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पुराना नियम · निर्गमन · अध्याय 2 / 40

निर्गमन 2

1लेवी के घराने के एक पुरुष ने लेवी वंश की एक स्त्री से विवाह कर लिया।

2वह स्त्री गर्भवती हुई और उसके एक पुत्र उत्पन्न हुआ। जब उसने देखा कि बालक सुन्दर है तो उसने उसे तीन महीनों तक छिपा रखा।

3जब वह उसे और अधिक छिपा न सकी तो उसने उसके लिए सरकण्डों की एक टोकरी ली और उस पर चिकनी मिट्टी और राल लगाई। फिर वह उस बालक को उसमें रखकर नील नदी के किनारे सरकण्डों के बीच छोड़ आई।

4और बालक की बहन दूर खड़ी होकर देखती रही कि उसका क्या हाल होगा।

5तब फि़रौन की बेटी नहाने के लिए अपनी सखियों के साथ टहलती हुई नील नदी के किनारे आई। और उसने सरकण्डों के बीच टोकरी को देख कर अपनी दासी को भेजा कि उसे उठा ले आए। वह उसे उसके पास ले आई।

6जब उसने उसे खोला तो उस बच्चे को देखा और देखो, वह बालक रो रहा था। उसने उस पर तरस खाकर कहा, “यह किसी इब्री का बच्चा है।”

7तब उस बच्चे की बहन ने फि़रौन की बेटी से कहा, “क्या मैं जाकर इब्रानी स्त्रियों में से किसी दाई को तेरे लिए बुला लाऊं कि वह तेरे लिए बच्चे को दूध पिलाए?”

8फि़रौन की बेटी ने उससे कहा, “बुला ला।” तब लड़की जाकर बालक की माता को बुला लाई।

9फि़रौन की बेटी ने उससे कहा, “तू इस बालक को ले जाकर मेरे लिए दूध पिलाया कर, और मैं तुझे मजदूरी दूंगी।” तब वह स्त्री उस बालक को ले जाकर दूध पिलाने लगी।

10जब बालक कुछ बड़ा हुआ तब वह उसे फि़रौन की बेटी के पास ले आई और वह उसका पुत्र ठहरा और उसने यह कहकर उसका नाम मूसा रखा कि मैंने उसे पानी में से निकाला था।

11फिर ऐसा हुआ कि जब मूसा जवान हो गया तो उसने अपने भाई-बन्धुओं के पास जाकर उनके कठोर परिश्रम पर ध्यान दिया और देखा कि मेरे एक इब्रानी भाई को एक मिस्री पीट रहा है।

12जब उसने इधर-उधर दृष्टि डाली और देखा कि आसपास कोई नहीं है, तो उसने उस मिस्री को मार डाला और उसे बालू में छिपा दिया।

13फिर दूसरे दिन बाहर जाकर उसने दो इब्रानियों को आपस में लड़ते देखा। उसने दोषी व्यक्ति से पूछा, “तू अपने साथी को क्यों मार रहा है?”

14उसने कहा, “किसने तुझे हम लागों पर शासक और न्यायी ठहराया है? क्या जिस प्रकार तू ने मिस्री कोे मार डाला उसी प्रकार मुझे भी मार डालना चाहता है?” तब मूसा डर गया। उसने सोचा, “निश्चय, वह बात खुल गई है।”

15जब फि़रौन ने यह बात सुनी तो उसने मूसा को मार डालना चाहा। परन्तु मूसा फि़रौन के सामने से भागकर मिघान देश में जा पहुंचा, और वहां वह एक कुएं के पास जाकर बैठ गया।

16मिघान के याजक की सात बेटियां थीं, और वे वहां जल भरने आई। उन्होंने अपने कठौते भरे कि अपने पिता की भेड़-बकरियों को पिलाए।

17तब चरवाहे आकर उनको भगाने लगे, परन्तु मूसा खड़ा हो गया, उसने उनकी सहायता की और उनकी भेड़-बकरियों को पानी पिलाया।

18जब वे अपने पिता रूएल के पास लौटीं तो उसने पूछा, “आज तुम इतनी जल्दी कैसे आ गईं?”

19अतः उन्होंने कहा, “एक मिस्री पुरुष ने हमको चरवाहों के हाथ से बचाया, इससे भी कहीं अधिक उसने हमारे लिए जल भरकर भेड़-बकरियों को पिलाया।”

20तब उसने अपनी बेटियों से पूछा, “वह कहां है? तुम उसे क्यों छोड़ आई हो ? उसे बुला लाओ कि वह भोजन करे।”

21तब मूसा रूएल के साथ रहने को तैयार हो गया। और उस पुरुष ने मूसा को अपनी बेटी सिप्पोरा ब्याह दी।

22तब उस स्त्री ने एक पुत्र को जन्म दिया और मूसा ने यह कहकर उसका नाम गेर्शोम रखा, “मैं तो अन्य देश में एक परदेशी हूं।”

23बहुत दिनों के बीतने पर मिस्र का राजा मर गया। इस्राएली लोग बन्धुवाई के कारण आहें भर-भर के पुकार उठे, और जो दुहाई उन्होंने बन्धुवाई के कारण दी, वह परमेश्वर तक पहुंची।

24अतः परमेश्वर ने उनका कराहना सुना और परमेश्वर ने इब्राहीम, इसहाक, और याकूब के साथ बांधी गई अपनी वाचा को स्मरण किया।

25और परमेश्वर ने इस्राएलियों पर दृष्टि करके उनकी सुधि ली।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)