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पुराना नियम · 2 राजा · अध्याय 3 / 25

2 राजा 3

1यहूदा के राजा यहोशापात के अठारहवें वर्ष में अहाब का पुत्र यहोराम सामरिया में इस्राएल का राजा हो गया और बारह वर्ष तक राज्य करता रहा।

2यघपि उसने वही किया जो यहोवा की दृष्टि में बुरा है, फिर भी अपने पिता और अपनी माता के समान नहीं किया; क्योंकि उसने बाल के उस स्तम्भ को हटा दिया जिसका निर्माण उसके पिता ने किया था।

3फिर भी वह उन्हीं पापों में लिप्त रहा जो नबात के पुत्र यारोबाम ने इस्राएल से करवाए थे, और उनसे न फिरा।

4मोआब का राजा मेशा भेड़पालन करता था और इस्राएल के राजा को एक लाख मेमनों के साथ एक लाख मेढ़ों का ऊन दिया करता था।

5परन्तु ऐसा हुआ कि जब अहाब मर गया, मोआब के राजा ने इस्राएल के राजा से विद्रोह किया।

6उस समय यहोराम ने सामरिया से निकलकर सम्पूर्ण इस्राएल को एकत्रित किया।

7तब उसने जाकर यहूदा के राजा यहोशापात को संदेश भेेजा, “मोआब के राजा ने मुझसे विद्रोह किया है। क्या तू मोआब से लड़ने के लिए मेरे साथ जाएगा?” उसने कहा, “हां, मैं चलूंगा। जैसा तू, वैसा मै। मेरे लोग जैसे तेरे लोग, मेरे घोड़े जैसे तेरे घोड़े।”

8और उसने कहा, “हम चढ़ाई के लिए किस मार्ग से जाएं?” उसने उत्तर दिया, “एदोम के जंगल के मार्ग से।”

9अतः इस्राएल का राजा, यहूदा के राजा और एदोम के राजा को भी साथ लेकर चला। उन्होंने सात दिन की यात्रा का चक्कर लगाया, और सेना तथा उनके पीछे-पीछे चलने वाले पशुओं के लिए कहीं जल न मिला।

10तब इस्राएल के राजा ने कहा, “हाय! यहोवा ने तो इन तीन राजाओं को मोआब के हाथ में दे देने के लिए ही बुलाया है।”

11परन्तु यहोशापात ने कहा, “क्या यहां यहोवा का कोई नबी नहीं जिसके द्वारा हम यहोवा से पूछें?” तब इस्राएल के राजा के कर्मचारियों में से एक ने उत्तर देकर कहा, “हां, शापात का पुत्र एलीशा यहां है, जो एलिय्याह के हाथ धुलाया करता था।”

12तब यहोशापात ने कहा, “यहोवा का वचन उसके पास है।” तब इस्राएल का राजा और यहोशापात तथा एदोम का राजा उसके पास गए।

13तब एलीशा, ने इस्राएल के राजा से कहा, “मुझे तुझसे क्या काम? अपने पिता और अपनी माता के नबियों के पास जा।” तब इस्राएल के राजा ने उससे कहा, “नहीं, यहोवा ने तो इन तीनों राजाओं को मोआब के हाथ में दे देने के लिए ही इकट्ठा किया है।”

14तब एलीशा ने कहा, “सेनाओं का यहोवा जिसके सम्मुख मैं खड़ा रहता हूं-उसके जीवन की शपथ, यदि मैं यहूदा के राजा यहोशापात की उपस्थिति का आदर न करता तो न मैं तेरी ओर दृष्टि करता, न तुझे देखता।

15पर अब एक वीणा-वादक को मेरे पास ले आओ।” और ऐसा हुआ कि जब वादक ने बजाया तो यहोवा का सामर्थ्य एलीशा में समाया।

16और उसने कहा, “यहोवा यों कहता हैः इस सारी घाटी में गड्हे ही गड्हे खोद डालो।

17क्योंकि यहोवा यों कहता हैः तुम न तो बयार देखोगे और न वर्षा, फिर भी यह घाटी जल से भर जाएगी जिससे कि तुम पी सको-तुम और तुम्हारे गाय-बैल और तुम्हारे पशु।

18और यह यहोवा की दृष्टि में केवल छोटी सी बात हैः वह तो मोआबियों को भी तुम्हारे हाथ में दे देगा।

19तब तुम प्रत्येक गढ़वाले और उत्तम नगर को नष्ट कर देना, और प्रत्येक अच्छे वृक्ष को गिरा देना, और सब जल-स्रोतों को बन्द कर देना, तथा प्रत्येक अच्छे खेत को पत्थरों से बिगाड़ देना।”

20और देखो, ऐसा हुआ कि प्रातःकाल बलिदान चढ़ाने के समय के लगभग, एदोम की ओर से जल बहकर आया और सारा क्षेत्र जल से भर गया।

21यह सुनकर कि वे राजा हमसे युद्ध करने आए हैं; जितने मोआबी युद्ध करने के योग्य और व्यस्क थे, बुलाए गए, और सीमा पर जा डटे।

22भोर को जब वे उठे, तो सूर्य जल पर चमक रहा था, अतः मोआबियों को सामने का जल रक्त के समान लाल दिखाई पड़ा।

23तब उन्होंने कहा, “यह तो रक्त है। निश्चय राजा आपस ही में लड़ पड़े, और उन्होंने एक दूसरे को मार डाला है। इसलिए मोआबियो, आओ, लूट-पाट करने चलो।”

24परन्तु जब वे इस्राएलियों की छावनी में पहुँचे तो इस्राएलियों ने उठकर मोआबियों पर आक्रमण कर दिया, अतः वे उनके सामने से भागे, और वे मोआबियों को मारते-मारते उनके ही देश में घुस गए।

25इस प्रकार उन्होंने नगरों को ढा दिया, और उनमें से सबने हर एक अच्छे खेत में एक-एक पत्थर फेंका जिससे वह भर गया। इसी प्रकार उन्होंने जल के सब स्रोतों को बन्द कर दिया और सब अच्छे वृक्षों को गिरा दिया। केवल कीर-हरेशेत के पत्थरों को ही उन्होंने छोड़ा, परन्तु गोफन चलाने वालों ने उसे भी घेरकर मारा।

26जब मोआब के राजा ने देखा की युद्ध मेरे लिए अत्यन्त प्रचंड है तो उसने अपने साथ सात सौ आदमी लिए जिन्होंने तलवार खींची और युद्धपंक्ति को चीरकर एदोम के राजा तक पहुंचने का प्रयत्न किया, पर वे ऐसा न कर सके।

27तब उसने अपने ज्येष्ठ पुत्र को जो उसके स्थान पर राजा बनने वाला था लेकर शहरपनाह पर होमबलि किया। तब इस्राएल पर भारी प्रकोप पड़ा। अतः वे उसे छोड़कर अपने देश को लौट गए।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)