नया नियम · 2 कुरिन्थियों · अध्याय 4 / 13
2 कुरिन्थियों 4
1इसलिए जब हम पर ऐसी दया हुई कि हमें यह सेवा मिली, तो हम साहस नहीं खोते।
2परन्तु हमने लज्जा के गुप्त कार्यों को त्याग दिया है और धूर्तता से नहीं चलते, न परमेश्वर के वचन में मिलावट करते है। परन्तु सत्य को प्रकट करने के द्वारा हम, परमेश्वर के सम्मुख प्रत्येक मनुष्य के विवेक में अपने आप को भला ठहराते है।
3यदि हमारे सुसमाचार पर परदा पड़ा है तो यह परदा उनके लिए पड़ा है जो विनाश के गर्त में जा रहे हैं।
4उन अविश्वासियों की बुद्धि को इस संसार के ईशवर ने अन्धा कर दिया है कि वे परमेश्वर के प्रतिरूप, अर्थात् मसीह के तेजस्वी सुसमाचार की ज्योति को न देख सके।
5हम तो अपना नहीं परन्तु मसीह यीशु का प्रचार करते हैं कि वह प्रभु है, और अपने विजय में यह कहते हैं कि हम यीशु के कारण तुम्हारे दास हैं,
6क्योंकि परमेश्वर जिसने कहा, ‘‘अन्धकार में से ज्योति चमके,” वही है जो हमारे हृदय में चमका है कि हमें मसीह के चेहरे में परमेश्वर की महिमा के ज्ञान की ज्योति प्रदान करे।
7परन्तु हम मिट्टी के पात्रों में, यह धन इसलिए रखा हुआ है कि सामर्थ्य की असीम महानता हमारी ओर से नहीं वरन् परमेश्वर की ओर से ठहरे।
8हम चारों ओर से क्लेश सहते हैं, परन्तु मिटाए नहीं जाते; निरुपाय तो हैं, परन्तु निराश नहीं होते;
9सताए तो जाते हैं, परन्तु त्यागे नहीं जाते; गिराए तो जाते हैं, परन्तु नष्ट नहीं होते।
10हम यीशु की मृत्यु को सदा अपनी देह में लिए फिरते हैं कि यीशु का जीवन हमारी देह में प्रकट हो।
11हम जो जी रहे हैं, सर्वदा यीशु के कारण मृत्यु के हाथों सौंपे जाते हैं कि यीशु का जीवन भी हमारे मरणशील शरीर में प्रकट हो।
12इस प्रकार मृत्यु तो हम में, पर जीवन तुम में कार्य करता है।
13लिखा हैः “मैंने विश्वास किया, इसलिए मैं बोला।” इसलिए कि विश्वास की वही आत्मा हम में है, हम भी विश्वास करते हैं और इसलिए बोलते हैं,
14तथा यह जानते हैं कि जिसने प्रभु यीशु को जिलाया, वही हमें भी यीशु के साथ जिलाएगा, और हमें भी तुम्हारे साथ अपने सम्मुख उपस्थित करेगा।
15क्योंकि सब वस्तुएं तुम्हारे लिए हैं कि अनुग्रह जो अधिक से अधिक लोगों में फैलता जा रहा है, परमेश्वर की महिमा के लिए धन्यवाद की वृद्धि का कारण बन सके।
16इसलिए हम साहस नहीं खोते, यघपि हमारे बाहरी मनुष्यत्व का क्षय होता जा रहा है, तथापि हमारे आन्तरिक मनुष्यत्व का दिन-प्रतिदिन नवीनीकरण होता जा रहा है।
17क्योंकि हमारा पल भर का यह हल्का-सा क्लेश एक ऐसी चिरस्थायी महिमा उत्पन्न कर रहा है जो अतुल्य है।
18हमारी दृष्टि उन वस्तुओं पर नहीं जो दिखाई देती हैं, पर उन वस्तुओं पर है जो अदृशय हैं, क्योंकि दिखाई देने वाली वस्तुएं तो अल्पकालिक हैं, परन्तु अदृशय वस्तुएं चिरस्थायी है।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)