पुराना नियम · निर्गमन · अध्याय 3 / 40
निर्गमन 3
1मूसा अपने ससुर यित्रे नामक, मिघान के याजक की भेड़-बकरियां चरा रहा था, और वह भेड़-बकरियों को जंगल की पश्चिमी छोर पर ले गया और परमेश्वर के होरेब पर्वत पर जा पहुंचा।
2तब यहोवा के दूत ने झाड़ी में से उठती हुई आग की एक लपट में उसको दर्शन दिया। उसने दृष्टि की, और देखो, झाड़ी जल तो रही है, पर भस्म नहीं होती।
3अतः मूसा ने कहा, “मैं उधर मुड़कर इस अद्भुत दृश्य को अवश्य देखूंगा-यह झाड़ी भस्म क्यों नहीं होती।”
4जब यहोवा ने देखा कि वह देखने के लिए मुड़कर चला आ रहा है, तो परमेश्वर ने उसे झाड़ी के बीच में से पुकारा और कहा, “मूसा, हे मूसा!” और उसने कहा, “मैं यहां हू।”
5तब यहोवा ने कहा, “तू और निकट मत आ। अपने पैर से जूतियां उतार दे, क्योंकि तू जिस स्थान पर खड़ा है, वह पवित्र भूमि है।”
6फिर उसने कहा, “मैं तेरे पिता का परमेश्वर, इब्राहीम का परमेश्वर, इसहाक का परमेश्वर, और याकूब का परमेश्वर हू।” तब मूसा ने अपना मुंह छिपा लिया, क्योंकि वह परमेश्वर की ओर दृष्टि करने से डरता था।
7और यहोवा ने कहा, “निश्चय मैंने मिस्र में रहने वाली अपनी प्रजा की पीड़ा को देखा है, और उनसे बेगार कराने वालों के कारण उनकी पुकार पर ध्यान दिया है, क्योंकि मैं उनके दुखों को जानता हू।
8अतः मैं उतर आया हूं कि उनको मिस्रियों के हाथ से छुड़ाऊं और उस देश में से निकाल कर एक अच्छे और विस्तृत देश में पहुंचाऊं, अर्थात् एक ऐसे देश में जिसमें दूध और मधु की धाराएं बहती हैं, जो कनानियों, हित्तियों, एमोरियों, परिज्जियों, हिव्वियों, और यबूसियों का देश है।
9अब देख, इस्राएलियों का कराहना मुझ तक आ पहुंचा है, फिर मैंने यह भी देखा है कि किस प्रकार मिस्री उन पर अत्याचार कर रहे है।
10इसलिए अब आ, मैं तुझे फि़रौन के पास भेजूंगा, जिससे कि तू मेरी प्रजा अर्थात् इस्राएलियों को मिस्र से निकाल ले आए।”
11परन्तु मूसा ने परमेश्वर से कहा, “मैं कौन हूं जो फि़रौन के पास जाऊं और इस्राएलियों को मिस्र से निकाल ले आऊं?”
12उसने उत्तर दिया, “निश्चय ही मैं तेरे साथ रहूंगा, और तेरा भेजने वाला मैं ही हू। इसका यह चिह्न होगा कि जब तू उन लोगों को मिस्र से निकाल चुकेगा तो तुम इसी पर्वत पर परमेश्वर की अराधना करोगे।”
13तब मूसा ने परमेश्वर से कहा, “देख यदि मैं इस्राएलियों के पास जाकर उनसे कहूं, ‘तुम्हारे पूर्वजों के परमेश्वर ने मुझे तुम्हारे पास भेजा है,’ और वे मुझसे पूछें, ‘उसका क्या नाम है?’ तो मैं उनको क्या उत्तर दूं?”
14परमेश्वर ने मूसा से कहा, “मैं जो हूं सो हू।” और उसने कहा, “इस्राएलियों से तू इस प्रकार कहनाः ‘मैं हूं’ ने मुझे तुम्हारे पास भेजा है।”
15तब परमेश्वर ने मूसा से यह भी कहा, “तू इस्राएलियों से इस प्रकार कहनाः ‘तुम्हारे पूर्वजों के परमेश्वर अर्थात् इब्राहीम के परमेश्वर, इसहाक के परमेश्वर, और याकूब के परमेश्वर यहोवा ने मुझे तुम्हारे पास भेजा है।’ अनन्तकाल के लिए यही मेरा नाम है और मुझे पीढ़ी-दर-पीढ़ी इसी नाम से स्मरण किया जाता रहेगा।
16जा, और इस्राएल के पुरनियों को एकत्रित करके उनसे कह, ‘तुम्हारे पूर्वजों के परमेश्वर अर्थात् इब्राहीम, इसहाक, और याकूब के परमेश्वर यहोवा ने मुझे दर्शन देकर यह कहा हैः “निश्चय, मैंने तुम पर और मिस्र में जो कुछ तुम्हारे साथ हुआ है उस पर ध्यान दिया है।
17इसीलिए मैंने ठान लिया है कि तुम्हें मिस्र के दुखों में से निकालकर कनानियों, हित्तियों, एमोरियों, परिज्जियों, हिव्वियों, और यबूसियों के देश में ले जाऊं, जहां दूध और मधु की धाराएं बहती हैं”।
18“तब वे तेरी बात ध्यान से सुनेंगे; और तू इस्राएली पुरनियों के साथ राजा के पास जाकर उससे यह कहना, ‘इब्रानियों के परमेश्वर यहोवा ने हमें दर्शन दिया है। इसलिए अब हमें तीन दिन के मार्ग पर जंगल में जाने दे कि हम अपने परमेश्वर यहोवा के लिए बलि चढ़ाएं’
19परन्तु मैं जानता हूं कि मिस्र का राजा जब तक विवश नहीं किया जाएगा तब तक तुम्हें जाने नहीं देगा।
20इसलिए मैं अपना हाथ बढ़ाकर मिस्र को उन सब आश्चर्यकर्माें से मारूंगा जो मैं उसके मध्य करूंगा; और तब वह तुम्हें जाने देगा।
21तब मैं मिस्रियों को इस प्रजा पर उदार कर दूंगा, जिससे कि जब तुम निकलोगे तो तुम्हें खाली हाथ न जाना पड़े।
22परन्तु एक-एक स्त्री अपनी-अपनी पड़ोसन और उसके घर में रहने वाली से चांदी-सोने के आभूषण और वस्त्र मांग ले; और तुम उन्हें अपने पुत्र और पुत्रियों को पहना देना। इस प्रकार तुम मिस्रियों को लूट लोगे।”
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)