पुराना नियम · 2 शमूएल · अध्याय 17 / 24
2 शमूएल 17
1फिर अहीतोपेल ने अबशालोम से कहा, मुझे बारह हज़ार पुरुष चुनने दे। कि मैं जाकर आज ही रात दाऊद का पीछा करू।
2जब वह थका-मांदा होगा उसी समय मैं उस पर टूट पडूंगा और ऐसा आतंकित कर दूंगा कि उसके साथ के सब लोग भाग निकलेंगे। तब मैं राजा को अकेला पाकर मार डालूंगा,
3और मैं सब लोगों को तेरे पास लौटा ले आऊंगा। जिस मनुष्य का तू खोजी है उसके मिलने से समस्त प्रजा मिल जाएगी। तब सब लोग शान्ति से रहेंगे।”
4यह बात अबशालोम और इस्राएल के सब पुरनियों को बहुत अच्छी लगी।
5फिर अबशालोम ने कहा, “अब एरेकी हूशै को भी बुलाओ। देखें उसे क्या कहना है!”
6जब हूशै अबशालोम के पास आ गया तब अबशालोम ने उससे कहा, “अहीतोपेल ने यह बात कही है। क्या हम उसकी बात मानें? यदि नहीं, तो तू ही बता।”
7अतः हूशै ने अबशालोम से कहा, “अहीतोपेल ने इस बार जो सलाह दी है वह अच्छी नहीं है।”
8हूशै ने आगे कहा, “तू अपने पिता और उसके वीरों को जानता है कि वे पराक्रमी और उस रीछनी के समान खूंखार हैं जिसके बच्चे जंगल में छीन लिए गए हो। और तेरा पिता युद्ध-कला में कुशल है। वह अन्य लोगों के साथ रात नहीं बिताएगा।
9सुन, इस समय तक तो वह किसी गुफा या किसी अन्य स्थान में छिप गया होगा। और ऐसा होगा कि जब वह पहले ही आक्रमण में उन पर टूट पड़ेगा तो जो सुनेगा वह यही कहेगा कि अबशालोम के अनुगामियों का संहार हो रहा है।
10तब वीर का हृदय जो सिंह का-सा होता है उसका भी साहस जाता रहेगा। सारा इस्राएल तो जानता ही है कि तेरा पिता पराक्रमी है ओर जितने पुरुष उसके साथ हैं वे सब शूरवीर है।
11मैं सलाह देता हूं कि दान से बेर्शेबा तक सब इस्राएली निश्चय तेरे पास समुद्र-तट की रेत के समान बहुसंख्या में एकत्रित किए जाएं और कि तू स्वयं युद्ध में जाए।
12इस प्रकार जिस किसी स्थान में वह मिले हम उसके पास पहुँच ही जाएंगे। तब जैसे ओस भूमि पर गिरती है वैसे ही हम उस पर टूट पड़ेंगे। इससे वह और जितने लोग उसके साथ हैं उनमें से एक भी बचने न पाएगा।
13यदि वह किसी नगर में घुस जाए तो सारा इस्राएल रस्सियां लेकर वहां आएगा। और हम उस नगर को खींच कर खाई में फेंक देंगे, यहां तक कि उसका एक छोटा-सा पत्थर भी न बचेगा।”
14तब अबशालोम और इस्राएल के सब लोगों ने कहा, “एरेकी हूशै की सलाह अहीतोपेल की सलाह से उत्तम है।” क्योंकि यहोवा ने तो अहीतोपेल की अच्छी सलाह को निष्फल करने का निश्चय किया था जिससे यहोवा अबशालोम पर ही विपत्ति लाए।
15तब हूशै ने सादोक और एब्यातार याजकों से कहा, “अबशालोम और इस्राएल के पुरनियों को अहीतोपेल ने तो यह-यह सलाह दी, पर मैंने ऐसी-ऐसी सलाह दी।
16अतः शीघ्र भेजकर दाऊद को बता, ‘जंगल के घाटों में रात मत बिता, पर अवश्य पार उतर जा, ऐसा न हो कि राजा और जितने लोग उसके साथ हैं सब के सब नाश हो जाएं’।”
17योनातान और अहीमास तो एन-रोगेल में ठहरे हुए थे। एक दासी वहां जाती और उनको समाचार दे आती थी, तब वे जाकर राजा को समाचार दे आते थे, क्योंकि वे किसी के देखते नगर में नहीं जा सकते थे।
18पर एक लड़के ने उन्हें देख कर अबशालोम को बताया दिया। अतः उन दोनों ने शीघ्रता से प्रस्थान किया, और बहुरीम में एक व्यक्ति के घर आए जिसके आंगन में एक कुआं था। वे उसी कुएं में छिप गए।
19तब उसकी स्त्री ने कपड़ा लेकर कुएं के मुंह पर बिछा दिया, और उस पर अनाज फैला दिया जिससे कुछ मालूम न पड़ा।
20तब अबशालोम के कर्मचारियों ने घर में उस स्त्री के पास आकर पूछा, “अहीमास और योनातान कहां हैं?” तब स्त्री ने उनसे कहा, “वे तो नाले के पार उतर गए।” उन्होंने उनको खोजा, और न पाकर यरूशलेम को लौट गए।
21ये दोनों उनके प्रस्थान करने के बाद कुएं से बाहर निकल आए, और इन्होंने जाकर दाऊद राजा को बताया। इन्होंने दाऊद से कहा, “उठ, नाले को जल्दी पार कर, क्योंकि अहीतोपेल ने तेरे विरुद्ध ऐसी-ऐसी सलाह दी है।”
22तब दाऊद अपने सब साथियों सहित उठकर यरदन पार हो गया। पौ फटने तक ऐसा एक भी न रहा जिसने यरदन को पार न कर लिया हो।
23जब अहीतोपेल ने देखा कि मेरी सलाह तो नहीं मानी गई तब उसने अपने गदहे पर काठी कसी, और उठकर तथा अपने नगर में अपने घर को जाकर अपने परिवार का प्रबन्ध किया, फिर अपने आप को फांसी लगा ली। इस प्रकार वह मर गया और उसको उसके पिता की क़ब्र में मिट्टी दी गई।
24इसके बाद दाऊद महनैम में आ गया। और अबशालोम तथा उसके साथ इस्राएल के सब पुरुषों ने यरदन को पार किया।
25अबशालोम ने योआब के स्थान पर अमासा को सेना के ऊपर नियुक्त किया। यह अमासा एक इस्राएली पुरुष का पुत्र था जिसका नाम यिन्ना था, जिसने नाहाश की पुत्री अबीगल, अर्थात् योआब की माता सरूयाह की बहन को ५ब्याह लिया था।
26तब इस्राएलियों और अबशालोम की छावनी गिलाद में डाली गई।
27जब दाऊद महनैम में आया तब अम्मोनियों के रब्बा से नाहाश का पुत्र शोबी, और लो-दबार से अमीएल का पुत्र माकीर, और रोगलीम से गिलादी, बर्जिल्लै
28चारपाइयां, तसले, मिट्टी के बर्तन, गेहूं, जौ, आटा, भुना अनाज, लोबिया, मसूर, भुने बीज,
29मधु, दही, भेड़ें, और गाय के दूध का पनीर, यह सोचकर दाऊद और उसके साथियों के खाने के लिए ले आए कि ये लोग जंगल में भूखे, थके-मांदे, और प्यासे है।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)