पुराना नियम · 2 राजा · अध्याय 23 / 25
2 राजा 23
1तब राजा के द्वारा यहूदा और यरूशलेम के सब प्राचीन बुलवाकर एकत्र किए गए।
2तब राजा यहोवा के भवन को गया। उसके साथ यहूदा के सब लोग, यरूशलेम के सब निवासी, याजक, नबी, और छोटे-बड़े सब लोग थे। और वाचा की जो पुस्तक यहोवा के भवन में मिली थी उसने उसकी सब बातें उन्हें पढ़कर सुनाईं।
3तब राजा ने स्तम्भ के समीप खड़े होकर यहोवा से वाचा बांधी कि मैं यहोवा के पीछे चलूंगा तथा अपने सारे मन और प्राण से उसकी आज्ञाओं, विधियों, और नियमों का पालन करूंगा, और वाचा की इस पुस्तक में लिखी बातें पूरी करूंगा। तब समस्त प्रजा ने भी इसी आशय की वाचा बांधी।
4तब राजा ने हिलकिय्याह महायाजक, सहायक याजकों और द्वारपालों को आदेश दिया कि यहोवा के भवन से उन सब पात्रों को ले आएं, जो बाल, अशेरा और आकाश के गणों के लिए बनाए गए थे। तब उसने उन्हें यरूशलेम के बाहर, किद्रोन के मैदान में फूंक दिया और राख बेत-एल को ले गया।
5और उसने उन पुजारियों को जिन्हें यहूदा के राजाओं ने यहूदा के नगरों और यरूशलेम के निकटवर्ती ऊंचे स्थानों में बाल, सूर्य, चन्द्रमा, नक्षत्रें और आकाश के गणों के लिए धूप जलाने को नियुक्त किया था, हटा दिया।
6तब उसने अशेरा को यहोवा के भवन से निकाला और यरूशलेम के बाहर किद्रोन के नाले पर लाकर वहां उसे फूंक दिया और उसे पीस कर धूल कर दिया और साधारण लोगों की कब्रों पर उसे बिखेर दिया।
7फिर उसने पुरुषगामियों के निवास भी, जो यहोवा के भवन में थे जहां स्त्रियां अशेरा के लिए पर्दे बुना करती थीं, ढा दिए।
8तब उसने यहूदा के सब नगरों से याजकों को लाकर गिबा से बेर्शेबा तक उन ऊंचे स्थानों को जहां याजकों ने धूप जलाई थी, अशुद्ध कर दिया, तथा फाटकों के ऊंचे स्थान अर्थात् जो स्थान नगराध्यक्ष यहोशू के फाटक पर थे और नगर-द्वार के बाईं ओर थे, उन्हें ढा दिया।
9फिर भी ऊंचे स्थानों के याजक यरूशलेम में यहोवा की वेदी के समीप नहीं गए, परन्तु अपने भाई-बन्धुवों के साथ अख़मीरी रोटी खाते थे।
10फिर उसने तोपेत को जो बेन-हिन्नोन की तराई में है, अशुद्ध कर दिया जिससे कोई अपने पुत्र-पुत्री को मोलेक के लिए आग में होम करके न चढ़ाए।
11और जो घोड़े यहूदा के राजाओं ने सूर्य को अर्पण करके यहोवा के भवन के प्रवेश द्वार पर नतन-मेलेक नामक अधिकारी के निवास के बाहरी कक्ष में रखे थे, उन्हें हटा दिया और सूर्य के रथों को आग में फूंक दिया।
12वे वेदियां जो छत पर आहाज के ऊपरी कक्ष में थीं जो यहूदा के राजाओं ने बनवाईं थीं तथा वे वेदियां जो मनश्शे ने यहोवा के भवन के दोनों आंगनों में बनवाईं थीं, उन्हें राजा ने ढा दिया और चूर-चूर करके उनकी धूल किद्रोन के नाले में फेंक दी।
13फिर वे ऊंचे स्थान जो यरूशलेम के सामने विनाश के पर्वत के दाहिनी ओर थे जो इस्राएल के राजा सुलैमान ने सीदोनियों की घृणित देवी अश्तोरेत, मोआबियों के घृणित देवता कमोश और अम्मोनियों के घृणित देवता मिल्कोम के लिए बनवाए थे उनको राजा ने अशुद्ध कर दिया।
14उसने पवित्र लाटों को चूर-चूर कर दिया, अशेरा को काटा डाला और उनके स्थान को मनुष्यों की हड्डियों से भर दिया।
15इसके अतिरिक्त जो वेदी और ऊंचे स्थान नबात के पुत्र यारोबाम अर्थात् जिसने इस्राएल से पाप करवाया था, बेत-एल में बनवाए थे, उस वेदी और ऊंचे स्थान को भी उसने तोड़ डाला, तब उसने पत्थरों को चूर-चूर कर दिया और अशेरा को फूंक दिया।
16फिर जब योशिय्याह ने मुड़कर पर्वत पर की कब्रों को देखा तो लोगों को भेजकर उनमें से हड्डियां निकलवाईं और उन्हें वेदी पर जलाकर यहोवा के वचन के अनुसार अशुद्ध किया, जिसे परमेश्वर के उस जन ने सुनाया था, जिसने इसकी घोषणा की थी।
17तब उसने पूछा, “यह कौन-सा स्मारक है जो मुझे दिखाई पड़ रहा है?” तब नगर-वासियों ने उसे बताया, “यह परमेश्वर के उस जन की कब्र है जो यहूदा से आया था तथा जिसने बेत-एल की वेदी के विषय में उन बातों की घोषणा की थी जो तूने पूरी की है।
18तब उसने कहा, “उसे रहने दो, उसकी हड्डियों को कोई न हटाए।” तब उन्होंने उसकी हड्डियां सामरिया के नबी की हड्डियों के साथ रहने दी।
19और योशिय्याह ने सामरिया के नगरों के ऊंचे स्थानों के भवनों को भी हटा दिया जिन्हें इस्राएल के राजाओं ने बनवाकर यहोवा का क्रोध भड़काया था। उसने उनसे भी वैसा ही किया जैसा बेत-एल में किया था।
20और ऊंचे स्थानों के सब याजकों को उसने वेदियों पर घात कराया और मनुष्यों की हड्डियां उन पर जलाईं, तब वह यरूशलेम को लौट गया।
21तब राजा ने प्रजा के समस्त लोगों को यह आज्ञा दी, “जैसा वाचा की इस पुस्तक में लिखा है, अपने परमेश्वर यहोवा के लिए फसह का पर्व मनाओ।”
22निश्चय ऐसा फसह न तो इस्राएल का न्याय करने वाले न्यायियों के दिनों में और न इस्राएल के राजाओं व यहूदा के राजाओं के दिनों में मनाया गया।
23योशिय्याह के राज्य के अठारहवें वर्ष में यह फसह यहोवा के लिए यरूशलेम में मनाया गया।
24इसके अतिरिक्त योशिय्याह ने भूत-सिद्धि करने वालों, जादू-टोना करने वालों, गृह-देवताओं, मूर्तियों और सब घिनौनी वस्तुओं को जो यहूदा देश में और यरूशलेम में दिखाई दीं हटा दिया जिससे कि उस पुस्तक में लिखी व्यवस्था की बातों को पूरा करे जो हिलकिय्याह याजक को यहोवा के भवन में मिली थी।
25उसके तुल्य न तो उसके पहले और न उसके पश्चात कोई ऐसा राजा हुआ जो अपने सम्पूर्ण हृदय, सम्पूर्ण आत्मा और सम्पूर्ण सामर्थ्य से मूसा की सारी व्यवस्था के अनुसार यहोवा की ओर फिरा हो।
26फिर भी यहोवा का भड़का हुआ कोप शान्त न हुआ, जो इस कारण से यहूदा पर भड़का था कि मनश्शे ने बड़ी उत्तेजना से उसको भड़काया था
27यहोवा ने कहा, “जैसे मैंने इस्राएल को हटा दिया वैसे ही यहूदा को भी अपनी दृष्टि से हटा दूंगा और मैं इस नगर यरूशलेम को भी जिसे मैंने चुना है, त्याग दूंगा तथा इस मन्दिर को भी जिसके विषय में मैंने कहा, ‘मेरा नाम इसमें रहेगा’।”
28योशिय्याह के शेष कार्य और सब जो उसने किया क्या वे यहूदा के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में नहीं लिखे हैं?
29उसके दिनों में मिस्र का राजा फि़रौन नको अस्सीरिया के राजा पर आक्रमण करने फ़रात नदी तक गया। तब योशिय्याह राजा उसका सामना करने गया परन्तु जब फि़रौन नको ने उसे देखा तो मगिद्दों में उसे मार डाला।
30उसके सेवक उसके शव को रथ द्वारा मगिद्दो से यरूशलेम लाए तथा उसकी निज कब्र में उसे मिट्टी दी। तब देश की प्रजा ने योशिय्याह के पुत्र यहोआहाज को लेकर उसका अभिषेक किया और उसके पिता के स्थान में उसे राजा बनाया।
31जब यहोआहाज छब्बीस वर्ष का था, तब वह राजा बना। उसने यरूशलेम में तीन महीने तक राज्य किया; उसकी माता का नाम हमूतल था जो लिब्ना के यिर्मयाह की पुत्री थी।
32जैसा उसके पूर्वजों ने किया उसने भी ठीक वैसा ही किया जो यहोवा की दृष्टि में बुरा है।
33तब फि़रौन नको ने हमात देश के रिबला नगर में उसको बन्दी बना लिया जिससे वह यरूशलेम में राज्य न करने पाए; उसने देश पर एक सौ किक्कार चांदी और एक किक्कार सोना अर्थ-दंड निर्धारित किया।
34तब फि़रौन नको ने योशिय्याह के पुत्र एल्याकीम को उसके स्थान पर राजा बनाया तथा उसका नाम बदलकर यहोयाकीम रख दिया। पर वह यहोआहाज को मिस्र ले गया, और वहीं उसकी मृत्यु हो गई।
35इसलिए यहोयाकीम ने फि़रौन को सोना और चांदी तो दिया, परन्तु उसने देश पर इसलिए कर लगाया कि फि़रौन की आज्ञानुसार धन चुकता कर सके। उसने फि़रौन नको को देने के लिए प्रजा से उनकी क्षमता के अनुसार चांदी और सोना वसूल किया।
36जब यहोयाकीम पच्चीस वर्ष का था, तब वह राजा बना। उसने यरूशलेम में ग्यारह वर्ष राज्य किया। उसकी माता का नाम जबीदा था जो रूमा वासी पदायाह की पुत्री थी।
37उसने अपने पूर्वजों के समान वही किया जो यहोवा की दृष्टि में बुरा है।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)