हमारी सहायता कर, क्योंकि हम तुझ पर भरोसा रखते है। हम तो तेरे नाम में इस विशाल सेना के विरफ़द्ध आए है। हे यहोवा, तू हमारा परमेश्वर है; मनुष्य तुझ पर प्रबल न होने पाए।”
12अतः यहोवा ने यहूदा और आसा के सामने इथियोपियाइयों को पराजित किया और इथियोपियाई भाग गए।
13और आसा और जो लोग उसके साथ थे, उन्होंने उनको गरार तक खदेड़ा; और इतने इथियोपियाई मारे गए कि वे फिर सिर न उठा सके, क्योंकि वे यहोवा और उसकी सेना के सम्मुख तहस-नहस हो गए। यहूदी अपार सम्पत्ति लूटकर ले गए।
14और यहूदियों ने गरार के आसपास के सब नगरों का नाश किया, क्योंकि यहोवा का भय गरारियों में समा गया था; और उन्होंने सब नगरों को लूट लिया, क्योंकि उनमें बहुत लूट थी।
15उन्होंने उनको भी मारा जिनके पास पशु-धन था, और बहुत-सी भेड़-बकरियां और ऊंट हांक ले गए। तब वे यरूशलेम लौट आए।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)