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पुराना नियम · व्यवस्थाविवरण · अध्याय 19 / 34

व्यवस्थाविवरण 19

1“जब तेरा परमेश्वर यहोवा उन जातियों को नष्ट करे जिनका देश वह तुझे देता है, और जब तू उनको निकाल बाहर करे तथा उनके नगरों और उनके घरों में बस जाए,

2तब तू अपने लिए तीन नगर उस देश के बीच अलग करना जिसको तेरा परमेश्वर यहोवा अधिकार में करने के लिए तुझे देता है।

3तू अपने लिए मार्ग बनाना, और जो देश तेरा परमेश्वर यहोवा तुझे उत्तराधिकार में दे रहा है उसको तीन भागों में विभाजित करना कि कोई भी हत्यारा भागकर उनमें शरण ले सके।

4“इस प्रकार का हत्यारा वहां भाग कर रह सकता हैः ऐसा हत्यारा जिसने अपने मित्र को अनजाने में अर्थात् पहले से बैर रखे बिना मार डाला हो।

5मानो कोई अपने मित्र के साथ लकड़ी काटने जंगल में जाए और कुल्हाड़ी हाथ में लेकर पेड़ काटने लगे, और बेंट में से कुल्हाड़ी निकलकर उसके मित्र को ऐसी चोट पहुंचाए कि वह मर जाए तो ऐसा व्यक्ति उन नगरों में से किसी एक में भाग कर वहीं रहे,

6कहीं ऐसा न हो कि लहू का बदला लेने वाला क्रोधाग्नि में हत्यारे का पीछा करे, और मार्ग लम्बा होने के कारण उसे जा पकड़े तथा उसका प्राण ले ले, जबकि वह प्राण-दण्ड के योग्य न था क्योंकि वह पहले से उससे बैर नहीं रखता था।

7इसलिए, मैं तुझे यह आज्ञा देता हूं कि तू अपने लिए तीन नगर अलग कर रखना।

8यदि तेरा परमेश्वर यहोवा तेरी सीमाओं को उस शपथ के अनुसार बढ़ाए जो उसने तेरे पूर्वजों से खाई थी, और वह सम्पूर्ण देश तुझे दे दे जिसे देने के लिए उसने तेरे पूर्वजों से कहा था-

9यदि तुम इन सब आज्ञाओं को जिन्हें मैं तुम्हें आज सुनाता हूं पालन करने अर्थात् अपने परमेश्वर यहोवा से प्रेम करने तथा उसके मार्गों पर सदा चलने के लिए ध्यान रखो तो उन तीन नगरों के अतिरिक्त तीन और नगर जोड़ लेना;

10जिससे कि तेरे इस देश में जिसे तेरा परमेश्वर यहोवा तुझे उत्तराधिकार में देता है, किसी निर्दोष का लहू न बहाया जाए और तुझ पर लहू बहाने का दोष न लगे।

11“परन्तु यदि कोई ऐसा हो जो अपने पड़ोसी से बैर रखता हो और वह उसके लिए घात लगाए, और उसके विरफ़द्ध उठकर उस पर ऐसा प्रहार करे कि वह मर जाए, फिर वह इन नगरों में से किसी नगर में भाग जाए,

12तो उसके नगर के प्राचीन किसी को भेजें कि वह उसे वहां से पकड़ ले आए तब वे उसे लहू का बदला लेने वाले के हाथ सौंप दें कि वह मार डाला जाए।

13तू उस पर दया-दृष्टि न करना परन्तु इस्राएल में से निर्दोष के लहू को धो डालना जिससे तेरा भला हो।

14“जो देश तेरा परमेश्वर यहोवा तुझे अधिकार में करने के लिए दे रहा है उसमें तेरा जो निज भाग हो उसमें तू अपने पड़ोसी के सीमा-चिह्न को मत हटाना जिसे तेरे पूर्वजों ने निर्धारित किया है।

15“किसी मनुष्य के विरफ़द्ध किसी अधर्म या पाप के विषय में जो उसने किया एक ही व्यक्ति की साक्षी न सुनी जाए। दो या तीन व्यक्तियों की साक्षी पर ही बात प्रमाणित ठहरे।

16यदि कोई गवाह द्वेष के कारण किसी मनुष्य के विरफ़द्ध उसके अपराधी होने की साक्षी दे,

17तो वे दोनों व्यक्ति, जिनके मध्य विवाद है, यहोवा के सम्मुख अर्थात् नियुक्त किए हुए याजकों और न्यायियों के सामने उपस्थित हो।

18तब न्यायी पूरी-पूरी जांच पड़ताल करें, और यदि गवाह झूठा हो, और उसने अपने भाई के विरफ़द्ध झूठी साक्षी दी हो

19तो तुम उसके साथ वैसा ही करना जैसा उसने अपने भाई के प्रति करने का विचार किया था। इस प्रकार अपने बीच में से ऐसी बुराई को मिटा डालना।

20तब लोग सुनकर डरेंगे और तेरे बीच ऐसा बुरा काम फिर कभी नहीं करेंगे।

21ऐसे व्यक्ति पर दयादृष्टि न करनाः प्राण के बदले प्राण, आंख के बदले आंख, दांत के बदले दांत, हाथ के बदले हाथ, पैर के बदले पैर लिया जाए।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)