पुराना नियम · 2 इतिहास · अध्याय 15 / 36
2 इतिहास 15
1तब परमेश्वर का आत्मा ओदेद के पुत्र अजर्याह पर उतरा,
2और वह आसा से मिलने गया और उससे कहा, “हे आसा और सारे यहूदा और बिन्यामीन मेरी सुनोः जब तक तुम यहोवा के साथ रहोगे तब तक वह भी तुम्हारे साथ रहेगा और यदि तुम उसको खोजोे तो वह तुमको मिलेगा; पर यदि तुम उसे त्याग दोगे तो वह भी तुम्हें त्याग देगा।
3और इस्राएल बहुत दिनों तक सत्य परमेश्वर रहित, सिखाने वाले याजक रहित, तथा व्यवस्था रहित रहा।
4परन्तु संकट के समय जब-जब उन्होंने इस्राएल के परमेश्वर यहोवा की ओर फिरकर उसको खोजा तब तब वह उन्हें मिला।
5उन दिनों में न तो जाने वाले को और न आने वाले को कुछ शान्ति होती थी, क्योंकि देश के सब निवासी बहुत से उत्पातों के कारण आतंकित थे।
6जाति से जाति तथा नगर से नगर कुचला जा रहा था क्योंकि परमेश्वर ने उन्हें हर प्रकार के संकट से पीड़ित किया था।
7परन्तु तुम दृढ़ बने रहो और साहस न छोड़ो क्योंकि तुम्हारे काम का प्रतिफल तुम्हें मिलेगा। ”
8जब आसा ने इन बातों, और ओदेद नबी के पुत्र अजर्याह के द्वारा की गई नबूवत को सुना तो उसने साहस बांधा और यहूदा, और बिन्यामीन के सारे देश में से तथा उन नगरों में से भी जो उसने एप्रैम के पहाड़ी क्षेत्र में जीत लिए थे, सब घिनौनी मूर्तियों को हटवा दिया। तब उसने यहोवा की वेदी को जो यहोवा के ओसारे के सामने थी फिर से बनवाया।
9और उसने समस्त यहूदा और बिन्यामीन और उन लोगों को जो एप्रैम, मनश्शे और शिमोन में उसके साथ रहते थे इकट्ठा किया, क्योंकि जब उन्होंने देखा था कि यहोवा उसका परमेश्वर उसके साथ है तो इस्राएल में से बहुत से लोग उसकी ओर हो गए।
10अतः वे आसा के राज्यकाल के पन्द्रहवें वर्ष के तीसरे महीने में यरूशलेम में इकट्ठे हुए।
11और उस दिन उन्होंने उस लूट के माल में से जो वे साथ लाए थे, सात सौ बैल और सात हजार भेड़-बकरियां यहोवा के लिए बलिदान चढ़ाए।
12और वे उस वाचा में सम्मिलित हुए कि अपने पूरे मन और सारे प्राण से अपने पूर्वजों के परमेश्वर यहोवा की खोज करें;
13और जो कोई इस्राएल के यहोवा परमेश्वर की खोज न करे, चाहे वह छोटा हो या बड़ा, पुरफ़ष हो या स्री, वह मार डाला जाए।
14इसके अतिरिक्त, उन्होंने ऊंचे शब्द से जय-जयकार के साथ तुरहियां और नरसिंगे बजाते हुए यहोवा की शपथ खाई।
15और उस शपथ के कारण सारे यहूदा ने आनन्द मनाया, क्योंकि उन्होंने अपने सारे मन से शपथ खाई थी और बड़ी अभिलाषा से उसे खोजा था और वह उनको मिल गया। अतः यहोवा ने चारों ओर से उनको शान्ति दी।
16और राजा आसा ने अपनी माता माका को राजमाता के पद से हटा दिया क्योंकि उसने अशेरा की एक घृणित प्रतिमा बनाई थी। आसा ने उसकी उस घृणित प्रतिमा को काट डाला और उसे पीसकर किद्रोन नाले में जला दिया।
17परन्तु इस्राएल में से ऊंचे स्थान ढाए न गए, फिर भी आसा के जीवन भर उसका मन निर्दोष रहा।
18और उसने अपने पिता द्वारा अर्पित की हुई वस्तुएं और अपनी अर्पण की हुई वस्तुएं अर्थात् चांदी, सोना और पात्र परमेश्वर के भवन में पहुंचा दिए।
19और राजा आसा के शासनकाल के पैंतीसवें वर्ष तक फिर युद्ध न हुआ।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)