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नया नियम · 2 कुरिन्थियों · अध्याय 8 / 13

2 कुरिन्थियों 8

1हे भाइयो, अब हम तुम्हें परमेश्वर के उस अनुग्रह के विजय में बताना चाहते हैं जो मैसीडोनिया की कलीसियाओं पर हुआ।

2संकटों की कठिन परीक्षा में उनके अपार आनन्द और घोर दरिद्रता के फलस्वरूप उनकी उदारता उमड़ पड़ी।

3मैं साक्षी देता हूं कि उन्होंने अपनी शक्ति के अनुसार, वरन् क्षमता से भी अधिक, अपनी इच्छा से दिया।

4और सन्तों की सहायता करने में सहयोग देने के लिए हमसे बार-बार अनुनय- विनय की,

5और उन्होंने हमारी आशा से परे परमेश्वर की इच्छा के अनुसार अपने आपको पहले प्रभु को, फिर हमें भी दे दिया।

6अतः हमने तीतुस से आग्रह किया कि जैसे उसने पहले आरम्भ किया, वैसे तुम में भी इस अनुग्रह के कार्य को पूर्ण करे।

7परन्तु जैसे तुम सब बातों में, अर्थात् विश्वास, वचन, ज्ञान और हर प्रकार के उत्साह और प्रेम में जिसकी प्रेरणा हमने तुम्हें दी, भरपूर हो, वैसे ही अनुग्रह के इस कार्य में भी भरपूर होते जाओ।

8मैं यह आज्ञा-स्वरूप ही नहीं कह रहा हूं वरन् औरों के उत्साह के द्वारा तुम्हारे प्रेम की सच्चाई को प्रमाणित करने के लिए भी कह रहा हू।

9क्योंकि तुम हमारे प्रभु यीशु मसीह के अनुग्रह को जानते हो, कि धनी होते हुए भी, वह तुम्हारे लिए निर्धन बन गया कि तुम उसकी निर्धनता के द्वारा धनी बन जाओ।

10मैं इस बात में अपनी सलाह देता हूं, तुम पिछले वर्ष न केवल इसे करने में वरन् इसे करने की इच्छा में भी प्रथम थे।

11तुम्हारे लिए अच्छा तो यह है कि अब इसे पूरा भी करो कि जैसे इच्छा करने में तत्पर थे, वैसे ही अपने सामर्थ्य के अनुसार देकर अब इसे पूरा भी करो।

12क्योंकि यदि मन की तैयारी हो तो मनुष्य के पास जो कुछ है उसके अनुसार दान ग्रहणयोग्य होता है, न कि उसके अनुसार जो उसके पास नहीं है।

13क्योंकि यह दूसरों के सुख और तुम्हारे कष्ट के लिए नहीं, परन्तु समानता के विचार से है-

14तुम्हारी बहुतायत इस समय उनके अभाव की पूर्ति करे कि उनकी बहुतायत भी तुम्हारे अभाव के समय पूर्ति बन जाए जिससे कि समानता उत्पन्न हो।

15जैसा लिखा है, ‘‘जिसने अधिक बटोरा उसका बहुत अधिक न हुआ, और जिसने कम बटोरा उसे कुछ घटी न हुई।”

16परन्तु परमेश्वर का धन्यवाद हो जो ऐसा ही उत्साह तुम्हारे लिए तीतुस के मन में भरता है।

17क्योंकि उसने न केवल हमारा अनुरोध स्वीकार किया, वरन् वह स्वेच्छा से और उत्साहपूर्वक तुम्हारे पास आ रहा है।

18हम उसके साथ उस भाई को भी भेज रहे हैं जिसकी प्रशंसा, सुसमाचार के सम्बन्ध में सब कलीसियाओं में फैल गई है।

19इतना ही नहीं, वरन् कलीसियाओं ने उसे नियुक्त भी किया कि इस दान के कार्य के लिए हमारे साथ यात्रा करे। यह सेवा-कार्य हमारे द्वारा स्वयं प्रभु की महिमा के लिए और हमारी तत्परता प्रकट करने के लिए किया जा रहा है।

20हम सावधानी रखते हैं कि इस उदारतापूर्ण दान के प्रबन्ध में कोई हम पर दोष न लगाने पाए।

21हम उन बातों पर ध्यान देते हैं जो न केवल प्रभु की दृष्टि में परन्तु मनुष्यों की दृष्टि में भी आदर के योग्य है।

22हम उनके साथ अपने भाई को भी भेज रहे हैं, जिसे हमने प्रायः परखा और बहुत-सी बातों में उत्साही पाया है, परन्तु उस बड़े भरोसे के कारण जो तुम पर है वह अब और भी अधिक उत्साही है।

23और तीतुस के सम्बन्ध में यह कि वह तुम्हारे मध्य मेरा साथी और सहकर्मी है। हमारे भाइयों के विजय में यह कि वे कलीसियाओं के भेजे हुए प्रतिनिधि और मसीह की महिमा है।

24इसलिए कलीसियाओं के सामने निःसंकोच उन्हें अपने प्रेम का प्रमाण दो और इसका भी, कि हम क्यों तुम पर गर्व करते है।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)