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पुराना नियम · 2 राजा · अध्याय 8 / 25

2 राजा 8

1तब एलीशा ने जिस स्त्री के पुत्र को पुनः जीवित किया था उससे कहा, “उठ, और अपने घराने सहित जहां कहीं तू रह सके वहां जा, क्योंकि यहोवा ने अकाल पड़ने का आदेश दिया है, और वह इस देश में सात वर्ष तक बना रहेगा।

2परमेश्वर के जन के वचन के अनुसार वह स्त्री उठी और अपने परिवार सहित जाकर पलिश्तियों के देश में सात वर्ष तक रही।

3और ऐसा हुआ कि सात वर्ष बीतने पर वह पलिश्तियों के देश से लौट आई; और अपना घर और जमीन वापस मांगने राजा के पास गई।

4राजा उस समय परमेश्वर के जन के सेवक गेहजी से बातें कर रहा था और कह रहा था, “मुझसे उन सब महान् कार्यों का वर्णन कर जो एलीशा ने किए है।”

5और जब वह राजा से वर्णन कर ही रहा था कि उसने एक मृतक को कैसे पुनः जीवित किया था, तब जिस स्त्री के पुत्र को उसने जिलाया था वह स्त्री आकर राजा से अपने घर और भूमि के लिए निवेदन करने लगी। तब गेहजी ने कहा, “हे मेरे प्रभु, हे राजा, यही वह स्त्री है और यही उसका पुत्र है जिसे एलीशा ने पुनः जीवित किया था।”

6तब राजा ने स्त्री से पूछा, उसने सब वर्णन कर दिया। अतः राजा ने उसके लिए एक अधिकारी नियुक्त किया और कहा, “जो कुछ इसका था और जबसे इसने इस देश को छोड़ दिया तब से इसके खेत में जो कुछ उत्पन्न हुआ है, सब इसे लौटा दे।”

7तब एलीशा दमिश्क गया। सीरिया का राजा बेन-हदद बीमार था, उसे बताया गया कि परमेश्वर का जन यहां आया है।

8तब राजा ने हजाएल से कहा, “भेंट लेकर परमेश्वर के जन से मिलने जा और मेरी ओर से उसके द्वारा यहोवा से पूछ कि क्या मैं इस रोग से पुनः स्वस्थ हो जाऊंगा?”

9तब हजाएल भेंट के लिए दमिश्क की हर प्रकार की अच्छी वस्तुओं से चालीस ऊँट लदवाकर उससे मिलने गया, फिर वहां पहुँचकर उसके समक्ष उपस्थित हुआ और कहने लगा, “तेरे पुत्र सीरिया के राजा ने मुझे यह कहकर भेजा है, ‘क्या मैं इस रोग से पुनः स्वस्थ हो जाऊँगा’?”

10एलीशा ने उससे कहा, “जा, उससे कह, ‘तू निश्चय स्वस्थ होगा।’ परन्तु यहोवा ने मुझ पर प्रकट किया है कि वह निश्चय ही मर जाएगा।”

11और वह उसकी ओर एकटक देखता रहा, यहां तक कि वह लज्जित हो गया। तब परमेश्वर का जन रोने लगा।

12हजाएल ने कहा, “मेरा प्रभु क्यों रोता है?” उसने उत्तर दिया, “क्योंकि मुझे वे बुराइयां मालूम हैं जिन्हें तू इस्राएल की सन्तान से करेगाः उनके गढ़ोें को तू फूँक देगा, उनके जवानों को तू तलवार के घाट उतार देगा, उनके बच्चों को पटक कर टुकड़े-टुकड़े कर देगा, और उनकी गर्भवती स्त्रियों को चीर डालेगा।”

13तब हजाएल ने कहा, “तेरा यह दास, यह कुत्ता, है ही क्या कि वह ऐसा बड़ा कार्य कर सके?” एलीशा ने उत्तर दिया, “यहोवा ने मुझ पर प्रकट किया है कि तू सीरिया का राजा बन जाएगा।”

14तब वह एलीशा के यहां से प्रस्थान करके अपने स्वामी के पास लौटा जिसने उससे पूछा, “एलीशा ने तुझसे क्या कहा?” उसने उत्तर दिया, “मुझे बताया गया कि तू निश्चय स्वस्थ हो जाएगा।”

15दूसरे दिन ऐसा हुआ कि उसने एक रजाई ली और जल में डुबोकर उसको उसके मुंह पर ओढ़ा दिया जिससे वह मर गया। और हजाएल उसके स्थान पर राज्य करने लगा।

16इस्राएल के राजा अहाब के पुत्र योराम के पांचवें वर्ष में, जब यहोशापात यहूदा का राजा था, यहोशापात का पुत्र यहोराम यहूदा का राजा बन गया।

17जब वह राजा बना तब बत्तीस वर्ष का था, और उसने यरूशलेम में आठ वर्ष तक राज्य किया।

18और वह भी अहाब के घराने के समान इस्राएल के राजाओं के मार्ग पर चला, क्योंकि अहाब की पुत्री उसकी पत्नी थी। और उसने वही किया जो यहोवा की दृष्टि में बुरा है।

19फिर भी यहोवा ने अपने दास दाऊद के कारण यहूदा को नष्ट करना न चाहा, क्योंकि उसने उसके वंश के द्वारा सदैव उसके लिए दीपक जलाए रखने की प्रतिज्ञा उससे की थी।

20उसके दिनों में एदोम ने यहूदा से विद्रोह करके अपना एक राजा बना लिया।

21तब योराम अपने सब रथों सहित साईर जा पहुंचा। और ऐसा हुआ कि उसने रात में निकल कर एदोमियों पर आक्रमण किया जो उसे और रथों के प्रधानों को घेरे हुए थे, परन्तु उसके लोग अपने डेरों को भाग गए।

22अतः एदोम आज तक यहूदा से विद्रोह करके वैसा ही है। उसी समय लिब्ना ने विद्रोह किया।

23योराम के शेष कार्य और जो कुछ उसने किया क्या वह सब यहूदा के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में नहीं लिखा है?

24अतः योराम अपने पूर्वजों के संग सो गया और उसे उसके पूर्वजों के साथ दाऊद नगर में मिट्टी दी गई। उसका पुत्र अहज्याह उसके स्थान पर राज्य करने लगा।

25इस्राएल के राजा अहाब के पुत्र योराम के बारहवें वर्ष में यहूदा के राजा यहोराम का पुत्र अहज्याह राज्य करने लगा।

26जब अहज्याह राजा बना, वह बाईस वर्ष का था, और उसने यरूशलेम में एक वर्ष राज्य किया। उसकी माता का नाम अतल्याह था जो इस्राएल के राजा ओम्री की पौत्री थी।

27वह अहाब के घराने के आचरण पर चला और उसने अहाब के घराने के समान वही किया जो यहोवा की दृष्टि में पाप है, क्योंकि वह अहाब के घराने का दामाद था।

28वह अहाब के पुत्र योराम के साथ रामोत-गिलाद में सीरिया के राजा हजाएल से युद्ध करने लगा और सीरियाई लोगों ने योराम को घायल कर दिया।

29अतः योराम राजा लौट गया कि यिज्रेल में उन घावों का उपचार कराए जो उसे सीरिया के राजा हजाएल से लड़ते समय रामोत में सीरियाइयों के हाथ से लगे थे। तब यहूदा के राजा यहोराम के पुत्र अहज्याह, अहाब के पुत्र योराम को देखने यिज्रेल गया, क्योंकि योराम घायल था।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)