पुराना नियम · 2 शमूएल · अध्याय 3 / 24
2 शमूएल 3
1निदान शाऊल के घराने तथा दाऊद के घराने के मध्य बहुत समय तक युद्ध चलता रहा दाऊद दिन-प्रतिदिन अधिक शक्तिशाली होता गया, परन्तु शाऊल का घराना लगातार निर्बल होता चला गया।
2हेब्रोन में दाऊद के पुत्र उत्पन्न हुए। उसका ज्येष्ठ पुत्र अम्नोन हुआ जो यिज्रेली अहीनोअम से उत्पन्न हुआ।
3और उसका दूसरा पुत्र किलाब था जो कर्मेली नाबाल की विधवा अबीगैल से था; तीसरा अबशालोम, जो गेशूर के राजा, तल्मै की पुत्री माका से उत्पन्न हुआ था।
4चौथा हग्गीत का पुत्र, अदोनिय्याह, पांचवा अबीतल का पुत्र शपत्याह उत्पन्न हुआ;
5छठवां, यित्रम जो दाऊद की पत्नी एग्ला से हुआ। ये ही हेब्रोन में दाऊद से उत्पन्न हुए।
6और ऐसा हुआ कि जब शाऊल के घराने और दाऊद के घराने के मध्य युद्ध चल रहा था तो अब्नेर शाऊल के घराने में अपने को सबल बना रहा था।
7शाऊल की एक रखैल थी जिसका नाम रिस्पा था जो अय्या की पुत्री थी। ईशबोशेत ने अब्नेर से कहा, “तू मेरे पिता की रखैल के पास क्यों गया?”
8अब्नेर ईशबोशेत की इन बातों से अत्यधिक क्रोधित हुआ, और कहा, “क्या मैं यहूदा के कुत्ते का सिर हूं? आज मैं तेरे पिता शाऊल के घराने, उसके भाइयों और मित्रों पर दया दिखाता हूं, तथा मैंने तुझे दाऊद के हाथों नहीं सौंपा। फिर भी आज तू मुझ पर उस स्त्री के विषय दोष लगाता है।
9अब्नेर से परमेश्वर वैसा ही बल्कि उससे भी अधिक करे यदि मैं दाऊद से वैसा ही व्यवहार न करूं, जिसकी शपथ परमेश्वर ने उसके साथ खाई थी,
10कि शाऊल के घराने से राज्य को लेकर दाऊद का सिंहासन दान से बेर्शेबा तक इस्राएल और यहूदा पर स्थापित करू।”
11वह अब्नेर को इसका कोई उत्तर न दे सका क्योंकि वह उससे डरता था।
12तब अब्नेर ने दाऊद के पास दूतों के हाथ यह सन्देश भेजा, “देश किसका है? मुझसे अपनी वाचा बांध और देख, सम्पूर्ण इस्राएल को तेरी अधीनता में लाने के लिए मेरा हाथ तेरे साथ होगा।”
13तब उसने कहा, “ठीक है! मैं तेरे साथ वाचा बांधूंगा, परन्तु मेरी एक शर्त है, कि जब तू मुझसे मिलने आए तो जब तक तू शाऊल की पुत्री, मीकल को पहले लेकर अपने साथ न आए तो तू मेरा मुख न देखने पाएगा।”
14अतः दाऊद ने शाऊल के पुत्र ईशबोशेत के पास सन्देशवाहक भेजकर कहा, “मेरी पत्नी मीकल को मुझे सौंप दे जिससे मेरी सगाई पलिश्तियों की एक सौ खलड़ी देकर कराई गई थी।”
15तब ईशबोशेत ने लोग भेजकर मीकल को उसके पति, लैश के पुत्र पलतिएल से छीन लिया।
16परन्तु उसका पति रोते-रोते उसके साथ लग गया, और बहूरीम तक उसके पीछे चलता रहा। तब अब्नेर ने उससे कहा, “जा, लौट जा।” अतः वह लौट गया।
17अब अब्नेर ने इस्राएल के प्राचीनों से सलाह लेकर कहा, “विगत समयों में तुम दाऊद को अपना राजा बनाने की इच्छा करते थे।
18तो अब वैसा ही करो, क्योंकि यहोवा ने दाऊद के विषय में कहा है, ‘मैं अपने सेवक दाऊद के हाथ से अपनी प्रजा इस्राएल का पलिश्तियों तथा उसके सब शत्रुओं के हाथ से छुटकारा करूंगा।”
19अब्नेर ने बिन्यामीन से भी ये बातें कही। इसके अतिरिक्त, अब्नेर ने हेब्रोन जाकर दाऊद को वह सब बातें कह सुनाईं जो इस्राएल और बिन्यामीन के सम्पूर्ण घराने को अच्छी लगी थी।
20तब अब्नेर अपने साथ बीस पुरुष लेकर हेब्रोन में दाऊद के पास आया; और दाऊद ने अब्नेर तथा उसके साथ आए हुए पुरुषों के लिए भोज किया।
21और अब्नेर ने दाऊद से कहा, “मुझे उठकर जाने दे कि मैं जाकर सम्पूर्ण इस्राएल को अपने प्रभु राजा के पास एकत्रित करूं कि वे तेरे साथ वाचा बांधें, और तू अपनी इच्छानुसार सम्पूर्ण राज्य का राजा हो।” अतः दाऊद ने अब्नेर को भेज दिया, और वह कुशल से चला गया।
22और देखो, दाऊद के सेवक और योआब एक चढ़ाई पर से लौटकर आए, और अपने साथ बहुत अधिक लूट का माल लाए। परन्तु अब्नेर हेब्रोन में दाऊद के साथ नहीं था क्योंकि उसने उसे विदा कर दिया था, और वह कुशल से चला गया था।
23जब योआब तथा उसके साथ गई हुई पूरी सेना वापस पहंची तब सेवकों ने योआब को बताया, “नेर का पुत्र, अब्नेर राजा के पास आया था। राजा ने उसको विदा कर दिया है और वह कुशलपूर्वक चला गया है।”
24तब योआब ने राजा के पास आकर कहा, “यह तूने क्या किया है? देख, अब्नेर तेरे पास आया था। फिर तू ने उसे क्यों जाने दिया कि वह चला भी गया?
25तू तो नेर के पुत्र अब्नेर को जानता है कि वह तुझे धोखा देने, तेरे आने-जाने के विषय में जानने तथा जो कुछ तू कर रहा है उसका भेद लेने के लिए आया था।”
26योआब के दाऊद के पास से निकलकर जाने के बाद योआब ने अब्नेर के पीछे सन्देशवाहक भेजे और वे उसे सीरा नाम कुएं से लौटाकर ले आए। परन्तु दाऊद इस बात से अनभिज्ञ था।
27जब अब्नेर हेब्रोन वापस आया तब योआब उसे फाटक के बीच एकान्त में बात करने के लिए अलग ले गया और अपने भाई असाहेल के खून का बदला लेने के लिए उसके पेट में ऐसा वार किया कि वह मर गया।
28बाद में जब दाऊद ने इसके विषय में सुना तब उसने कहा, “मैं अपनी प्रजा सहित यहोवा के सामने नेर के पुत्र अब्नेर के खून से सर्वदा के लिए निर्दोष हू।
29यह योआब के सिर पर और उसके पिता के सम्पूर्ण घराने पर ही पड़े, और ऐसा हो कि योआब के घराने में कोई न कोई प्रमेह का रोगी, कुष्ठ रेागी, बैसाखी का लगाने वाला और तलवार से घात किया जाने वाला और रोटी के लिए तरसने वाला होता रहे।”
30अतः योआब और उसके भाई अबीशै ने अब्नेर की हत्या इसलिए की क्योंकि उनके भाई असाहेल को गिबोन के युद्ध में मार डाला था।
31तब दाऊद ने योआब और उसके साथ के सब लोगों से कहा, “अपने वस्त्र फाड़ो कमर में टाट बांधो और अब्नेर के आगे-आगे शोक मनाओ।” और दाऊद राजा अर्थी के पीछे-पीछे चला।
32इस प्रकार उन्होंने हेब्रोन में अब्नेर को मिट्टी दी। तब राजा फूट-फूट कर अब्नेर की क़ब्र पर रोया, और सब लोग भी रोये।
33फिर राजा ने अब्नेर के विषय में यह विलापगीत गायाः “क्या अब्नेर को एक मूर्ख के समान ही मरना था?
34तेरे हाथ बंधे नहीं थे, पैरों में तेरे बेड़ियां नहीं थी। जैसे कोई दुष्ट के सामने गिरता है, वैसे ही तू भी गिर गया है।” तब सब लोग उसके लिए फिर रोये।
35तब सब लोग दाऊद को मनाने आए कि दिन रहते कुछ भोजन करे। परन्तु दाऊद ने यह कहकर शपथ खाई, “यदि मैं सूर्यास्त के पूर्व रोटी या अन्य कोई वस्तु चखूं भी तो परमेश्वर मुझसे वैसा ही, वरन् उससे भी अधिक करे!”
36सब लोगों ने इन बातों पर ध्यान दिया, और इससे उनको प्रसन्नता हुई, वैसे भी राजा जो कुछ करता था उससे सब लोग प्रसन्न होते थे।
37अतः सब लोगों ने और समस्त इस्राएल ने उस दिन समझ लिया कि नेर के पुत्र अब्नेर की हत्या राजा की इच्छा से नहीं की गई थी।
38तब राजा ने अपने कर्मचारियों से कहा, “क्या तुम नहीं जानते कि आज के दिन इस्राएल में एक राजकुमार और एक महान् पुरुष का अन्त हो गया है?
39यघपि मैं अभिषिक्त राजा हूं, तो भी आज मैं निर्बल हू। और सरूयाह के ये पुत्र मेरे लिए कठिन समस्या बन गए है। यहोवा बुराई करने वाले को उसकी बुराई के
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)