नया नियम · 2 कुरिन्थियों · अध्याय 3 / 13
2 कुरिन्थियों 3
1क्या हम फिर अपनी प्रशंसा करने लगे? या अन्य व्यक्तियों की तरह क्या हमें भी तुमसे प्रशंसा-पत्र लेने अथवा तुम्हें देने की आवश्यकता है?
2हमारा पत्र तो तुम ही हो, जो हमारे हृदय में लिखा गया है और जिसे सब लोग जानते तथा पढ़ते हैं,
3तथा यह प्रकट करते हो कि मसीह का पत्र तुम हो जिनकी हमने देख-भाल की, और जो न तो स्याही से, और न पत्थर की पटियाओं पर, परन्तु जीवित परमेश्वर के आत्मा से मानव हृदय-पटल पर लिखा गया है।
4और मसीह के द्वारा, परमेश्वर पर हमें ऐसा ही भरोसा है।
5यह नहीं कि हम अपने आप में इस योग्य हैं कि यह समझें कि हम स्वयं कुछ कर सकते हैं, परन्तु हमारी योग्यता तो परमेश्वर की ओर से है,
6जिसने हमें नई वाचा के सेवक होने के योग्य बनाया, अक्षर की वाचा नहीं परन्तु आत्मा की, क्योंकि अक्षर तो मारता है, परन्तु आत्मा जिलाता है।
7परन्तु यदि मृत्यु की वह वाचा जिसके अक्षर पत्थर के पटलों पर अंकित हैं, इतने तेजस्वी रूप में आई कि इस्राएल की सन्तान भी मूसा के चेहरे के तेज को, जो घटता जा रहा था, एकटक होकर न देख सकी,
8तो फिर आत्मा की वाचा और अधिक तेजस्वी क्यों न होगी?
9क्योंकि जब दोषी ठहराने वाली वाचा तेजस्वी है, तो धर्मी ठहराने वाली वाचा और भी अधिक तेजस्वी है।
10वास्तव में वह जो तेज था, अब उस तेज के सम्मुख जो उससे बढ़कर तेजस्वी है निस्तेज हो गया,
11क्योंकि यदि वह क्षीण होने वाला तेजस्वी था, तो वह जो स्थिर है और भी अधिक तेजस्वी है।
12ऐसी आशा होने के कारण हम बड़े साहस से बोलते हैं,
13और हम मूसा के सदृश नहीं, जो अपने चेहरे पर परदा डाले रहता था कि इस्राएल की सन्तान एकटक होकर उस लोप होते हुए तेज के अन्त को न देख सके।
14परन्तु उनके मन कठोर हो गए, क्योंकि आज भी इस पुरानी वाचा को पढ़ते समय वही परदा यथावत पड़ा रहता है, क्योंकि वह केवल मसीह में हटाया जाता है।
15आज के दिन जब कभी मूसा की पुस्तक पढ़ी जाती है तो उनके हृदय पर परदा पड़ा रहता है;
16‘परन्तु जब कभी कोई मनुष्य प्रभु की ओर फिरता है तो वह परदा हटा लिया जाता है।’
17अब यह प्रभु तो आत्मा है, और जहां प्रभु का आत्मा है, वहां स्वतन्त्रता है।
18परन्तु हम सब खुले चेहरे से, प्रभु का तेज मानो दर्पण में देखते हुए, प्रभु अर्थात् आत्मा के द्वारा उसी तेजस्वी रूप में अंश-अंश करके बदलते जाते है।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)