नया नियम · 2 कुरिन्थियों · अध्याय 9 / 13
2 कुरिन्थियों 9
1यह आवश्यक नहीं कि पवित्र लोगों के लिए की जाने वाली दान की सेवा के विजय में मैं तुम्हें लिखूं;
2क्योंकि मैं तुम्हारी तत्परता को जानता हूं, और उसके विजय में मैसीडोनिया के लोगों के सम्मुख तुम पर गर्व करता हूं, अर्थात् यह कि अखाया के लोग पिछले वर्ष से तैयार किए गए हैं, और तुम्हारे उत्साह ने उनमें से बहुतों को उभारा है।
3परन्तु मैं भाइयों को इसलिए भेज रहा हूं कि तुम्हारे प्रति इस विजय में हमारा गर्व व्यर्थ न ठहरे और जैसा मैं कहता आया हूं, तुम तैयार पाए जाओ;
4ऐसा न हो कि जब कोई मैसीडोनियावासी मेरे साथ आए और तुम्हें तैयार न पाए तो हमको-तुम्हारे विजय में नहीं कहता-इस आत्मविश्वास के कारण लज्जित होना पड़े।
5इसलिए मैंने भाइयों से आग्रह करना आवश्यक समझा कि पहले से तुम्हारे पास आकर उस उदारतापूर्ण दान का प्रबन्ध करें जिसकी तुमने पहले से प्रतिज्ञा की थी, कि यह दान उदारता से दिया जाए, न कि दबाव से।
6अब मैं यह कहता हूं कि जो थोड़ा बोएगा वह थोड़ा ही काटेगा, और जो अधिक बोएगा वह अधिक काटेगा।
7प्रत्येक जन जैसा उसने अपने मन में निशिचत किया है वैसा ही करे, न कुढ़-कुढ़ कर और न दबाव से, क्योंकि परमेश्वर हर्ष से देने वाले से प्रेम करता है।
8और परमेश्वर सब प्रकार का अनुग्रह तुम्हें बहुतायत से दे सकता है, जिससे कि तुम सदैव, सब बातों में परिपूर्ण रहो, और हर भले कार्य के लिए तुम्हारे पास भरपूरी से हो।
9जैसा लिखा है, ‘‘उसने चारों और विखेरा, उसने दरिद्रों को दिया, उसकी धार्मिकता सदा बनी रहती है।”
10अब वह जो बोने वाले को बीज और भोजन के लिए रोटी देता है, बोने के लिए तुम्हें बीज देगा और तुम्हारे बीज को बढ़ाएगा और तुम्हारी धार्मिकता की फसल की वृद्धि करेगा।
11तुम सब प्रत्येक बात में धनी किए जाओेगे कि उदार बनो जिस से हमारे द्वारा परमेश्वर का धन्यवाद हो।
12क्योंकि इस सेवा-कार्य के द्वारा न केवल पवित्र लोगों की घटियां पूरी होती हैं, वरन् परमेश्वर को बहुत धन्यवाद देने की भावना उमण्डती रहती है।
13इस सेवा को प्रमाण मानकर वे परमेश्वर की महिमा करेेंगे, क्योंकि तुम मसीह के सुसमाचार को आज्ञाकारिता से अंगीकार करते और उनके तथा सब के लिए उदारतापूर्वक दान देते हो।
14और वे भी उस अपार अनुग्रह के कारण जो तुम में हुआ है प्रार्थना के द्वारा तुम्हारी बड़ी लालसा करेंगे।
15परमेश्वर को, उसके उस दान के लिए जो वर्णन से बाहर है, धन्यवाद!
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)