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पुराना नियम · 2 राजा · अध्याय 12 / 25

2 राजा 12

1येहू के सातवें वर्ष में योआश राजा हुआ और यरूशलेम में चालीस वर्ष तक राज्य करता रहा। उसकी माता का नाम सिब्या था जो बेर्शेबा की थी।

2जब तक यहोयादा याजक योआश को शिक्षा देता रहा, उसने वही किया जो यहोवा की दृष्टि में ठीक था।

3फिर भी ऊंचे स्थान ढाए नहीं गए। प्रजा के लोग ऊंचे स्थानों में बलिदान चढ़ाते और धूप जलाते रहे।

4तब योआश ने याजकों से कहा, “यहोवा के भवन में अर्पित की हुई भेंटों के रूप में प्राप्त धन, जनगणना के अनुसार लगाया गया कर, व्यक्ति पीछे मूल्यांकित धन, और जितना धन कोई व्यक्ति स्वेच्छा से यहोवा के भवन में लाता है,

5वह सब धन याजक अपने-अपने लोगों से लें; और जहां कहीं भवन टूटा-फूटा हो, आवश्यकता के अनुसार मरम्मत करे।”

6फिर भी ऐसा हुआ कि राजा योआश के तेईसवें वर्ष तक याजकों ने भवन की मरम्मत नहीं करवाई थी।

7इसलिए राजा योआश ने यहोयादा याजक तथा अन्य याजकों को बुलवाकर उनसे कहा, “भवन की मरम्मत क्यों नहीं करवाते हो? इसलिए अब अपने-अपने लोगों से और धन न लेना, परन्तु जो है उसे भवन-सुधार में लगा लो।”

8अतः याजकगण सहमत हो गए कि हम भविष्य में न तो प्रजा से धन एकत्र करेंगे और न भवन की मरम्मत करवाएंगे।

9तब यहोयादा याजक ने एक सन्दूक लेकर उसके ढक्कन में एक छेद बनाया और उसे यहोवा के भवन के प्रवेशद्वार के दाहिनी ओर वेदी के समीप रख दिया। और भवन की देहली की रक्षा करने वाले याजक उसमें सब धन जो यहोवा के भवन में लाया जाता था डालने लगे।

10जब-जब वे देखते कि सन्दूक में बहुत धन है तब-तब राजा के लेखापाल और महायाजक आकर थैलों में भर देते और यहोवा के भवन में प्राप्त धन को गिन लेते थे।

11फिर वे उस तोले हुए धन को उन काम करने वालों को सौंप दिया करते थे जो यहोवा के भवन के निरीक्षण अधिकारी थे; और ये यहोवा के भवन में काम करने वाले बढ़इयों, कारीगरों को दे दिया करते थे,

12और वे राजमिस्त्रियों तथा पत्थर तराशने वालों को तथा, यहोवा के भवन की मरम्मत के लिए इमारती लकड़ी तथा तराशे हुए पत्थर तथा भवन की मरम्मत के लिए आवश्यक अन्य सब वस्तुएं खरीदने को दे दिया करते थे।

13परन्तु जो धन यहोवा के भवन में आता था उसे चांदी के तसले, चिमटे, कटोरे, तुरही और सोने-चांदी के पात्र बनाने के काम में नहीं लाया जाता था।

14क्योंकि यह धन कारीगरों को दिया जाता था जिससे वे यहोवा के भवन की मरम्मत करते थे।

15इसके अतिरिक्त जिनके हाथ में काम करने वालों को देने के लिए यह धन दिया जाता था उनसे हिसाब लेने की आवश्यकता नहीं पड़ती थी। क्योंकि वे विश्वसनीयता से कार्य करते थे।

16दोष-बलि और पाप-बलि के द्वारा प्राप्त धन यहोवा के भवन में नहीं लाया जाता था। वह याजकों के लिए होता था।

17तब सीरिया के राजा हजाएल ने गत के विरुद्ध युद्ध किया और उस पर अधिकार कर लिया। फिर हजाएल यरूशलेम पर चढ़ाई करने को उन्मुख हुआ।

18और यहूदा के राजा योआश ने सब पवित्र वस्तुएं जो यहूदा के राजाओं यहोशापात, यहोराम और अहज्याह नामक उसके पूर्वजों द्वारा भेंट की गई थीं और स्वयं अपनी अर्पित वस्तुएं, और यहोवा के भवन के कोषागार में और राजभवन में पाया गया सारा सोना, सब लेकर सीरिया के राजा हजाएल को भेज दिया। तब वह यरूशलेम से चला गया।

19योआश के शेष कार्य अर्थात् सब कुछ जो उसने किया क्या वह यहूदा के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में नहीं लिखा है?

20उसके कर्मचारियों ने राजद्रोह का षड्यंत्र रचकर और मिल्लो के भवन में जो सिल्ला की ढलान पर है, योआश की हत्या कर दी।

21उसके कर्मचारी शिमात के पुत्र योजाकार और शोमेर के पुत्र यहोजाबाद ने उसे ऐसा मारा कि वह मर गया, और उन्होंने उसे पूर्वजों के साथ दाऊद नगर में मिट्टी दी, और उसका पुत्र अमस्याह उसके स्थान में राजा हुआ।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)