पुराना नियम · व्यवस्थाविवरण · अध्याय 7 / 34
व्यवस्थाविवरण 7
1“जब तेरा परमेश्वर यहोवा तुझे उस देश में जिसको अधिकार में करने के लिए तू वहां प्रवेश करने पर है, पहुँचा दे, और बहुत-सी जातियों को, अर्थात् हित्तियों, गिर्गाशियों, एमोरियों, कनानियों, परज्जियों, हिव्वियों तथा यमूसियों नामक इन सातों जातियों को जो तुमसे बड़ी और सामर्थी हैं तेरे सामने से निकाल दे,
2तथा जब तेरा परमेश्वर यहोवा उनको तेरे सामने तेरे हाथ में कर दे, और तू उन्हें पराजित कर दे, तब तू उनको पूर्णतः नष्ट कर डालना। तू उनसे कोई वाचा न बांधना, और न उन पर कुछ दया करना।
3फिर तू उनके साथ अन्तर्विवाह मत करना, तू न तो अपनी पुत्रियां अपने पुत्रों के लिए लेना।
4क्योंकि ये तेरे पुत्रों को मेरा अनुसरण करने से बहका देंगी कि वे पराए देवताओं की उपासना करें; तब यहोवा का क्रोध तेरे विरफ़द्ध भड़क उठेगा और वह तुझे शीघ्र नष्ट कर डालेगा।
5तू उनके साथ ऐसा करनाः उनकी वेदियों को ढा देना, उनके स्तम्भों को चूर-चूर कर देना, उनकी अशेराओं को काट डालना, तथा उनकी गढ़ी हुई मूर्तियों को आग में भस्म कर देना।
6“तू अपने परमेश्वर यहोवा के लिए पवित्र प्रजा है; तेरे परमेश्वर यहोवा ने तुझे निज प्रजा होने के लिए पृथ्वी भर की सब जातियों में से चुना है।
7यहोवा ने तुझसे जो प्रेम किया और तुझको चुना वह इसलिए नहीं कि तू अन्य सब जातियों के लोगों से संख्या में अधिक था, क्योंकि तू तो समस्त जातियों में सबसे कम था,
8परन्तु यहोवा ने तुझसे प्रेम किया और उस शपथ को पूरा किया जो उसने तेरे पूर्वजों से खाई थी, इसलिए यहोवा तुझे अपने सामर्थी हाथ से निकाल लाया तथा दासत्व के घर अर्थात् मिस्र के राजा फि़रौन के हाथ से छुड़ा ले आया।
9इसलिए जान ले कि तेरा परमेश्वर यहोवा ही परमेश्वर है, वह विश्वसनीय परमेश्वर है और जो उससे प्रेम करते तथा उसकी आज्ञाओं को मानते हैं, उनके साथ वह अपनी वाचा को पूरी करता और उन पर हजार पीढ़ी तक करफ़णा करता रहता है;
10परन्तु जो उससे बैर रखते हैं, उनको वह उनके देखते-देखते बदला देगा कि उनको नष्ट कर डाले। वह अपने बैरियों के प्रति विलम्ब नहीं करता, पर उनके देखते-देखते उन्हें बदला देता है।
11इसलिए जिन आज्ञाओं, विधियों तथा नियमों की आज्ञा मैं आज तुम्हें देता हूं उन्हें मानने में चौकसी करना।
12“जब तू इन नियमों पर ध्यान देगा तथा इनको मानकर पालन करेगा तो ऐसा होगा कि तेरा परमेश्वर यहोवा अपनी उस वाचा तथा करफ़णा को तेरे प्रति बनाए रखेगा जिसकी शपथ उसने तेरे पूर्वजों से खाई थी।
13और वह तुझसे प्रेम करेगा, तुझे आशीष देगा तथा तुझे बढ़ाएगा। जो देश तुझे देने की शपथ उसने तेरे पूर्वजों से खाई थी उसमें वह तेरे गर्भ के फल, तेरी भूमि के फल, तेरे अन्न, तेरे नए दाखरस, तेरे तेल पर आशीष देगा और तेरे मवेशियों तथा तेरे रेवड़ के बच्चों को बढ़ाएगा।
14तू सब जातियों से अधिक आशीषित होगा। चाहे मनुष्य हो या पशु, चाहे नर हो या मादा, तेरे बीच कोई बांझ न रहेगा।
15और यहोवा तुझसे सब रोगों को दूर करेगा, और मिस्र के किसी भी बुरे रोग को जिसे तू जानता है तुझ पर आने नहीं देगा, परन्तु वह इन रोगों को तेरे बैरियों पर डालेगा।
16तू उन सब जातियों को नष्ट कर देना जिनको तेरा परमेश्वर यहोवा तेरे हाथ में कर देगा। तू उन पर दया-दृष्टि न करना, न उनके देवताओं की उपासना करना, क्योंकि यह तेरे लिए फन्दा बनेगा।
17“यदि तू अपने मन में कहे कि ये जातियां मुझसे सामर्थी हैं, मैं इन्हें कैसे खदेड़ सकता हूं?
18तू उनसे मत डरना, वरन् स्मरण करना कि तेरे परमेश्वर यहोवा ने फि़रौन तथा सम्पूर्ण मिस्र के साथ क्या किया था
19अर्थात् उन बड़ी-बड़ी विपत्तियों को जिनको तूने अपनी आंखों से देखा, और उन चिह्नों और चमत्कारों को, तथा उस सामर्थी हाथ और बढ़ाई हुई भुजा को जिसके द्वारा तेरा परमेश्वर यहोवा उन सब जातियों से भी जिनसे तू डरता है ऐसा ही करेगा।
20इसके अतिरिक्त, तेरा परमेश्वर यहोवा उनके विरफ़द्ध तब तक बर्रोर्ं को भेजेगा जब तक कि वे जो बच गए हों और तुझसे छिपे हों नष्ट न हो जाए।
21तू उनसे भयभीत न होना क्योंकि तेरा परमेश्वर यहोवा जो तेरे मध्य है वह महान् और भय योग्य परमेश्वर है।
22तेरा परमेश्वर यहोवा इन जातियों को तेरे सामने से धीरे-धीरे उखाड़ फेंकेगा, तू उनको शीघ्र समाप्त नहीं कर सकेगा, ऐसा न हो कि वनपशु बहुत अधिक बढ़कर तुझे हानि पहुँचाए।
23परन्तु तेरा परमेश्वर यहोवा उनको तेरे हाथ में कर देगा, तथा जब तक वे नष्ट न हो जाएं तब तक उन्हें व्याकुल किए रहेगा।
24वह उनके राजाओं को तेरे हाथ में ऐसे कर देगा कि तू उनका नाम पृथ्वी पर से मिटा दे। कोई मनुष्य तेरे सामने ठहर नहीं सकेगा। जब तक तू उन्हें मिटा न दे।
25उनके देवताओं की खुदी हुई मूर्तियां तुम आग में भस्म कर देना; तू उन पर मढ़े हुए सोना-चांदी का लोभ न करना, न उनको निकाल कर अपने लिए रखना, ऐसा न हो कि तू उसके द्वारा फन्दे में पड़े। क्योंकि यह तेरे परमेश्वर यहोवा के लिए घृणित है।
26तू किसी घृणित वस्तु को अपने घर में न लाना और न उसके समान शापित बन जाना। तू उसका पूर्णतः बहिष्कार करना और उससे पूर्णतः घृणा करना, क्योंकि वह शापित है।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)