नया नियम · प्रेरितों के काम · अध्याय 3 / 28
प्रेरितों के काम 3
1पतरस और यूहन्ना संध्या को तीन बजे प्रार्थना के समय मन्दिर में जा रहे थे।
2और लोग एक मनुष्य को जो जन्म से लंगड़ा था ले जा रहे थे, जिसे वे प्रतिदिन मन्दिर के उस फाटक पर जो ‘सुन्दर’ कहलाता है, बैठा दिया करते थे कि वह मन्दिर में प्रवेश करने वालों से भिक्षा मांगे।
3जब उसने देखा कि पतरस और यूहन्ना मन्दिर में प्रवेश करने पर हैं तो वह भिक्षा मांगने लगा।
4तब पतरस ने यूहन्ना के साथ उसे एक टक देख कर कहा, ‘‘हमारी ओर देख!”
5वह कुछ पाने की आशा से उनकी ओर ध्यान से देखने लगा।
6तब पतरस ने कहा, ‘‘मेरे पास चाँदी और सोना तो है नहीं, परन्तु जो मेरे पास है वह तुझे देता हूँ-यीशु मसीह नासरी के नाम से चल-फिर!”
7फिर उसने उसका दाहिना हाथ पकड़कर उसे उठाया, और तुरन्त उसके पैरों और टखनों में शक्ति आ गई।
8वह उछलकर खड़ा हो गया और चलने-फिरने लगा। उसने चलते-उछलते और परमेश्वर की स्तुति करते हुए उनके साथ मन्दिर में प्रवेश किया।
9सब लोगों ने उसे चलते-फिरते और परमेश्वर की स्तुति करते हुए देखकर,
10उसे पहिचान लिया कि यह वही है जो मन्दिर के ‘सुन्दर’ फाटक पर बैठकर भिक्षा मांगा करता था, और जो कुछ उसके साथ हुआ था उसे देख कर वे आशचर्य और विस्मय से भर गए।
11जब वह पतरस और यूहन्ना का हाथ पकड़े हुए था तो सब लोग अत्यन्त आशचर्यचकित होकर उस ओसारे में जो सुलैमान का कहलाता है उनके पास दौड़े आए।
12परन्तु जब पतरस ने यह देखा तो उसने लोगों से कहा, “हे इस्राएली लोगो, तुम क्यों आशचर्य करते हो, और हमारी ओर क्यों इस प्रकार ताक रहे हो मानो हमने अपनी सामर्थ और शक्ति से इस मनुष्य को चलने योग्य बना दिया?
13इब्राहीम, इसहाक और याकूब के परमेश्वर, हमारे पूर्वजों के परमेश्वर ने अपने सेवक यीशु को महिमान्वित किया, जिसे तुमने पकड़वा दिया, और जब पिलातुस ने उसे छोड़ देने का निर्णय किया तो तुमने उसके सामने उसे अस्वीकार किया।
14तुमने उस पवित्र और धर्मी को अस्वीकार किया और एक हत्यारे के लिए विनती की कि वह तुम्हारे लिए छोड़ दिया जाए,
15परन्तु जीवन के कर्त्ता को मार डाला, जिसे परमेश्वर ने मृतको में से जिलाया, जिसके हम गवाह है।
16उसी के नाम में-अर्थात उस विश्वास द्वारा जो यीशु के नाम पर है-इस मनुष्य को जिसे तुम जानते और देखते भी हो, बल मिला है। उसी विश्वास ने जो उसके द्वारा है, इसे सब के सामने पूर्ण चंगाई दी है।
17‘‘अब हे भाइयो, मैं जानता हूँ कि तुमने यह काम अज्ञानतावश किया और वैसा ही तुम्हारे अधिकारियों ने भी किया।
18परन्तु जिन बातों को परमेश्वर सब नबियों के मुख से पहिले ही बता दिया था, कि उसका मसीह दुख उठाएगा, उसने इस रीति से पूर्ण किया।
19इसलिए पश्चात्ताप करो और लौट आओ कि तुम्हारे पाप मिटाए जाएं, जिससे कि प्रभु की उपस्थिति से सुख-चैन के दिन आएं,
20और वह यीशु को भेजे जो तुम्हारे लिए मसीह ठहराया गया है,
21और जिसे स्वर्ग में उस समय तक रहना है जब तक कि समस्त वस्तुएं पूर्वावस्था में न आ जाएं जिनकी चर्चा प्राचीनकाल से परमेश्वर ने अपने पवित्र नबियों के मुख से की है।
22मूसा ने कहा, ‘प्रभु परमेश्वर तुम्हारे भाइयों में से तुम्हारे लिए मेरे समान एक नबी खड़ा करेगा। जो कुछ वह तुमसे कहे उस पर ध्यान देना।
23और ऐसा होगा कि प्रत्येक मनुष्य जो उस नबी की बातों पर ध्यान नहीं देगा, लोगों में से पूर्णतः नाश कर दिया जाएगा।’
24और उसी प्रकार शमूएल और उसके पश्चात् आने वाले जितने नबियों ने नबूवत की, उन सब ने इन दिनों की घोजणा की।
25तुम ही तो नबियों की और उस वाचा की सन्तान हो जिसे परमेश्वर ने इब्राहीम से यह कहते हुए तुम्हारे पूर्वजों के साथ बांधी थीः ‘तेरे ही वंश के द्वारा संसार के समस्त कुल आशिज पाएंगे।’
26परमेश्वर ने तुम्हारे लिए अपने सेवक को जिलाकर उसे पहिले तुम्हारे पास भेजा कि तुम में से प्रत्येक को आशिज दे अर्थात् बुराइयों से फेरे।”
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)