पुराना नियम · 2 राजा · अध्याय 10 / 25
2 राजा 10
1सामरिया में अहाब के सत्तर पुत्र-पौत्र थे। येहू ने सामरिया में यिज्रेल के शासकों, प्राचीनों और अहाब की सन्तानों के अभिभावकों को इस आशय के पत्र लिख कर भेजेः
2“जब यह पत्र तुम्हें मिले, इसलिए कि तुम्हारे स्वामी के पुत्र तुम्हारे साथ हैं, साथ ही रथ और घोड़े तथा एक दृढ़ गढ़वाला नगर और अस्त्र-शस्त्र भी हैं तो इस पत्र के मिलते ही
3अपने स्वामी के सब पुत्रों में सबसे श्रेष्ठ और सबसे योग्य को चुनकर उसके पिता के सिंहासन पर बिठा दो तथा अपने स्वामी के घराने के लिए लड़ो।”
4परन्तु वे अत्यन्त भयभीत हो गए और कहने लगे, “देखो, दो राजा भी उसके सामने टिक न सके; तो हम कैसे टिक सकेंगे?”
5तब जो राजघराने पर अधिकारी था, और जो नगर पर अधिकारी था उन्होेंने और प्राचीनों तथा बालकों के अभिभावकों ने येहू को संदेश भेजा, “हम तेरे सेवक है। जो कुछ तू हमसे कहे, हम वही करेंगे। हम किसी को राजा न बनाएंगे; जो कुछ तुझे भाए वही कर।”
6तब उसने दूसरी बार उन्हें पत्र लिखा, “यदि तुम मेरी ओर हो और मेरी बात मानोगे तो उन पुरुषों अर्थात् अपने स्वामी के पुत्रों के सिर उतार कर कल इसी समय तक यिज्रेल में मेरे पास पहुंचो।” राज-पुत्र, जो सत्तर थे, नगर के बड़े लोगों के साथ थे जो उनका पालन-पोषण कर रहे थे।
7जब यह पत्र उनके पास पहुंचा तो उन्होंने उन सत्तर राज-पुत्रों को पकड़कर उनका वध किया और उनके सिर टोकरों में रखकर यिज्रेल को उसके पास भेज दिए।
8जब एक संदेशवाहक ने आकर उसे बतलाया कि वे राजपुत्रों के सिर ले आए हैं तो उसने कहा, “उन्हें प्रातःकाल तक प्रवेश-द्वार के दोनों ओर दो ढेरों में रख दो।”
9प्रातःकाल वह बाहर जाकर खड़ा हुआ और उसने सब लोगों से कहा, “तुम लोग निर्दोष हो, देखो, मैंने तो अपने स्वामी से षड्यंत्र करके उसे मार डाला, पर इन सब की हत्या किसने की?
10इसलिए अब यह जान लो कि यहोवा का वचन जो उसने अहाब के घराने के विषय में कहा था, उसमें से कोई भी बात व्यर्थ नहीं जाएगी क्योंकि यहोवा ने जो कुछ अपने दास एलिय्याह के द्वारा कहा था उसे पूरा किया है।”
11फिर अहाब के घराने के जितने लोग यिज्रेल में बच गए थे और जितने अन्य प्रधान पुरुष और सम्बन्धी तथा उसके याजक थे, सबको येहू ने मार डाला, यहां तक कि उसके किसी भी वंशज को जीवित न छोड़ा।
12तब वह वहां से प्रस्थान करके सामरिया नगर में गया। मार्ग में वह चरवाहों के बेत-एकेद तक पहुंचा ही था कि
13येहू को यहूदा के राजा अहज्याह के भाई मिले, उसने कहा, “तुम कौन हो?” उन्होंने उत्तर दिया, “हम अहज्याह के भाई हैं; हम राजपुत्रों और राजमाता के पुत्रों का कुशलक्षेम पूछने आए है।”
14उसने कहा, “उन्हें जीवित पकड़ लो।” अतः उन्होंने उनको, जो बयालीस व्यक्ति थे, जीवित पकड़ लिया और उन्हें बेत-एकेद की बावली पर मार डाला, और उसने उनमें से किसी को न छोड़ा।
15जब उसने वहां से प्रस्थान किया तो उसे रेकाब का पुत्र यहोनादाब मिला जो उससे भेंट करने आ रहा था, और उसने उसका अभिवादन करके कहा, “क्या तेरा मन ठीक है, जैसा मेरा हृदय तेरे प्रति ठीक है?” यहोनादाब ने कहा, “ठीक है।” येहू ने कहा, “यदि ठीक है तो अपना हाथ मुझे दे। उसने अपना हाथ बढ़ाया और येहू ने उसे रथ पर चढ़ा लिया
16और कहा, “मेरे साथ आ, और देख कि यहोवा के प्रति मेरी कैसी धुन है।” तब वह उसे अपने साथ रथ में ले चला।
17जब वह सामरिया पहुंचा तो यहोवा के उस वचन के अनुसार जो उसने एलिय्याह से कहा था, येहू सामरिया में अहाब के शेष सभी लोगों को तब तक मारता गया जब तक कि उनका नामो-निशान मिटा न डाला।
18तब येहू ने सब लोगों को एकत्र किया और उनसे कहा, “अहाब ने बाल की थोड़ी सी उपासना की, येहू तो उसकी बहुत अधिक करेगा।
19इसलिए बाल के सब नबियों, सब उपासकों और सब याजकों को बुलाओ। कोई भी छूटने न पाए, क्योंकि बाल के लिए मैं एक महा-बलिदान करने वाला हू। जो कोई न आए वह जीवित न बचेगा।” येहू ने बाल के उपासकों को नष्ट करने के लिए छल से ऐसा किया।
20और येहू ने कहा, “बाल के लिए एक विशेष सभा का आयोजन करो।” अतः उन्होंने घोषणा की।
21तब येहू ने इस्राएल भर में संदेशवाहक भेजे और बाल के सब उपासक आए, यहां तक कि कोई न बचा जो न आया हो। जब वे बाल के भवन में गए तब वह एक सिरे से दूसरे तक पूरा भर गया।
22तब उसने वस्त्रगार के प्रभारी से कहा, “बाल के सब उपासकों के लिए वस्त्र ले आ।” अतः वह उनके लिए वस्त्र ले आया।
23तब येहू रेकाब के पुत्र यहोनादाब को अपने साथ लेकर बाल के भवन में गया और उसने बाल के उपासकों से कहा, “ढूँढ़कर देखो कि यहां तुम्हारे मध्य केवल बाल के उपासक हों यहोवा का कोई सेवक न हो।”
24तब वे बलिदान और होमबलि चढ़ाने के लिए भीतर गए। येहू ने अस्सी पुरुष बाहर ठहरा कर उनसे कहा था, “यदि तुममें से काई उन लोगों में से जिन्हें मैं तुम्हारे हाथों में कर दूंगा, किसी को भागने दे तो वह उसके प्राण के बदले अपना प्राण देगा।”
25और जैसे ही वह होमबलि चढ़ा चुका, येहू ने पहरेदारों और अधिकारियों से कहा, “भीतर जाकर उन्हें मार डालो; किसी को बाहर न निकलने दो।” तब उन्होंने तलवार से उनका वध किया। पहरेदारों और अधिकारियों ने उन्हें बाहर फेंक दिया और बाल के भीतरी कक्ष में प्रवेश किया।
26फिर उन्होंने बाल के भवन के पूज्य स्तम्भ बाहर निकाल कर फूंक दिए।
27और उन्होंने बाल के स्तम्भ को भी नष्ट कर डाला और बाल के भवन को ढा कर शौचालय बना दिया जो आज तक वैसा ही है।
28इस प्रकार येहू ने इस्राएल में से बाल की पूजा मिटा दी।
29परन्तु उन पापों से जो नबात के पुत्र यारोबाम ने इस्राएल से करवाए थे अर्थात् सोने के उन बछड़ों से जो बेत-एल और दान में थे, येहू अलग नहीं हुआ।
30यहोवा ने येहू से कहा, “इसलिए कि तूने जो कुछ मेरी दृष्टि में उचित है उसे करके अच्छा किया है और अहाब के घराने के साथ मेरी इच्छानुसार बर्ताव किया है, तेरे वंशज चौथी पीढ़ी तक इस्राएल के सिंहासन पर बैठेंगे।”
31परन्तु येहू ने इस्राएल के परमेश्वर यहोवा की व्यवस्था पर पूर्ण मन से चलने की चिन्ता न की। येहू उन पापों से जो यारोबाम ने इस्राएल से करवाए थे अलग नहीं हुआ।
32उन दिनों यहोवा इस्राएल की सीमा को घटाने लगा। और हजाएल ने इस्राएल की सारी सीमा में उन्हें हराया,
33अर्थात् यर्दन से लेकर पूर्व की ओर गिलाद के सारे देश तक, और गादियों, रूबेनियों और मनश्शेइयों का क्षेत्र, अर्थात् अर्नोन नदी की घाटी में स्थित अरोएर नगर से लेकर, गिलाद और बाशान तक।
34येहू के शेष कार्य तथा जो कुछ उसने किया और उसकी वीरता के कार्य क्या इस्राएल के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में नहीं लिखे हैं?
35और येहू अपने पूर्वजों के साथ सो गया और उसे सामरिया में मिट्टी दी गई, और उसका पुत्र यहोआहाज उसके स्थान पर राज्य करने लगा।
36सामरिया में इस्राएल पर येहू का शासनकाल अट्ठाइस वर्ष का था।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)