पुराना नियम · दानिय्येल · अध्याय 11 / 12
दानिय्येल 11
1“और दारा मादी के राज्य के पहले वर्ष में मैं उसके साथ इसलिए खड़ा हो गया कि उसे हियाव और बल दू।
2और अब मैं तुझको सच्चाई बताता हू। फ़ारस में तीन और राजाओं का उदय होगा। तब उन सभों से अधिक धनी एक चौथा राजा होगा। वह अपने धन के कारण पराक्रमी होते ही सब लोगों को यूनानी राज्य के विरफ़द्ध उभारेगा।
3लेकिन एक पराक्रमी राजा उठेगा और बड़े अधिकार के साथ राज्य करते हुए मनमानी करेगा।
4पर उसके उदय होते ही उसका राज्य छिन्न-भिन्न होकर चारों दिशाओं में बंट जाएगा। यह न तो उसके वंश को मिलेगा और न उसके अधिकार के अनुसार किया जाएगा। क्योंकि उसकी राजसत्ता छीन कर अन्य लोगों को दे दी जाएगी।
5“तब दक्षिण का राजा सामर्थी होगा पर उसके प्रधानों में से एक उससे अधिक बलवान होकर प्रभुत्व प्राप्त करेगा; और उसका राज्य अति महान् होगा।
6और कुछ वर्षों के पश्चात् वे आपस में सन्धि कर लेंगे और दक्षिण के राजा की पुत्री उत्तर के राजा के पास समझौता करने जाएगी। परन्तु इन दोनों का पराक्रम जाता रहेगा और वह स्री उस समय अपने लाने वालों, अपने उत्पन्न करने वाले, और अपने समर्थक सहित त्याग दी जाएगी।
7पर उसके वंश में से एक उठकर उसके स्थान पर विराजमान होगा और उनकी सेना पर आक्रमण करके उत्तर के राजा के किले में प्रवेश करेगा और उनका सामना करके प्रबल होगा,
8और उनके देवताओं और ढली हुई मूर्तियों, और सोने और चांदी के बहुमूल्य पात्रों को लूटकर मिस्र ले जाएगा, इसके बाद वह कुछ वर्षों तक उत्तर के राजा से हाथ रोके रहेगा।
9तब उत्तर का राजा, दक्षिण के राज्य में प्रवेश करेगा, परन्तु अपने देश में लौट आएगा।
10“लेकिन उसके पुत्र अनेक बड़े-बड़े दल एकत्रित करके युद्ध करेंगे और उनमें से एक युद्ध करते हुए प्रबल हो जाएगा और सेना को चीरते हुए उसके किले तक लड़ता चला जाएगा।
11तब दक्षिण का राजा क्रुद्ध होकर निकलेगा और उत्तर के राजा से युद्ध करेगा पर यह राजा लड़ने के लिए एक बड़ी सेना एकत्रित करेगा, जो दक्षिण के राजा के हाथ में कर दी जाएगी।
12जब वह सेना मार भगा दी जाएगी तब उसका हृदय घमंड से फूल उठेगा और वह लाखों लोगों को मरवा डालेगा, फिर भी प्रबल न होगा।
13क्योंकि उत्तर देश का राजा दक्षिण के राजा की अपेक्षा पुनः बड़ी सेना एकत्रित करके, कुछ वर्षों के पश्चात् विशाल सेना और बहुत साज-सामान लेकर चढ़ता हुआ आएगा।
14“और उन दिनों में बहुत से लोग दक्षिण देश के राजा के विरफ़द्ध उठ खड़े होंगे और तेरे लोगों में से भी अनेक उपद्रवी लोग सिर उठाएंगे जिससे कि दर्शन की बात पूरी हो, पर वे ठोकर खाएंगे।
15तब उत्तर देश का राजा आएगा और घेराबन्दी करके सुदृढ़ नगर पर कब्जा कर लेगा और दक्षिण देश की सेना वरन् उनके सर्वश्रेष्ठ दलों के पैर उखड़ जाएंगे। उनमें सामना करने का बल न रहेगा।
16अब इस पर आक्रमण करने वाला अपनी मनमानी करेगा और कोई उसका सामना न कर सकेगा। वह हाथ में विनाश लिए हुए शिरोमणि देश में कुछ समय के लिए रहेगा।
17और वह अपने सम्पूर्ण राज्य की शक्ति सहित आने का दृढ़ निश्चय करेगा और सन्धि का प्रस्ताव रखकर उसे लागू भी करेगा। वह उसके राज्य के पतन के लिए एक युवती देगा, पर यह न तो स्थिर रहेगी और न कोई लाभ पहुंचाएगी।
18तब वह द्वीपों की ओर फिरकर बहुतों को ले लेगा, परन्तु एक सेनापति उसके इस अहंकार को मिटाकर उसका पलटा उसी के ऊपर डाल देगा।
19तब वह अपने देश के किलों की ओर मुंह फेरेगा पर ठोकर खाकर गिरेगा और उसका कोई पता न चलेगा।
20“ तब उसके स्थान में कोई एक उठेगा जो उसके राज्य के शिरोमणि स्थान के बीचों बीच एक अत्याचारी को भेजेगा, परन्तु वह थोड़े ही दिनों में बिना क्रोध या युद्ध के नष्ट हो जाएगा।
21फिर उसके स्थान में एक निकम्मा व्यक्ति उठ खड़ा होगा जिसे राज-पद से सम्मानित न किया गया होगा, परन्तु वह शान्ति के समय में आकर षड्यन्त्र से राज्य प्राप्त कर लेगा।
22बाढ़-सी बढ़ती हुई सेनाएं और वाचा का प्रधान भी उसकी बाढ़ में बहकर नष्ट हो जाएंगे।
23उसके साथ सन्धि हो जाने पर भी वह छल करेगा और आगे बढ़कर थोड़े से लोगों के सहारे प्रबल होगा।
24शान्ति के समय वह प्रान्त के सर्वाेत्तम भाग में प्रवेश करके वह काम करेगा जो उसके पितराें और पूर्वजों ने कभी नहीं किया। वह डकैती और लूट का माल तथा धन उनमें बांट देगा, और कुछ समय तक दृढ़ किलों को लेने की कल्पना करेगा।
25तब वह दक्षिण देश के राजा के विरफ़द्ध एक बड़ी सेना लिए हुए अपने बल और साहस को उभारेगा और दक्षिण देश का राजा एक विशाल और शक्तिशाली सेना लेकर युद्ध तो करेगा, पर अपने विरफ़द्ध किए गए षड्यन्त्रें के कारण वह टिक न सकेगा।
26जो उसी का दिया उत्तम भोजन खाते हैं वे ही उसका विनाश करेंगे और उनकी सेना बाढ़ के समान तो चढ़ेगी पर उसके बहुत लोग मार डाले जाएंगे।
27उन दोनों राजाओं के हृदय बुराई करने में ही लगे रहेंगे और वे एक ही मेज पर बैठे हुए भी एक-दूसरे से झूठ बोलेंगे, पर इससे सपफ़लता नहीं मिलेगी, क्योंकि निर्धारित समय पर अन्त तो आएगा ही।
28तब वह बहुत लूट लिए अपने देश लौट जाएगा, पर उसका मन पवित्र वाचा के विरफ़द्ध लगा रहेगा और वह अपनी इच्छा पूरी करके अपने देश को लौट जाएगा।
29“निर्धारित समय पर वह लौटकर दक्षिण में आएगा, पर इस अन्तिम बार पहले की सी दशा नहीं रहेगी।
30क्योंकि कित्तियों के जहाज उसके विरफ़द्ध चढ़ आएंगे इसलिए वह निराश लौटेगा और पवित्र वाचा पर क्रोधित होकर अपनी इच्छा पूरी करेगा। अतः वह लौटकर पवित्र वाचा के तोड़ने वालों का आदर करेगा।
31और उसकी सेना उठकर पवित्रस्थान के गढ़ को अपवित्र करेगी और नियमित होमबलि को समाप्त कर देगी, और उजाड़ने वाली घृणित वस्तु स्थापित की जाएगी।
32और वह वाचा के विरफ़द्ध चलने वालाेंं की चापलूसी करते हुए उन्हें भक्तिहीन बना देगा, परन्तु जो लोग अपने परमेश्वर को पहचानते हैं, वे सामर्थ्य के कार्य करेंगे।
33लोगों में से जो समझदार हैं वे बहुतों को समझाएंगे, फिर भी वे तलवार से, आग से, बन्धुवाई और लूटमार से बहुत दिनों तक नष्ट होते रहेंंगे।
34और जब यह संकट आएगा तब उनको थोड़ी-सी सहायता तो मिलेगी, परन्तु अनेक लोग पाखंड करके उनसे मिल जाएंगे।
35और समझदारों में से कुछ तो इसलिए ठोकर खाएंगे कि वे जांचे जाकर अन्त के समय तक निर्मल और शुद्ध किए जाएं, क्योंकि नियत समय पर यह तो आएगा ही।
36“तब राजा मनमानी करते हुए अपने आपको सब देवताओं से अधिक ऊंचा और महान् ठहराएगा, और ईश्वरों के ईश्वर के विरफ़द्ध निन्दा की बातें कहेगा, और जब तक परमेश्वर का क्रोध शान्त नहीं हो जाता तब तक उस राजा को सफलता मिलती रहेगी, क्योंकि जो ठहराया गया है वह पूरा होगा ही।
37और न तो अपने पूर्वजों के ईश्वरों पर और न स्रियों की लालसा पर ध्यान देगा। वह अपने आपको सबसे बड़ा बनाकर दूसरे देवता की परवाह न करेगा,
38पर इसके स्थान पर वह गढ़ों ही के देवता का जिसे उसके पूर्वज नहीं जानते थे, आदर करेगा इसका तो वह सोना, चांदी, बहुमूल्य मणियों और कीमती वस्तुएं चढ़ाकर आदर करेगा।
39वह पराए देवता की सहायता से दृढ़ गढ़ों पर चढ़ाई करेगा; जो उसको स्वीकार करेगा उसका वह बड़ा आदर करते हुए उसे बहुतों पर प्रधान ठहराएगा और अपने लाभ के लिए देश को बांट देगा।
40“अन्त के दिनों में दक्षिण का राजा उससे टकराएगा, पर उत्तर देश का राजा रथों, सवारों और जहाजों को साथ लेकर उस पर तूफानी हमला बोल देगा। इस प्रकार वह अनेक देशों पर चढ़ाई करेगा और उन्हें बाढ़ के समान निगल कर आगे बढ़ जाएगा।
41वह शिरोमणि देश में भी प्रवेश करेगा, और बहुत से देशों का पतन हो जाएगा परन्तु एदोम, मोआब और अम्मोनियों के देश के सामने वाले भाग उसके हाथ से छुड़ा लिए जाएंगे।
42तब वह अपना हाथ अन्य देशों की ओर बढ़ाएगा, और मिस्र देश भी बच नहीं पाएगा।
43और वह मिस्र के सोने-चांदी के ख़जानों और सब बहुमूल्य वस्तुआें पर अधिकार कर लेगा, और लीबिया तथा इथियोपिया उसके पद-चिह्नों पर चलेंगे।
44परन्तु पूर्व और उत्तर की अफवाहों से घबराकर वह बड़ी जलजलाहट से बहुतों को उजाड़ने और सर्वनाश करने निकल पड़ेगा।
45और वह अपने राजसी मंडप के पल्ले, समुद्र और शिरोमणि पवित्र पर्वत के बीच खड़े करेगा परन्तु जब उसका अन्त आएगा तब उसका कोई सहायक न रहेगा।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)