पुराना नियम · 2 शमूएल · अध्याय 2 / 24
2 शमूएल 2
1इसके बाद ऐसा हुआ कि दाऊद ने यहोवा से पूछा, “क्या मैं यहूदा के किसी नगर में जाऊं?”तब यहोवा ने उसको उत्तर दिया, “जा।” अतः दाऊद ने पूछा, “मैं कहां जाऊं?” तब यहोवा ने कहा, “हेब्रोन मे।”
2अतः दाऊद वहां गया, और उसके साथ उसकी दोनों पत्नियां, यिज्रेली अहीनोअम तथा कर्मेली नाबाल की विधवा अबीगैल भी गई।
3फिर दाऊद अपने साथियों को एक-एक के घरानों समेत अपने साथ ले आया, और वे हेब्रोन के नगरों में रहने लगे।
4तब यहूदा के पुरुष आए और वहां उन्होंने दाऊद का यहूदा के घराने का राजा होने के लिए अभिषेक किया। फिर उन्होंने दाऊद से यह कहा, “याबेश-गिलाद के लोगों ने शाऊल को मिट्टी दी है।”
5तब दाऊद ने याबेश गिलाद के लोगों के पास दूतों के द्वारा यह सन्देश भेजा, “यहोवा की आशीष तुम पर हो क्योंकि तुमने अपने प्रभु शाऊल पर कृपा की, और उसे मिट्टी दी है।
6अब यहोवा तुम पर करुणा और सच्चाई प्रकट करे। मैं भी तुम्हारी भलाई करूंगा क्योंकि तुमने यह काम किया है।
7इसलिए, अब अपने हाथ दृढ़ करो, और पराक्रमी बनो; क्योंकि शाऊल, तुम्हारा प्रभु अब नहीं रहा, और यहूदा के घराने ने भी अपना राजा होने के लिए मेरा अभिषेक किया है।”
8उधर शाऊल की सेना का सेनापति, नेर का पुत्र अब्नेर, शाऊल के पुत्र ईशबोशेत को अपने साथ महनैम ले गया,
9और उसको गिलाद, अशूरियों, यिज्रेल, एप्रैम, बिन्यामीन, वरन् समस्त इस्राएल का राजा बना दिया।
10जिस समय शाऊल का पुत्र ईशबोशेत इस्राएल का राजा हुआ उस समय वह चालीस वर्ष का था, और उसने दो वर्ष राज्य किया। परन्तु यहूदा का घराना दाऊद का अनुगामी बना रहा,
11और दाऊद हेब्रोन में यहूदा के घराने पर सात वर्ष छः महीने तक राजा रहा।
12तब नेर का पुत्र अब्नेर, शाऊल के पुत्र ईशबोशेत, के सेवकों के साथ महनैम से गिबोन को गया।
13इधर सरूयाह का पुत्र योआब, और दाऊद के सेवक उनसे मिलने को निकले, और उनकी भेंट गिबोन के तालाब के पास हुई। तब वे दोनों दल बैठ गए। एक दल तालाब के इस ओर, तथा दूसरा दल तालाब के दूसरी ओर।
14तब अब्नेर ने योआब से कहा, “अब हमारे जवान उठें और हमारे सामने प्रतियोगिता में भाग ले।” योआब ने कहा, “ठीक है, वे उठे।”
15अतः वे खड़े हुए, और दोनों ओर से गिनती के अनुसार जवान बाहर आएः शाऊल के पुत्र ईशबोशेत तथा बिन्यामीन की ओर से बारह, और दाऊद के सेवकों में से बारह।
16तब उनमें से प्रत्येक ने एक-दूसरे के सिर को पकड़ा और अपने विरोधी की पसली में अपनी तलवार भोंक दी। इस प्रकार वे सब एक साथ धराशायी हो गए। इसलिए वह स्थान हेल्कत-हेस्सूरिम कहलाया जो गिबोन में है।
17उस दिन अति भयंकर युद्ध हुअा, और अब्नेर तथा इस्राएल के पुरुष दाऊद के योद्धाओं के सामने पराजित हुए।
18वहां पर सरूयाह के तीनों पुत्र योआब, अबीशै और असाहेल उपस्थित थे। और असाहेल मैदान में चिकारे के समान तेज़ दौड़ने वाला था।
19असाहेल ने अब्नेर का पीछा किया, और अब्नेर का पीछा करते हुए न तो दाएं मुड़ा और न बाए।
20तब अब्नेर ने पीछे मुड़कर उससे कहा, “असाहेल! क्या तू है?” और उसने उत्तर दिया, “हां, मैं ही हू।”
21अतः अब्नेर ने उससे कहा, “अपने दाएं या अपने बाएं मुड़, और किसी जवान को पकड़ ले, तथा उसके अस्त्र-शस्त्र छीन ले।” परन्तु असाहेल ने उसका पीछा करना न छोड़ा।
22तब अब्नेर ने असाहेल से पुनः कहा, “मेरा पीछा करना छोड़ दे। मैं तुझे मारकर क्यों धराशायी करूं? तब मैं तेरे भाई योआब के सामने अपना मुख कैसे दिखा सकूंगा?”
23तो भी उसने मुड़ने से इनकार कर दिया। इसलिए, अब्नेर ने अपने भाले के कुन्दे से उसके पेट में मारा जिससे भाला आरपार होकर पीछे की तरफ निकल गया। वह वहीं गिरकर तत्काल मर गया। और ऐसा हुआ कि जितने लोग उस स्थान पर आए जहां असाहेल गिरा और मरा पड़ा था, वे वहां मौन खड़े हो गए।
24परन्तु योआब और अबीशै अब्नेर का पीछा करते रहे, और सूर्य डूबते-डूबते वे अम्मा की पहाड़ी पर पहुंचे जो गिबोन के जंगल के मार्ग के किनारे गीह के सामने है।
25और बिन्यामीनी लोग अब्नेर के साथ एकत्रित हुए, और एक दल में संगठित हो गए। और वे एक पहाड़ी की चोटी पर खड़े हुए।
26तब अब्नेर ने योआब को पुकारकर कहा, “क्या तलवार सर्वदा निकलती रहे? क्या तू नहीं जानता कि अन्त में इसका परिणाम कड़वा ही होगा? तू कब तक लोगों को आज्ञा नहीं देगा कि वे अपने भाइयों का पीछा करने से मुंह फेरें?”
27तब योआब ने कहा, “परमेश्वर के जीवन की सौगन्ध, यदि तू नहीं बोलता तो लोग निश्चय सवेरे ही चले जाते और अपने भाई का पीछा न करते।”
28फिर योआब ने नरसिंगा फूंका जिसे सुनकर सब लोग रुक गए, और इस्राएल का पीछा न किया। ओर न ही उन्होंने युद्ध किया।
29तब अब्नेर और उसके पुरुष उस सारी रात अराबा से होकर चलते रहे, और उन्होंने यरदन नदी पार की और सुबह तक चलते रहे और महनैम पहुंचे।
30तब योआब अब्नेर का पीछा करने से लौटा। जब उसने अपने सब लोगों को एक साथ एकत्रित किया तब दाऊद के पुरुषों में से असाहेल के अतिरिक्त उन्नीस पुरुष लापता थे।
31परन्तु दाऊद के पुरुषों ने बिन्यामीनियों तथा अब्नेर के पुरुषों में से बहुतों को मारा था जिससे तीन सौ साठ व्यक्ति मारे गए थे।
32वे असाहेल को उठा ले गए और उसके पिता की कब्र में जो बैतलहम में थी उसको मिट्टी दी। तब योआब और उसके पुरुष रात-भर चलते रहे और पौ फटते-फटते हेब्रोन पहुंचे।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)