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इफिसियों 4:32

एक दूसरे के प्रति दयालु और करफ़णामय बनो, और परमेश्वर ने मसीह में जैसे तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी एक दूसरे के अपराध क्षमा करो।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)

संदर्भ: इफिसियों 4

29कोई अशलील बात तुम्हारे मुंह से न निकले, परन्तु केवल ऐसी बात निकले जो उस समय की आवश्यकता के अनुसार उन्नति के लिए उत्तम हो, जिससे कि सुनने वालों पर अनुग्रह हो।

30परमेश्वर के पवित्र आत्मा को -शोकित मत करो, जिस से तुम पर छुटकारे के दिन के लिए छाप दी गई है।

31सब प्रकार की कड़ुवाहट, रोज, क्रोध, कलह और निन्दा, सब प्रकार के बैर-भाव सहित तुम से दूर किए जाए।

32एक दूसरे के प्रति दयालु और करफ़णामय बनो, और परमेश्वर ने मसीह में जैसे तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी एक दूसरे के अपराध क्षमा करो।

पूरा अध्याय पढ़ें: इफिसियों 4

संबंधित पद

  • कुलुस्सियों 3:12–13

    अतः परमेश्वर के उन चुने हुओं के सदृश जो पवित्र और प्रिय हैं, अपने हृदय में सहानुभूति, करुणा, दीनता, विनम्रता और सहनशीलता धारण करो।

  • मत्ती 6:14–15

    यदि तुम मनुष्यों के अपराध क्षमा करोगे तो तुम्हारा स्वर्गीय पिता भी तुम्हें क्षमा करेगा।

  • मरकुस 11:25

    और जब कभी तुम खड़े होकर प्रार्थना करो तो यदि तुम्हारे मन में किसी के प्रति कुछ विरोध है तो क्षमा करो, जिससे कि तुम्हारा पिता जो स्वर्ग में है तुम्हारे भी अपराध क्षमा करे।

  • 1 पतरस 3:8–9

    अन्ततः सब के सब एक मन, कृपालु, भाइयों से प्रेम करने वाले, दयालु और नम्र बनो।

  • 2 कुरिन्थियों 2:10

    परन्तु जिसे तुम किसी बात में क्षमा करते हो उसे मैं भी क्षमा करता हूं, क्योंकि वास्तव में मैंने जो कुछ क्षमा किया है-यदि मुझे कुछ क्षमा करने को था-मसीह की उपस्थिति में तुम्हारे कारण किया है,

  • इफिसियों 5:1

    इसलिए प्रिय बालकों के सदृश परमेश्वर का अनुकरण करने वाले बनो,

Cross-references ranked with OpenBible.info data (CC BY).