पुराना नियम · 2 राजा · अध्याय 11 / 25
2 राजा 11
1जब अहज्याह की माता अतल्याह ने देखा कि मेरा पुत्र मर गया है, उसने उठकर सम्पूर्ण राजवंश का विनाश कर डाला।
2परन्तु अहज्याह की बहन अर्थात् राजा योराम की पुत्री यहोशेबा ने घात किए जाने वाले राजपुत्रों में से, अहज्याह के पुत्र योआश को अलग करके उसकी धाय सहित शयन-कक्ष में छिपा दिया।
3और वह उसके साथ यहोवा के भवन में छः वर्ष तक छिपाए रखा गया, और अतल्याह देश पर राज्य करती रही।
4सातवें वर्ष में यहोयादा याजक ने संदेश भेजकर कारी जाति के लोगों और पहरेदारों के शतपतियों को बुलवाया और वह उन्हें यहोवा के भवन में ले आया। तब उसने उनसे वाचा बांधी और यहोवा के भवन में उन्हें शपथ खिलाकर राजपुत्र दिखलाया;
5और उन्हें यह आदेश दिया, “तुम्हें यह करना हैः तुममें से एक तिहाई, जो सब्त के दिन आते हैं-वे राजभवन का पहरा दें,
6एक तिहाई सूर नामक फाटक पर भी रहें, तथा एक तिहाई फाटक पर पहरेदारों के पीछे रहें जहां वे सुरक्षा के लिए भवन का पहरा दें-
7और तुम्हारे दो भाग जो सब्त को बाहर जाते हैं वे सब राजा के लिए यहोवा के भवन का पहरा दे।
8तब तुम अपने-अपने हाथ में हथियार लिए हुए राजा के चारों ओर रहना; और जो कोई पंक्तियों के भीतर घुसे वह मार डाला जाए। राजा जब भी बाहर जाए और भीतर आए; तुम उसके साथ रहना।”
9यहोयादा याजक ने जैसा आदेश दिया, शतपतियों ने वैसा ही किया। वे सब्त के दिन को आने वाले और जाने वाले दोनों दलों के अपने-अपने जनों को साथ लेकर यहोयादा याजक के पास आए।
10तब याजक ने शतपतियों को दाऊद राजा की ढालें और भाले दिए जो यहोवा के भवन में थे।
11और पहरेदार हाथों में हथियार लिए हुए भवन की दाहिनी छोर से बाईं छोर तक तथा वेदी के पास, भवन के पास तथा राजा के चारों और खड़े हो गए।
12तब उसने राजपुत्र को बाहर लाकर उसके सिर पर मुकुट रखा तथा उसके हाथों में साक्षी-पत्र दिया; और लोगों ने उसे राजा बनाया; और उसका अभिषेक किया और तालियां बजाकर कहा, “राजा दीर्घायु हो!”
13अतल्याह पहरेदारों और लोगों का कोलाहल सुनकर यहोवा के भवन में लोगों के पास आई।
14उसने देखा कि राजा, प्रथा के अनुसार स्तम्भ के समीप खड़ा है, तथा शतपति एवं तुरही-वादक भी समीप खड़े हैं और सब लोग आनन्द मना रहे तथा तुरही बजा रहे है। तब अतल्याह अपने वस्त्र फाड़कर चिल्ला उठी, “राजद्रोह! राजद्रोह!”
15तब यहोयादा याजक ने सेना के शतपतियों को आदेश देकर कहा, “उसे पंक्तियों के बीच घेर कर बाहर ले चलो और जो कोई उसके पीछे चले उसे तलवार के घाट उतार दो।” क्योंकि याजक ने कहा था, “उसे यहोवा के भवन में घात न किया जाए।”
16अतः उन्होंने उसे पकड़ लिया, और जब वह उस द्वार पर लाई गई जिससे घोड़े राजभवन में प्रवेश करते थे, वहां उसका वध किया गया।
17तब यहोयादा ने यहोवा और राजा तथा प्रजा के मध्य यहोवा की प्रजा होने की वाचा बंधाई, और उसी प्रकार राजा तथा प्रजा के मध्य भी।
18तब सब लोगों ने जाकर बाल के भवन को ढा दिया। उसकी वेदियों और मूर्तियों को पूरी तरह नष्ट कर दिया; तथा बाल के मत्तान नामक पुरोहित को वेदियों के सामने वध कर दिया। तब याजक ने यहोवा के भवन के लिए अधिकारी नियुक्त कर दिए।
19फिर वह शतपतियों, कारी जाति के लोगों, पहरेदारों और प्रजा के साथ राजा को यहोवा के भवन से पहरेदारों के फाटक से होकर राज-भवन में लाया। वहां राजा राज-सिंहासन पर विराजमान हुआ।
20तब देश के सब लोगों ने आनन्द मनाया और नगर में शान्ति हुई क्योंकि उन्होंने राजभवन में तलवार से अतल्याह का वध कर दिया था।
21योआश सात वर्ष का था जब वह राजा हुआ।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)