नया नियम · 2 तीमुथियुस · अध्याय 1 / 4
2 तीमुथियुस 1
1पौलुस की ओर से जो परमेश्वर की इच्छा से मसीह यीशु का प्रेरित है, अर्थात् उस जीवन की प्रतिज्ञा के अनुसार जो मसीह यीशु में है,
2मेरे प्रिय पुत्र तीमुथियुस के नामः पिता परमेश्वर और हमारे प्रभु मसीह यीशु की ओर से तुझे अनुग्रह, दया और शान्ति मिले।
3मैं अपनी प्रार्थनाओं में रात-दिन निरन्तर तुझे स्मरण करते हुए परमेश्वर को धन्यवाद देता हूं, जिसकी सेवा मैं अपने पूर्वजों की रीति पर शुद्ध विवेक से करता हू।
4तेरे आंसुओं का स्मरण कर-कर के मेरी तीव्र इच्छा होती है कि तुझ से भेंट करूं और आनन्द से भर जाऊ।
5मैं तेरे निष्कपट विश्वास को भी स्मरण करता हूं, जो पहिले तेरी नानी लोइस और तेरी माता यूनीके में विघमान था, और मुझे निश्चय है कि वह तुझ में भी है।
6इसी कारण मैं तुझे स्मरण दिलाता हूं कि परमेश्वर के उस वरदान को प्रज्ज्वलित कर दे जो मेरे हाथ रखने के द्वारा तुझे प्राप्त हुआ है।
7परमेश्वर ने हमें भीरुता का नहीं, परन्तु सामर्थ्य, प्रेम और संयम का आत्मा दिया है।
8अतः तू न हमारे प्रभु की साक्षी देने से, न मुझ से, जो उसका बन्दी हूं, लज्जित हो; परन्तु परमेश्वर के सामर्थ्य के अनुसार सुसमाचार के लिए मेरे साथ दुख उठा
9जिसने हमारा उद्धार किया, और पवित्र बुलाहट से बुलाया, हमारे कामों के अनुसार नहीं, परन्तु अपने ही उद्देशय और अनुग्रह के अनुसार जो मसीह यीशु में अनन्तकाल से हम पर हुआ,
10परन्तु अब हमारे उद्धारकर्ता मसीह यीशु के प्रकट हाने के द्वारा प्रकाशित हुआ है, जिसने मृत्यु का नाश किया और सुसमाचार के द्वारा जीवन और अमरता पर प्रकाश डाला।
11इसी के लिए मैं प्रचारक, प्रेरित तथा शिक्षक नियुक्त किया गया।
12और इसी कारण मैं ये सब दुख भी उठाता हूं, फिर भी मैं लज्जित नहीं, क्योंकि मैं जानता हूं कि मैंने किस पर विश्वास किया है, और मुझे पूर्ण निश्चय है कि वह मेरी धरोहर की रखवाली करने में उस दिन तक समर्थ है।
13जो खरे वचन तू ने मुझ से सुने हैं, उनको उस विश्वास और प्रेम में, जो मसीह यीशु में है, अपना आदर्श बनाए रख।
14पवित्र आत्मा के द्वारा, जो हम में निवास करता है, उस उत्तम धरोहर की रखवाली कर।
15तू जानता है कि वे सब जो एशिया में हैं, मुझ से विमुख हो गए हैं, जिनमें फुगिलुस और हिरमुगिनेस है।
16उनेसिफुरुस के कुटुम्ब पर प्रभु की कृपा हो, क्योंकि उसने बहुधा मुझे प्रोत्साहित किया है, और मेरी ज़ंजीरो से लज्जित नहीं हुआ।
17इसके विपरीत, जब वह रोम आया तो उसने बड़े यत्न से ढूंढकर मुझ से भेंट की-
18प्रभु करे कि उस दिन उसे प्रभु की ओर से दया प्राप्त हो-और जो-जो सेवाएं उसने इफिसुस में की हैं, उन्हें तू भली-भांति जानता है।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)