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पुराना नियम · 2 राजा · अध्याय 9 / 25

2 राजा 9

1तब एलीशा ने नबियों के चेलों में से एक को बुलाकर कहा, “अपनी कमर कस, हाथ में तेल की यह कुप्पी ले, और रामोत-गिलाद जा।

2जब तू वहां पहुंचे तो यहोशापात के पुत्र और निमशी के पौत्र येहू का पता लगाकर वहां प्रवेश करना और उसके साथियों से अलग करके उसे भीतरी कक्ष में ले जाना।

3तब कुप्पी लेकर उसके सिर पर तेल उंडेलना और कहना कि यहोवा यों कहता हैः मैंने तुझे इस्राएल का राजा नियुक्त किया है।” तब द्वार खोलकर भाग जाना, ठहरना मत।

4अतः वह जवान अर्थात् नबी का चेला, रामोत-गिलाद को गया।

5जब वह पहुंचा तो देखो, सेनापति बैठे हुए थे। उसने कहा, “हे सेनापति, मैं तेरे लिए एक संदेश लाया हू।” येहू ने पूछा, “हम में से किसके लिए?” उसने कहा, “हे सेनापति, तेरे लिए।”

6तब वह उठकर घर के भीतर गया, और उसने उसके सिर पर तेल उंडेला और कहा, “इस्राएल का परमेश्वर यहोवा यों कहता हैः मैंने यहोवा के लोगों, हां, इस्राएल पर राजा होने के लिए तेरा अभिषेक किया है।

7तू अपने स्वामी अहाब के घराने को मार डालना कि मैं अपने दास नबियों वरन् यहोवा के सब दासों के लहू का बदला लूँ जो ईजेबेल ने बहाया।

8क्योंकि अहाब का सम्पूर्ण घराना नष्ट होगा और मैं अहाब के वंश में से हर एक पुरुष को, चाहे बन्दी हो या स्वतंत्र, सबको इस्राएल में से मिटा डालूंगा।

9और मैं अहाब के घराने को नबात के पुत्र यारोबाम के घराने और अहिय्याह के पुत्र बाशा के घराने के समान कर दूँगा।

10और ईजेबेल को यिज्रेल की भूमि में कुत्ते खा जाएंगे और उसको मिट्टी देने वाला कोई न होगा।” तब वह द्वार खोल कर भाग गया।

11तब येहू अपने स्वामी के कर्मचारियों के पास बाहर आया और किसी ने उससे पूछा, “क्या सब कुशल है? वह पागल तेरे पास क्यों आया था?” उसने उनसे कहा, “तुम तो उस व्यक्ति और उसकी बातों को भलीभाँति जानते हो।”

12उन्होंने कहा, “झूठ! अब हमें बतला दे।” उसने कहा, “उसने मुझसे ऐसा कहाः यहोवा यों कहता हैः मैंने तुझे इस्राएल पर राजा अभिषिक्त किया है।”

13तब उन्होंने शीघ्रता से अपने-अपने वस्त्र उतारे और उसके नीचे सीढ़ी पर ही बिछाए और तुरही फूंक कर कहा, “येहू राजा है!”

14इस प्रकार निमशी के पौत्र और यहोशापात के पुत्र येहू ने योराम के विरुद्ध षड्यंत्र किया। योराम तो सारे इस्राएल समेत सीरिया के राजा हजाएल से रामोत-गिलाद की रक्षा कर रहा था।

15परन्तु योराम राजा तो यिज्रेल लौट गया था कि उन घावों का उपचार कराए जो सीरिया के राजा से युद्ध करते समय सीरियाइयों के हाथ से लगे थे। अतः येहू ने कहा, “यदि तुम्हारा यही विचार है तो यिज्रेल में बतलाने के लिए किसी को भी इस नगर से बचकर निकलने या भागने न दिया जाए।”

16तब येहू रथ पर सवार होकर यिज्रेल गया, क्योंकि योराम वहां घायल पड़ा था और यहूदा का राजा अहज्याह योराम को देखने वहां आया था।

17यिज्रेल की मीनार पर पहरेदार खड़ा हुआ था। उसने येहू और उसके दल को आते हुए देखा और कहा, “मुझे एक दल दिखाई देता है।” योराम ने कहा, “एक घुड़सवार को बुलाकर उनसे मिलने को भेज कि वह पूछे, क्या सब कुशल है?”

18तब एक घुड़सवार उससे भेंट करने गया, और उसने कहा, “राजा पूछता है, क्या सब कुशल है?” येहू ने कहा, “कुशल-क्षेम से तेरा क्या काम? मेरे पीछे चल।” फिर पहरेदार ने बताया, “संदेशवाहक उनके पास पहुंच तो गया पर लौट कर नहीं आया।”

19तब उसने दूसरा घुड़सवार भेजा जिसने उनके पास जाकर कहा, “राजा पूछता है, कुशल-क्षेम तो है?” येहू ने उत्तर दिया, “कुशल-क्षेम से तेरा क्या काम? मेरे पीछे चल।”

20तब पहरेदार ने बताया, “वह भी उनके पास पहुंच तो गया पर लौट कर आया नही। रथ हाँकना तो निमशी के पौत्र येहू का सा है, क्योंकि वही उन्मत्त होकर हाँकता है।”,

21तब योराम ने कहा, “रथ जुतवाओ।” उन्होंने उसका रथ जुतवाया। और इस्राएल का राजा योराम और यहूदा का राजा अहज्याह दोनों अपने-अपने रथ में निकल पड़े। वे येहू से भेंट करने गए और उससे यिज्रेली नाबोत की भूमि में मिले।

22और ऐसा हुआ कि येहू को देख कर योराम ने पूछा, “हे येहू, कुशल-क्षेम तो है न?” उसने उत्तर दिया, “तेरी माता ईजेबेल की वेश्यावृति और जादू-टोने के कार्य जब तक इतने अधिक हैं तब तक कुशल-क्षेम कहां?”

23तब योराम रथ मोड़कर भाग चला, और उसने अहज्याह से कहा, “हे अहज्याह, विश्वासघात!”

24तब येहू ने अपने धनुष की कमान पूरी खींचकर योराम को उसकी भुजाओं के बीच में ऐसा मारा कि तीर उसके हृदय के आर-पार हो गया और वह अपने रथ में निढाल होकर गिर पड़ा।

25तब येहू ने बिदकर नामक अपने एक सेना अधिकारी से कहा, “उसे उठाकर यिज्रेली नाबोत के खेत में फेंक दे, क्योंकि मुझे स्मरण है जब मैं और तू घोड़े की सवारी करके उसके पिता अहाब के पीछे-पीछे चल रहे थे, तब यहोवा ने उसके विरुद्ध यह भारी वाणी कहलवाई थीः

26‘यहोवा कहता है, निश्चय मैंने कल नाबोत और उसके पुत्रों का लहू देखा है। यहोवा कहता है, मैं इसी भूमि पर तुझे बदला दूंगा। अब यहोवा के वचन के अनुसार इसे ले जाकर उसी भूमि में फेंक दे।”

27जब यहूदा के राजा अहज्याह ने यह देखा तो वह उघान-भवन के मार्ग से भाग निकला। और येहू ने उसका पीछा करके कहा, “उसे भी रथ में ही मार डालो।” अतः उन्होंने यिबलाम के पास गूर की चढ़ाई पर उसे मारा। परन्तु वह मगिद्दो तक भागा और वहीं मर गया।

28तब उसके कर्मचारी उसे रथ में यरूशलेम ले गए, और उन्होंने दाऊद नगर में उसके पूर्वजों के साथ उसे मिट्टी दी।

29अहज्याह तो अहाब के पुत्र योराम के ग्यारहवें वर्ष में यहूदा पर राज्य करने लगा था।

30जब येहू यिज्रेल आया तो ईजेबेल ने इसके विषय में सुनकर अपनी आंखों में सुरमा लगाया,अपने सिर को संवारा और झरोखे में से झांका

31जब येहू ने फाटक में प्रवेश किया तो उसने पूछा, “हे अपने स्वामी के हत्यारे जिम्री कुशल तो है?”

32“तब उसने झरोखे की ओर अपना मुख उठाया और कहा, “मेरी ओर कौन है? कौन?” इस पर दो-तीन खोजों ने नीचे उसकी ओर देखा।

33तब उसने कहा, फ्उसे नीचे फेंक दो। ̧ अतः उन्होंने उसे नीचे गिरा दिया। उसके लहू के कुछ छींटे दीवार पर और कुछ घोड़ों पर पड़े, और वह पैरों के नीचे कुचल दी गई।

34फिर येहू ने भीतर प्रवेश करके खाया-पीया। तब उसने कहा, “जाओ उस शापित स्त्री को मिट्टी देने का प्रबन्ध करो क्योंकि वह राजा की पुत्री है।”

35जब वे उसे मिट्टी देने गए तो उन्हें उसकी खोपड़ी, पांव और हथेलियों के अतिरिक्त कुछ न मिला।

36इसलिए उन्होंने लौटकर उसे बतलाया। तब उसने कहा, “यह तो यहोवा का वह वचन है जो उसने अपने दास तिशबी एलिय्याह से कहा थाः यिज्रेल की भूमि पर ईजेबेल का मांस कुत्ते खाएंगे,

37और ईजेबेल का शव यिज्रेल की भूमि पर खेत की खाद के समान पड़ा रहेगा जिससे कोई कह न सके कि यह ईजेबेल है।”

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)