नया नियम · 2 थिस्सलुनीकियों · अध्याय 1 / 3
2 थिस्सलुनीकियों 1
1पौलुस, सिलवानुस तथा तीमुथियुस की ओर से थिस्सलुनीकियों की कलीसिया को, जो हमारे पिता परमेश्वर और प्रभु यीशु मसीह में हैः
2पिता परमेश्वर और प्रभु यीशु मसीह की ओर से तुम्हें अनुग्रह तथा शान्ति मिले।
3भाइयो, तुम्हारे लिए तो हमें सर्वदा परमेश्वर का धन्यवाद करना चाहिए, और यह उचित भी है, क्योंकि तुम्हारा विश्वास बहुत बढ़ गया है; और तुम में से हर एक का प्रेम परस्पर और भी बढ़ता जाता है।
4इसलिए परमेश्वर की कलीसियाओं में हम स्वयं भी तुम पर गर्व करते हैं कि जितनी यातनाएँ व क्लेश तुम सहते हो उन सब में तुम्हारा धैर्य और विश्वास प्रकट होता है।
5यह परमेश्वर के सच्चे न्याय का स्पष्ट संकेत है कि तुम परमेश्वर के राज्य के योग्य ठहराए जाओ, जिसके लिए तुम सचमुच दुख उठा रहे हो।
6क्योंकि परमेश्वर के लिए यह न्यायसंगत है कि जो तुम्हें क्लेश देते हैं, उन्हें बदले में क्लेश दे,
7और तुम क्लेश पाने वालों को हमारे साथ उस समय विश्राम दे जब प्रभु यीशु अपने सामर्थी दूतों के साथ, स्वर्ग से धधकती आग में प्रकट होगा,
8और जो परमेश्वर को नहीं जानते तथा जो हमारे प्रभु यीशु के सुसमाचार को नहीं मानते, उन्हें वह दण्ड दे।
9ऐसे लोग उस दिन प्रभु की उपस्थिति तथा उसकी शक्ति के प्रताप से दूर होकर अनन्त विनाश का दण्ड पाएंगे,
10जब वह अपने पवित्र लोगों में महिमा पाने और उन सब में जिन्होंने विश्वास किया है, आशचर्य का कारण होने के लिए आएगा-और तुम में भी, क्योंकि तुमने हमारी गवाही पर विश्वास किया।
11इसी उद्देशय से हम सर्वदा तुम्हारे लिए प्रार्थना भी करते हैं कि हमारा परमेश्वर तुम्हें अपनी बुलाहट के योग्य समझे, तथा भलाई की हर एक इच्छा को और विश्वास के हर एक कार्य को सामर्थ्य सहित पूरा करे,
12जिससे कि हमारे परमेश्वर और प्रभु यीशु मसीह के अनुग्रह के अनुसार हमारे प्रभु यीशु का नाम तुम में महिमा पाए, और तुम उसमे।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)