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पुराना नियम · निर्गमन · अध्याय 23 / 40

निर्गमन 23

1“तू झूठी बात न फैलाना। झूठा साक्षी बनने के लिए दुष्ट का साथ न देना।

2तू बुराई करने के लिए भीड़ के पीछे न हो लेना और न उनके पीछे मुकद्दमें में पड़कर न्याय बिगाड़ने के लिए साक्षी देना।

3तू कंगाल के मुकद्दमे में उसका भी पक्षपात न करना।

4“यदि तुझे तेरे शत्रु का बैल व गदहा भटकता हुआ मिल जाए तो उसे उसके पास अवश्य पहुँचा देना।

5यदि तू अपने बैरी के गदहे को बोझ से दबा हुआ देखे तो उसे वैसा ही न छोड़ देना, तू अवश्य उसके साथ मिलकर उसे छुड़ा देना।

6तू अपने कंगाल भाई के मुकद्दमे में उसका न्याय न बिगाड़ना।

7तू झूठे मुकद्दमे से दूर रहना और निर्दोष या धर्मी को घात न करना; क्योंकि मैं अपराधी को निर्दोष न ठहराऊंगा।

8और तू घूस न लेना, क्योंकि घूस आंख वालों को भी अन्धा कर देती है और धर्मियों की बातें पलट देती है।

9परदेशी पर अन्धेर न करना; तुम परदेशी की भावनाओं से परिचित हो, क्योंकि तुम भी मिस्र देश में परदेशी रह चुके हो।

10“और तू अपनी भूमि को छः वर्ष तक बोना और उसकी उपज एकत्रित करना।

11परन्तु सातवें वर्ष उसे छोड़ देना और परती पड़ी रहने देना जिससे कि तेरे भाई-बन्धुवों में से कंगाल उससे खाने पाए। और जो कुछ उनसे बचे उसे जंगली पशु खा सके। तुम्हें अपनी दाख की बारियों और जैतून के बागों के साथ भी ऐसा ही करना है।

12छः दिन तक तू अपना काम-काज करना परन्तु सातवें दिन विश्राम करना जिससे कि तेरे बैल और गदहे सुस्ता सकें और तेरी दासी के पुत्र तथा परदेशी ताजगी पा सके।

13और उन सब बातों के सम्बन्ध में जो मैंने तुमसे कही है चौकसी करना और दूसरे देवताओं के नाम की चर्चा तक न करना और उनका नाम भी तुम्हारे मुंह से न सुना जाए।

14“तू प्रति वर्ष मेरे लिए तीन बार पर्व मनाना।

15तू अख़मीरी रोटी का पर्व मनाना। अबीब महीने के निर्धारित समय पर सात दिन तक मेरी आज्ञा के अनुसार अख़मीरी रोटी खाया करना, क्योंकि उसी महीने में तुम मिस्र से निकले थे, और कोई मुझको खाली हाथ मुंह न दिखाए।

16और जब तेरी बोई हुई खेती की पहली फसल तैयार हो, तब कटनी का पर्व भी मनाना। वर्ष के अन्त में जब तू अपने परिश्रम का फल खेत में से एकत्र करे तो बटोरने का पर्व भी मनाना।

17प्रति वर्ष तीन बार तेरे सब पुरुष प्रभु यहोवा के सामने उपस्थित हो।

18“तू न तो मेरे बलिपशु का लहू ख़मीरी रोटी के साथ चढ़ाना और न मेरे पर्व की चरबी में से कुछ भोर तक रहने देना।

19तू अपनी भूमि की पहली उपज का पहला उत्तम भाग अपने परमेश्वर के भवन में ले आना। बकरी के बच्चे को तू उसकी माता के दूध में न पकाना।

20“देख, मैं एक दूत को तेरे आगे-आगे भेजता हूँ, जो मार्ग में तेरी रक्षा करेगा, और जिस स्थान को मैंने तैयार किया है, उसमें तुझे पहुंचाएगा।

21उसके सामने सावधान रहना और उसकी मानना, उससे विद्रोह मत करना, क्योंकि वह तुम्हारा अपराध क्षमा न करेगा, क्योंकि उसमें मेरा नाम है।

22परन्तु यदि तू सचमुच उसकी माने और जो कुछ मैं कहूं उसे करे तो मैं तेरे शत्रुओं का शत्रु और तेरे विरोधियों का विरोधी बनूँगा।

23क्योंकि मेरा दूत तेरे आगे-आगे चलकर तुझे एमोरी, हित्ती, परिज्जी, कनानी, हिव्वी और यबूसी लोगों के देश में पहुंचाएगा और मैं उनका सर्वनाश कर डालूंगा।

24उनके देवताओं की पूजा न करना, न उनकी उपासना करना और न उनके समान कार्य करना; परन्तु उनको पूरी रीति से नष्ट कर डालना और उनकी लाटों को टुकड़े-टुकड़े कर देना।

25परन्तु तुम अपने परमेश्वर यहोवा की उपासना करना, और वह तुम्हारे अन्न-जल पर आशीष देगा, और मैं तुम्हारे बीच से रोग दूर करूंगा।

26तेरे देश में न तो किसी का गर्भ गिरेगा, और न कोई बांझ होगी; मैं तेरी आयु के दिन पूरे करूँगा।

27मैं तेरे आगे-आगे उन सब लोगों में और जिन लोगों के मध्य तू जाएगा उनमें गड़बड़ी उत्पन्न करूंगा, भय समा दूंगा और मैं तेरे सब शत्रुओं की पीठ तेरी ओर फेर दूंगा।

28मैं तेरे आगे-आगे बर्रों को भजूंगा कि वे हिव्वी, कनानी, और हित्ती लोगों को तेरे सामने से खदेड़ दे।

29मैं उन्हें एक ही वर्ष में न भगा दूँगा, ऐसा न हो कि देश उजड़ जाए और जंगली पशु तेरे लिए बहुत अधिक हो जाए।

30मैं उन्हें तेरे सामने से थोड़ा-थोड़ा करके निकालूंगा जब तक कि तू फल-फूल कर देश को अपने अधिकार में न कर ले।

31मैं तेरी सीमा को लाल समुद्र से लेकर पलिश्तियों के समुद्र तक और जंगल से फ़रात नदी तक ठहराऊंगा। मैं उस देश के निवासियों को भी तेरे हाथ में कर दूँगा, और तू उन्हें अपने सामने से खदेड़ देगा।

32तू न तो उनसे वाचा बांधना और न उनके देवताओं से।

33वे तेरे देश में न रहने पाएं, ऐसा न हो कि वे तुझसे मेरे विरुद्ध पाप करवाएं; क्योंकि यदि तू उनके देवताओं की उपासना करे तो सचमुच यह तेरे लिए फंदा होगा।”

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)