पुराना नियम · निर्गमन · अध्याय 1 / 40
निर्गमन 1
1इस्राएल के पुत्रों के नाम, जो अपने-अपने घराने सहित याकूब के साथ मिस्र में आए, ये हैं:
2रूबेन, शमौन, लेवी, और यहूदा;
3इस्साकार, जबूलून, और बिन्यामीन;
4दान, नप्ताली, गाद, और आशेर।
5याकूब के वंशज कुल सत्तर थे। यूसुफ तो पहले से ही मिस्र में था।
6और यूसुफ और उसके सब भाई और उस पीढ़ी के सब लोग मर मिटे।
7परन्तु इस्राएल के वंशज फूलते-फलते और संख्या में अधिक बढ़ते गए, और फैलकर अति सामर्थी हो गए जिससे समस्त देश उनसे भर गया।
8तब मिस्र में एक नया राजा राज्य करने लगा, जो यूसुफ को नहीं जानता था।
9उसने अपनी प्रजा से कहा, “देखो, इस्राएली संख्या में हमसे अधिक, और समर्थी हो गए है।
10आओ, हम उनके साथ बुद्धिमानी से व्यवहार करें, कहीं ऐसा न हो कि वे बहुत बढ़ जाएं और युद्ध छिड़ जाने पर वे हमारे शत्रुओं से जा मिलें और हमसे लड़कर देश से निकल जाए।”
11इसलिए उन्होंने उनके ऊपर बेगारी करानेवालों को नियुक्त किया कि वे उनसे कठोर परिश्रम कराकर उन्हें कष्ट दिया करे। उन्होंने फि़रौन के लिए पितोम और रामसेस भण्डारागार-नगरों को बनाया।
12परन्तु जितना अधिक वे उनको कष्ट देते गए, उतना ही अधिक वे बढ़ते और फैलते चले गए; अतः वे इस्राएलियों से अत्यधिक डर गए।
13और मिस्रियों ने इस्राएलियों को कठोर परिश्रम करने के लिए विवश किया।
14उन्होंने गारा और ईंट बनवा-बनवाकर, तथा खेती का सब प्रकार का काम ले लेकर, उनके जीवन को कटुता से भर दिया। वे उनसे जो भी काम करवाते थे, क्रूरता से करवाते थे।
15तब मिस्र के राजा ने इब्रानी दाइयों से, जिनमें एक का नाम शिप्रा और दूसरी का पूआ था, बातें की।
16उसने कहा, “जब तुम इब्रानी स्त्रियों की जच्चा के समय सहायता करो और उन्हें प्रसव के पत्थर पर बैठी देखो, तब यदि बेटा हो तो तुम उसे मार डालना, परन्तु यदि बेटी हो तो उसे जीवित छोड़ देना।”
17परन्तु वे दाइयां परमेश्वर का भय मानती थीं इस कारण मिस्र के राजा के आज्ञानुसार नहीं किया, परन्तु बेटों को भी जीवित छोड़ देती थी।
18अतः मिस्र के राजा ने उन दाइयों को बुलवाकर उनसे पूछा, “तुमने ऐसा क्यों किया कि इन लड़कों को जीवित छोड़ दिया?”
19दाइयों ने फि़रौन से कहा, “इब्रानी स्त्रियां मिस्री स्त्रियों के समान नहीं हैं; क्योंकि वे तो इतनी हृष्ट-पुष्ट हैं कि दाइयों के पहुंचने से पहले ही बच्चे को जन्म दे चुकती है।”
20अतः दाइयों के प्रति परमेश्वर दयालु था, और वे लोग बढ़कर अत्यधिक सामर्थी हो गए।
21और इसलिए कि दाइयां परमेश्वर का भय मानती थीं, उसने उनके भी घर बसा दिए।
22तब फि़रौन ने अपनी समस्त प्रजा को यह कहकर आज्ञा दी, “उनके जितने बेटे उत्पन्न हों, तुम उन्हें नील नदी में फेंक देना, और सब बेटियों को जीवित छोड़ देना।”
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)