पुराना नियम · 2 राजा · अध्याय 20 / 25
2 राजा 20
1उन दिनों हिजकिय्याह ऐसा रोगी हुआ कि वह मरने वाला था। तब आमोस का पुत्र यशायाह उसे देखने आया और उससे कहा, “यहोवा यह कहता है, अपने परिवार का उचित प्रबन्ध कर दे, क्योंकि तू मर जाएगा, बचेगा नही।”
2तब उसने अपना मुख दीवार की ओर फेर लिया और यहोवा से यह प्रार्थना की,
3“हे यहोवा, मैं तुझसे विनती करता हूं, स्मरण कर कि मैं तेरे सम्मुख कैसी सच्चाई और पूरे हृदय से चला हूं और मैंने वही किया है जो तेरी दृष्टि में ठीक है।” तब हिजकिय्याह फूट-फूट कर रोने लगा।
4तब ऐसा हुआ कि यशायाह राजभवन के आंगन से बाहर अभी निकला न था कि यहोवा का यह वचन उसके पास पहुंचाः
5“लौट कर मेरी प्रजा के प्रमुख हिजकिय्याह से कह, ‘तेरे पूर्वज दाऊद का परमेश्वर यह कहता हैः मैंने तेरी प्रार्थना सुनी है, मैंने तेरे आंसू देखे हैं; देख, मैं तुझे चंगा कर दूँगा। तीसरे दिन तू यहोवा के भवन में जाएगा।
6मैं तेरी आयु पन्द्रह वर्ष और बढ़ा दूंगा और मैं तुझे तथा इस नगर को अश्शूर के राजा के हाथ से बचाऊंगा, और अपने तथा अपने दास दाऊद के कारण इस नगर की रक्षा करूंगा’।”
7तब यशायाह ने कहा, “अंजीर की एक टिकिया लो।” उन्होंने उसे लेकर फोड़े पर बांधा, और वह चंगा हो गया।
8हिजकिय्याह ने तो यशायाह से कहा था, “यहोवा मुझे चंगा कर देगा और मैं तीसरे दिन यहोवा के भवन में जाऊंगा, इसका क्या चिह्न होगा?”
9यशायाह ने कहा था, “यहोवा अपने कहे हुए वचन को पूरा करेगा। इसका यहोवा की ओर से तेरे लिए यह चिह्न होगाः क्या छाया दस अंश आगे बढ़ जाए अथवा दस अंश पीछे हट जाए?”
10हिजकिय्याह ने उत्तर दिया था, “छाया का दस अंश आगे बढ़ना तो सरल है, अतएव छाया दस अंश पीछे लौट जाए।”
11तब यशायाह नबी ने यहोवा को पुकारा और आहाज की धूपघड़ी की छाया, जो दस अंश ढल चुकी थी, वह दस अंश पीछे लौट गई।
12उस समय बेबीलोन के राजा बलदान के पुत्र बरोदक-बलदान ने हिजकिय्याह को पत्र और भेंट भेजे क्योंकि उसने सुना था कि हिजकिय्याह बीमार था।
13हिजकिय्याह ने उनकी सुनी और उन्हें अपना पूरा कोषागार, चांदी, सोना, सुगन्धित द्रव्य, और बहुमूल्य तेल तथा अपना शस्त्रगार तथा जो कुछ कोषागारों में था दिखला दिया। उसके भवन तथा उसके राज्य में ऐसा कुछ न था जो हिजकिय्याह ने न दिखाया हो।
14तब यशायाह नबी ने राजा हिजकिय्याह के पास आकर उससे कहा, “इन व्यक्तियों ने क्या कहा और वे तेरे पास कहां से आए हैं?” हिजकिय्याह ने कहा, “वे दूर देश बेबीलोन से आए है।”
15उसने कहा, “उन्होंने तेरे भवन में क्या देखा?” हिजकिय्याह ने उत्तर दिया, “मेरे भवन में जो कुछ है, वह सब उन्होंने देखा है। मेरे कोषागारों में ऐसा कुछ नहीं जो मैंने उन्हें न दिखाया हो।”
16तब यशायाह ने हिजकिय्याह से कहा, “यहोवा का वचन सुन।
17‘देख, यहोवा यह कहता हैः ऐसे दिन आने वाले हैं जिनमें जो कुछ तेरे भवन में है तथा जो कुछ तेरे पूर्वजों ने आज तक भंडारों में रख छोड़ा है, वह सब बेबीलोन ले जाया जाएगा और कुछ भी न बचेगा।
18और तुझसे उत्पन्न होने वाले तेरे अनेक पुत्र भी ले जाए जाएंगे और वे बेबीलोन के राजमहल में अधिकारी होंगे’।
19तब हिजकिय्याह ने यशायाह से कहा, “यहोवा का वचन जो तूने कहा है, अच्छा है।” क्योंकि उसने सोचा, “यदि मेरे दिनों में शांति और सच्चाई बनी रहे तो क्या यह अच्छा नहीं?”
20हिजकिय्याह के शेष कार्य, उसका पराक्रम और किस प्रकार वह जलाशय और नहर बना कर नगर में जल लाया, क्या वे यहूदा के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में नही लिखे हैं?
21अतः हिजकिय्याह अपने पूर्वजों के साथ सो गया, और उसका पुत्र उसके स्थान पर राज्य करने लगा।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)