पुराना नियम · 2 राजा · अध्याय 19 / 25
2 राजा 19
1जब राजा हिजकिय्याह ने यह सुना, उसने अपने वस्त्र फाड़े और टाट ओढ़कर यहोवा के भवन में गया।
2तब उसने राजघराने के अधिकारी एल्याकीम, शेब्ना मंत्री, और याजकों के प्राचीनों को, जो सब टाट-ओढ़े हुए थे, आमोस के पुत्र यशायाह नबी के पास भेजा।
3उन्होंने उससे कहा, “हिजकिय्याह यह कहता हैः यह दिन विपत्ति, भर्त्सना और बहिष्कार का दिन है; बच्चों के जन्म का समय तो आ गया, परन्तु प्रसव के लिए शक्ति ही न रही।
4सम्भवतः तुम्हारा परमेश्वर यहोवा तो रबशाके की बातें सुनेगा जिसे उसके स्वामी अश्शूर के राजा ने जीवित परमेश्वर की निन्दा करने भेजा है, और तुम्हारा परमेश्वर यहोवा उन बातों को सुनकर उसे फटकारेगा। अतः जो लोग शेष हैं उनके लिए प्रार्थना कर।”
5अतः हिजकिय्याह राजा के कर्मचारी यशायाह के पास आए।
6और यशायाह ने उनसे कहा, “तुम अपने स्वामी से यह कहना, यहोवा यह कहता हैः जो बातें तूने सुनी हैं जिनके द्वारा अश्शूर के राजा के कर्मचारियों ने मेरी निन्दा की है, उनके कारण भयभीत न हो।
7देख मैं उसको प्रेरित करूंगा जिससे वह अफवाह सुनकर अपने देश को लौट जाए। मैं उसे उसी के देश में तलवार से मरवा डालूंगा।”
8तब रबशाके ने लौटकर अश्शूर के राजा को लिब्ना से युद्ध करते पाया, क्योंकि उसने सुना था कि राजा लाकीश से प्रस्थान कर चुका है।
9और जब उसने इथियोपिया के राजा तिरहाका के विषय में यह सुना, “देख, वह तुझसे युद्ध करने निकला है,” तो उसने हिजकिय्याह के पास संदेशवाहकों को यह कहकर भेजा,
10“यहूदा के राजा हिजकिय्याह से यह कहनाः तुम्हारा परमेश्वर जिस पर तुम्हारा विश्वास है तुम्हें यह कहकर धोखा देने न पाए, कि यरूशलेम अश्शूर के राजा के हाथ में नहीं किया जाएगा।
11देख, तूने तो सुना है कि अश्शूर के राजा ने सब देशों का कैसा विनाश कर दिया है। तो क्या तुम्हें छोड़ दिया जाएगा?
12जिन जातियों को मेरे पूर्वजों ने नष्ट किया अर्थात् गोजान, हारान, रेसेप और एदेन के निवासी जो तलास्सार में थे, क्या उनके देवता उन्हें बचा सके?
13हमात का राजा, अर्पाद का राजा, सपरवैम नगर का राजा तथा हेना और इव्वा के राजा कहां रहे?”
14तब हिजकिय्याह ने पत्र को संदेशवाहकों के हाथ से लेकर पढ़ा और यहोवा के भवन में जाकर उसे यहोवा के समक्ष फैला दिया।
15तब हिजकिय्याह ने यहोवा से प्रार्थना में कहा, “हे इस्राएल के परमेश्वर यहोवा, तू जो करूबों पर विराजमान है, पृथ्वी के समस्त राज्यों के ऊपर केवल तू, हां, तू ही परमेश्वर है। आकाश और पृथ्वी की सृष्टि तू ही ने की है।
16हे यहोवा, अपने कान लगा, और सुन! हे यहोवा, अपने नेत्र खोल, और देख! सन्हेरीब के वचन सुन जो उसने जीवित परमेश्वर की निन्दा करने को कहला भेजे है।
17हे यहोवा, यह सत्य है कि अश्शूर के राजा ने जातियों और उनके देशों का विध्वंस किया है,
18और उनके देवताओं को आग में झोंका है, क्योंकि वे ईश्वर थे ही नहीं, वे तो मनुष्य के हाथ की रचना, वरन् लकड़ी और पत्थर ही थे। अतः उन्होंने उनको नष्ट किया।
19और अब हे हमारे परमेश्वर यहोवा, मेरी प्रार्थना है कि तू हमें उसके हाथ से बचा, जिससे , हे यहोवा, पृथ्वी के सब राज्य जान लें कि तू ही परमेश्वर है।”
20तब आमोस के पुत्र यशायाह ने हिजकिय्याह के पास यह सन्देश भेजा, “इस्राएल का परमेश्वर यहोवा यह कहता हैः इसलिए कि तूने अश्शूर के राजा सन्हेरीब के विषय में मुझसे प्रार्थना की है, मैंने तेरी सुन ली है।
21जो वचन यहोवा ने उसके विरुद्ध कहा है, वह यह हैः तेरा तिरस्कार और उपहास किया है सिय्योन की कुंवारी पुत्री ने! तेरे पीठ पीछे तुझ पर सिर हिलाया है यरूशलेम की पुत्री ने।
22तूने किसकी बुराई और निन्दा की है? तूने किसके विरुद्ध बड़ा बोल बोला है, और अहंकार से अपनी आखें उठाई हैं? इस्राएल के पवित्र के ही विरुद्ध!
23अपने संदेशवाहकों के द्वारा तूने यहोवा की निन्दा की है, और तूने कहा है, ‘अपने बहुत-से रथों से मैं पर्वतों के शिखर पर पहुंच गया, लेबनोन के सुदूर अंचल मे। मैंने उसके ऊंचे देवदारों और सनौवरों को काट डाला और उसके सुदूर निवास, हां, सघन वन में प्रवेश किया।
24मैंने कुएं खोदे और विदेश का जल पिया, और अपने पांव के तलुए से मिस्र की सारी नदियों को सुखा दिया।”
25क्या तूने सुना नहीं? बहुत पहले मैंने यह निर्धारित किया, प्राचीनकाल से मैंने यह योजना बनाई थी, अब मैंने उसे कार्यान्वित किया है, कि तू गढ़वाले नगरों को मलबे का ढेर बना दे।
26इसलिए उनके निवासी निर्बल हो गए, वे घबरा गए और लज्जित हुए, वे मैदान की वनस्पति और हरी घास-पात के समान थे, घर की छत पर की घास के समान जो बढ़ने से पहले ही झुलस गई हो।
27पर मैं तेरे बैठने को, तेरे भीतर-बाहर आने-जाने को, और अपने विरुद्ध तेरे रोष को जानता हू।
28अपने विरुद्ध तेरे रोष के कारण, और इसलिए कि तेरा अहंकार मेरे कानों तक पहुंचा है, मैं तेरी नाक में नकेल डालूंगा, और तेरे मुंह में लगाम, और जिस मार्ग से तू आया है उसी से तुझे वापस भेज दूंगा।
29“तब तुम्हारे लिए यह चिह्न होगा कि इस वर्ष जो कुछ अपने आप उत्पन्न होगा उसे खाओगे, दूसरे वर्ष उससे जो कुछ उपजे, तथा तीसरे वर्ष बोओगे और काटोगे और दाख की बारी रोप कर उसका फल खाओगे।
30और यहूदा के घराने के बचे हुए फिर से नीचे की ओर जड़ पकड़ेंगे और ऊपर की ओर फलेंगे।
31क्योंकि यरूशलेम में से कुछ, हां, सिय्योन में से कुछ बच निकलेंगे। यहोवा अपनी जलन के कारण यह करेगा।
32इस कारण अश्शूर के राजा के विषय में यहोवा यह कहता हैः न वह इस नगर में प्रवेश करेगा, न इस पर एक भी तीर चलाएगा; न वहां ढाल लेकर सामने आ सकेगा, न शहरपनाह को लांघ सकेगा।
33जिस मार्ग से वह आया, उसी मार्ग से लौट भी जाएगा; और इस नगर में वह प्रवेश नहीं करेगा। यहोवा की यह वाणी है।
34क्योंकि मैं अपने और अपने दास दाऊद के कारण इस नगर की रक्षा करके इसे बचाऊंगा।”
35तब उस रात ऐसा हुआ कि यहोवा का दूत निकला और उसने अश्शूर की छावनी के एक लाख पचासी हज़ार सैनिकों को मार डाला; भोर को जब लोग उठे तो देखो, सब सैनिक मरे पड़े थे।
36अतः अश्शूर का राजा सन्हेरीब प्रस्थान करके लौट गया और नीनवें में रहने लगा।
37फिर ऐसा हुआ कि जब वह अपने देवता निस्रोक के मंदिर में पूजा कर रहा था, अद्रेम्मेलेक और सरेसेर ने उसे तलवार से मार डाला, और वे अरारात देश को भाग गए। तब उसका पुत्र एसर्हद्दोन उसके स्थान पर राजा हुआ।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)