नया नियम · 2 थिस्सलुनीकियों · अध्याय 2 / 3
2 थिस्सलुनीकियों 2
1हे भाइयो, अब हम तुमसे अपने यीशु मसीह के आगमन और उसके पास अपने एकत्र होने के सम्बन्ध में निवेदन करते हैं,
2कि तुम किसी आत्मा, वचन या ऐसे पत्र के द्वारा जो मानो हमारी ओर से यह प्रकट करता हो कि प्रभु का दिन आ गया है, अपने मन में विचलित न होना, और न घबराना।
3कोई तुम्हें किसी भी तरह धोखा न देने पाए, क्योंकि वह दिन उस समय तक न आएगा जब तक कि पहिले धर्म का परित्याग न हो और पाप-पुरफ़ज अर्थात् विनाश का पुत्र प्रकट न हो जाए,
4जो तथाकथित ईशवर या पूज्य कहलाने वाली प्रत्येक वस्तु का विरोध करता और अपने आप को उन सब से ऊँचा ठहराता है, यहाँ तक कि वह परमेश्वर के मन्दिर में बैठकर स्वयं को ईशवर प्रदर्शित करता है।
5क्या तुम्हें स्मरण नहीं कि जब मैं तुम्हारे साथ था, तब ये बातें तुम्हें बताया करता था?
6तुम तो जानते हो कि अपने ही समय में प्रकट होने के लिए अभी उसे क्या रोके हुए है।
7क्योंकि अधर्म का रहस्य अभी भी कार्यशील है, और जब तक रोकने वाला हटा न दिया जाए तब तक वह उसे रोके रहेगा।
8तब वह अधर्मी प्रकट किया जाएगा जिसे प्रभु अपने मुंह की फूंक से मार डालेगा और अपने आगमन के तेज से भस्म कर देगा।
9भाइयों,तुम्हें हमारा परिश्रम और कष्ट स्मरण होगा कि हमने तुम में से किसी पर बोझ न बनने के अभिप्राय से कैसे रात-दिन काम-धंधा करके तुम्हें परमेश्वर का सुसमाचार सुनाया।
10उस अधर्मी का आना नाश होने वालों के लिए, शैतान की गतिविधि के अनुसार सम्पूर्ण सामर्थ्य, चिह्नों, झूठे आश्चर्यकर्मोंं और दुष्टता के हर धोखे के साथ होगा, क्योंकि उन्होंने सत्य के प्रेम को ग्रहण नहीं किया कि उनका उद्धार हो।
11इसी कारण परमेश्वर उन पर भरमाने वाले सामर्थ्य को भेजेगा कि वे झूठ की प्रतीति करें,
12जिससे कि वे सब जिन्होंने सत्य की प्रतीति नहीं की परन्तु दुष्टता में मग्न रहे, दण्ड पाए।
13परन्तु भाइयो, प्रभु के प्रियो, हमें तुम्हारे लिए सर्वदा परमेश्वर का धन्यवाद करना चाहिए, क्योंकि परमेश्वर ने आरम्भ ही से तुम्हें चुन लिया है कि आत्मा के द्वारा पवित्र बन कर और सत्य पर विश्वास करके उद्धार पाओ,
14जिसके लिए उसने हमारे सुसमाचार के द्वारा तुम्हें बुलाया कि तुम हमारे प्रभु यीशु मसीह की महिमा को प्राप्त कर सको।
15अतः भाइयो, दृढ़ रहो तथा उन रीति- विधियों में स्थिर रहो जिनकी शिक्षा तुमने हमसे मौखिक या पत्रें के द्वारा प्राप्त की है।
16अब स्वयं हमारा प्रभु यीशु मसीह तथा पिता परमेश्वर जिसने हमसे प्रेम किया और अनुग्रह से अनन्त शान्ति तथा उत्तम आशा दी है,
17तुम्हारे हृदयों को भलाई के प्रत्येक कार्य तथा वचन में दृढ़ करे और शान्ति दे।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)