नया नियम · 2 कुरिन्थियों · अध्याय 10 / 13
2 कुरिन्थियों 10
1अब मैं, पौलुस, स्वयं तुमसे मसीह की नम्रता और कोमलता के द्वारा आग्रह करता हूं-मैं जो तुम्हारी उपस्थिति में दीन हूं, किन्तु अनुपस्थिति में तुम्हारे प्रति साहसी हूं-
2मैं तुमसे निवेदन करता हूं कि जब मैं आऊं तो मुझे कुछ लोगों के प्रति जो ऐसा सोचते हैं कि हम शरीर के अनुसार चलते हैं ऐसा साहस न दिखाना पड़े जैसा मैं दिखाने का विचार करता हू।
3क्योंकि यघपि हम शरीर में चलते हैं, तथापि हम शरीर के अनुसार युद्ध नहीं करते।
4क्योंकि हमारे युद्ध के हथियार शारीरिक नहीं परन्तु गढ़ों को धवस्त करने के लिए ईशवरीय सामर्थ्य से परिपूर्ण है।
5हम परमेश्वर के ज्ञान के विरुद्ध उठने वाली कल्पनाओं और प्रत्येक अवरोध का खण्डन करते हैं, और प्रत्येक विचार को बन्दी बना कर मसीह का आज्ञाकारी बना देते है।
6जब भी तुम्हारी आज्ञाकारिता पूरी हो जाए तो सब प्रकार की अवज्ञा को दण्डित करने के लिए हम तैयार है।
7तुम तो उन्हीं बातों को देखते हो जो आंखों के सामने है। यदि किसी को अपने आप में भरोसा हो कि वह मसीह का है तो वह फिर से अपने आप में इस पर विचार करे कि जैसा वह मसीह का है, वैसे ही हम भी है।
8क्योंकि यदि मैं उस अधिकार के विजय में कुछ और भी घमण्ड करूं जिसे प्रभु ने तुम्हारे बिगाड़ने के लिए नहीं, परन्तु बनाने के लिए हमें दिया, तो मैं लज्जित न होऊंगा।
9मैं नहीं चाहता कि अपने पत्रें के द्वारा तुम्हें डराने वाला ठहरू।
10क्योंकि उनका कहना है, ‘‘उसके पत्र तो गम्भीर और प्रभावशाली होते हैं, परन्तु उसकी व्यक्तिगत उपस्थिति प्रभावहीन और उसका प्रवचन व्यर्थ है।”
11ऐसा व्यक्ति यह समझ ले कि अनुपस्थिति के समय हम पत्रें में जो लिखते हैं, वैसे ही उपस्थिति के समय अपने कामों में भी है।
12क्योंकि हमें साहस नहीं कि हम अपनी गणना या तुलना उनके साथ करें जो अपनी प्रशंसा स्वयं करते हैं, पर जब वे अपने को अपने आप ही से नापते हैं, और अपनी तुलना अपने आप ही से करते हैं तो वे नासमझ है।
13परन्तु हम अपनी मर्यादा से बाहर घमण्ड नहीं करेंगे, वरन् उसी सीमा तक घमण्ड करेंगे जिसे परमेश्वर ने हमारे लिए निर्धारित किया है, जिस से तुम तक पहुंच सके।
14हम सीमा से बाहर घमण्ड नहीं कर रहे हैं, जैसे कि तुम तक न पहुंचने की दशा में होता, परन्तु हम तो मसीह का सुसमाचार सुनाते हुए तुम तक पहुंच चुके है।
15हम अपनी सीमा से बाहर अर्थात् दूसरे मनुष्यों के परिश्रम पर घमण्ड नहीं करते, परन्तु हमारी आशा है कि जैसे-जैसे तुम्हारा विश्वास बढ़ता जाएगा, वैसे-वैसे हमारा कार्यक्षेत्र भी तुम्हारे द्वारा और भी विस्तृत होता जाएगा,
16जिससे कि तुम्हारे क्षेत्रों से बाहर भी प्रचार करें और दूसरों की सीमा के भीतर पूर्ण किए गए कार्य पर घमण्ड न करे।
17परन्तु जो गर्व करे, वह प्रभु में गर्व करे।
18क्योंकि जो अपनी बड़ाई स्वयं करता है उसकी नहीं, परन्तु जिसकी बड़ाई प्रभु करता है उसी की प्रशंसा होती है।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)