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पुराना नियम · व्यवस्थाविवरण · अध्याय 20 / 34

व्यवस्थाविवरण 20

1“जब तू अपने शत्रुओं के विरफ़द्ध युद्ध करने को निकले और अपने से अधिक घोड़े, रथ और सेना देखे तो उनसे मत डरना क्योंकि तेरा परमेश्वर यहोवा जो तुझे मिस्र देश से निकाल लाया वह तेरे साथ है।

2फिर ऐसा हो कि जब तुम आक्रमण करने पर हो तब याजक आकर सेना से बात करे।

3वह उनसे कहे, ‘हे इस्राएल सुन! आज तुम लोग अपने शत्रुओं से युद्ध करने जा रहे हो। तुम्हारा मन कच्चा न हो। भयभीत न हो और उनके सामने न तो आतंकित होओ न थरथराओ।

4क्योंकि तुम्हारा परमेश्वर यहोवा तुम्हारे शत्रुओं से युद्ध करने और तुम्हें बचाने के लिए तुम्हारे संग-संग चलता है।’

5फिर सेनाधिकारी भी उनसे कहें, ‘क्या कोई ऐसा है जिसने नया घर बनाया और उसका अर्पण नहीं किया? वह अपने घर चला जाए, कहीं ऐसा न हो कि वह युद्ध में मारा जाए और अन्य कोई उसके बदले घर का अर्पण करे।

6क्या कोई ऐसा है जिसने दाख की बारी लगाई और उसका फल नहीं चखा? वह भी अपने घर चला जाए, कहीं ऐसा न हो कि वह युद्ध में मारा जाए, और अन्य कोई उसके बदले फल चखे।

7क्या कोई ऐसा है जिसने किसी स्री से मंगनी तो की है परन्तु विवाह नहीं किया? वह भी अपने घर को चला जाए, कहीं ऐसा न हो कि वह युद्ध में मारा जाए और अन्य कोई उस स्री को ब्याह ले।

8फिर सेनाधिकारी योद्धाओं से यह भी कहे, ‘क्या कोई ऐसा है जो डरपोक और कच्चे मन का है वह भी अपने घर को चला जाए कहीं ऐसा न हो कि उसके कारण उसके भाइयों का भी साहस टूट जाए।’

9फिर ऐसा हो कि जब सेनाधिकारी बोलना समाप्त कर चुकें तो वे सेना के अन्य अधिकारियों की नियुक्ति करे।

10“जब तू किसी नगर के विरफ़द्ध युद्ध करने जाए तो पहले उसके सामने सन्धि-प्रस्ताव रखना।

11फिर ऐसा हो कि यदि वह तेरे साथ सन्धि करना चाहे और तेरे लिए फाटक खोल दे तो उसमें जितने लोग पाए जाएं वे सब तेरे लिए बेगार करने वाले ठहरें और तेरी सेवा करे।

12परन्तु यदि वह सन्धि करना न चाहे और तुझसे युद्ध करने निकले तो तू उसे घेर लेना।

13जब तेरा परमेश्वर यहोवा उसे तेरे हाथ में कर दे तो तू उसके सब पुरफ़षों को तलवार के घाट उतार देना।

14केवल स्रियाेंं, बच्चों, पशुओं और जो कुछ उस नगर में हो अर्थात् उसकी सारी सम्पत्ति को अपनी लूट के रूप में रख लेना और तेरा परमेश्वर यहोवा तेरे शत्रुओं की जो सम्पत्ति तुझे देगा उसे तू रख लेना।

15ऐसा तू उन सब नगरों से करना जो तुझसे बहुत दूर हों और जो यहां की जातियों में से न हो।

16केवल उन लोगों के नगरों में जिन्हें तेरा परमेश्वर यहोवा तुझे उत्तराधिकार में देता है, तू किसी प्राणी को जीवित न छोड़ना।

17परन्तु उनको पूर्णतः नष्ट करना अर्थात् हित्तियों, एमोरियों, कनानियों, परिज्जियों, हिव्वियों तथा यबूसियों को, क्योंकि तेरे परमेश्वर यहोवा ने तुझको यही आज्ञा दी है,

18जिससे कि वे अपने उन सब घृणित कार्यों के अनुसार सिखाने न पाएं जो उन्होंने अपने देवताओं के लिए किए हैं, कहीं तुम भी अपने परमेश्वर यहोवा के विरफ़द्ध पाप न करने लगो।

19“जब तू युद्ध करके किसी नगर को अधिकार में करने के लिए बहुत दिनों तक घेरा डाले रहे तो तू उसके वृक्षों को कुल्हाड़ी से मत काटना क्योंकि उनके फल तेरे खाने के काम आएंगे। तू उनको काटकर नष्ट न करना। क्या मैदान का वृक्ष मनुष्य है कि तू उस पर घेरा डाले?

20केवल उन्हीं वृक्षों को काटकर नष्ट करना जिनके विषय में तू जानता है कि वे फल के वृक्ष नहीं, किन्तु उस नगर के विरफ़द्ध जो तुझसे युद्ध कर रहा है तब तक घेराबन्दी किए रह जब तक वह तेरे अधीन न हो जाए।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)