पुराना नियम · 2 शमूएल · अध्याय 16 / 24
2 शमूएल 16
1अभी दाऊद चोटी से थोड़ा आगे बढ़ा ही था कि देखो, मपीबोशेत का सेवक सीबा उसे मिला। वह दो गदहे लिए हुए था जिन पर जीन कसे थे तथा दो सौ रोटियां, किशमिश के एक सौ गुच्छे, एक सौ ग्रीष्मकालीन फल, और एक मशक मदिरा लदी थी।
2राजा ने सीबा से कहा, “तू इन्हें क्यों लाया? तब सीबा ने उत्तर दिया, ये गदहे तो राजा के घराने की सवारी के लिए हैं, और रोटियां तथा ग्रीष्मकालीन फल जवानों के भोजन के लिए हैं, और मदिरा उनके पीने के लिए है जो जंगल में थक जाए।”
3इस पर राजा ने कहा, “और तेरे स्वामी का पुत्र कहां है?” तब सीबा ने राजा को उत्तर दिया, “देख, वह यरूशलेम में ठहरा है, क्योंकि उसने कहा, ‘आज इस्राएल का घराना मेरे पिता का राज्य मुझे लौटा देगा।”’
4अतः राजा ने सीबा से कहा, “देख, मपीबोशेत की सम्पूर्ण सम्पत्ति अब तेरी हो गई।” सीबा ने कहा, “मैं दण्डवत् करता हू। हे मेरे स्वामी, हे राजा, तेरी कृपा-दृष्टि मुझ पर बनी रहे।”
5जब राजा दाऊद बहुरीम पहुंचा तो देखो, शाऊल के वंश के घराने का एक व्यक्ति वहां आया। उसका नाम शिमी था जो गेरा का पुत्र था। वह लगातार शाप देते हुए आया।
6उसने दाऊद पर और दाऊद राजा के सब कर्मचारियों पर पत्थर फेंके, जबकि सब लोग और सब पराक्रमी पुरुष उसके दाहिनी तथा बाईं ओर थे।
7और शिमी कोसता हुआ यों बकता गया, “हट, हट, हे खूनी, हे ओछे।
8जिस शाऊल के स्थान पर तू ने राज्य किया उसके घराने के सारे खून का बदला यहोवा ने तुझसे ही लिया है, और यहोवा ने राज्य तेरे पुत्र अबशालोम के हाथ में दे दिया है। अब देख, तू अपनी ही बुराई में फंस गया क्योंकि तू खूनी है!”
9तब सरूयाह के पुत्र अबीशै ने राजा से कहा, “यह मरा कुत्ता मेरे स्वामी राजा को शाप क्यों दे? मुझे उधर जाकर उसका सिर काटने दे।”
10परन्तु राजा ने कहा, “हे सरूयाह के पुत्रे, मुझे तुमसे क्या काम? वह जो कोसता है यदि यहोवा ने उससे कहा है, ‘दाऊद को शाप दे’, तो कौन पूछ सकता है, ‘तूने ऐसा क्यों किया है?”’
11फिर दाऊद ने अबीशै तथा अपने सब कर्मचारियों से कहा, “देखो, मेरा पुत्र, जो मुझ ही से उत्पन्न हुआ, मेरे प्राण का खोजी है। तब यह बिन्यामीनी इससे अधिक क्यों न करे? उसे रहने दो और शाप देने दो, क्योंकि यहोवा ने उससे कहा है।
12कदाचित् यहोवा मेरी विपत्ति पर ध्यान दे, और जो शाप इसने आज मुझे दिया है उसके बदले में मेरी भलाई करे।”
13अतः दाऊद और उसके लोग मार्ग में आगे बढ़ते गए। और शिमी भी पहाड़ी के किनारे-किनारे दाऊद की बराबरी पर चलता गया, और चलते-चलते शाप देता तथा पत्थर और धूल फेंकता गया।
14और राजा अपने साथ के सब लोगों सहित अपने ठिकाने पर थका हुआ पहुंचा, और वहां उसने विश्राम किया।
15अबशालोम ने अपने सब लोगों अर्थात् इस्राएल के सब पुरुषों सहित यरूशलेम में प्रवेश किया। अहीतोपेल भी उसके साथ था।
16जब दाऊद का मित्र एरेकी हूशै अबशालोम के पास आया तब ऐसा हुआ कि हूशै ने अबशालोम से कहा, “राजा चिरंजीव रहे! राजा चिरंजीव रहे!”
17तब अबशालोम ने हूशै से कहा, “क्या मित्र के प्रति तेरी यही निष्ठा है? तू अपने मित्र के साथ क्यों नहीं गया?”
18इस पर हूशै ने अबशालोम को उत्तर दिया, “ऐसा नहीं! क्योंकि जिसको यहोवा ने, इन लोगों ने, और इस्राएल के सब पुरुषों ने चुन लिया है मैं भी उसी का होऊंगा, और उसी के साथ रहूंगा।
19मैं और किसकी सेवा करूं? क्या मैं उसके पुत्र के सामने रहकर उसकी सेवा न करूं? जिस प्रकार मैंने तेरे पिता के सामने रहकर उसकी सेवा की है उसी प्रकार मैं तेरे सामने भी रहूंगा।”
20तब अबशालोम ने अहीतोपेल से कहा, “अपनी सलाह दे। हम क्या करें?”
21अहीतोपेल ने अबशालोम से कहा, “जिन रखैलों को तेरा पिता भवन की देख-भाल करने के लिए छोड़ गया है उनके पास तू जा। तब सम्पूर्ण इस्राएल सुनेगा कि तूने अपने प्रति अपने पिता की घृणा को भड़काया है। इससे जितने लोग तेरे साथ हैं उन सबके हाथ भी सुदृढ़ होंगे।”
22अतः छत पर अबशालोम के लिए तम्बू ताना गया, और अबशालोम सम्पूर्ण इस्राएल के देखते अपने पिता की रखैलों के पास गया।
23उन दिनों अहीतोपेल की सलाह ऐसी होती थी मानो किसी ने परमेश्वर का ही वचन पूछ लिया हो। अहीतोपेल की सलाह तो दाऊद और अबशालोम दोनों के लिए ऐसी ही समझी जाती थी।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)