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पुराना नियम · निर्गमन · अध्याय 22 / 40

निर्गमन 22

1“यदि कोई मनुष्य बैल या भेड़ चुराए और उसे घात करे या बेच दे तो वह उस बैल के बदले पांच बैल और उस भेड़ के बदले चार भेडें दे।

2यदि चोर सेंध लगाते समय पकड़ा जाए और पीटे जाने से मर जाए तो उसके लहू का दोष न लगे।

3परन्तु यदि सूर्य निकल चुके तो उसके खून का दोष लगे। वह हानि अवश्य भर दे; यदि उसके पास कुछ न हो तो वह चोरी के कारण बेच दिया जाए।

4यदि चुराया हुआ बैल, या गदहा, या भेड़ उसके पास जीवित पाई जाए तो वह उसका दूना भर दे।

5यदि कोई मनुष्य किसी का खेत या दाख की बारी चराए और अपने पशु को ऐसा छोड़ दे कि वह दूसरे का खेत चर ले तो वह अपने खेत की, और अपनी दाख की बारी की उत्तम फसल से उस हानि को भर दे।

6“यदि आग भड़क कर कांटों और झाड़ियों में ऐसी लग जाए कि पूलों के ढेर व खेत की खड़ी फसल जल जाए तो जिसने आग लगाई हो वह अवश्य ही हानि भर दे।

7“यदि कोई मनुष्य अपने पड़ोसी के पास रुपये व सामग्री की धरोहर धरे और यदि वह उसके घर से चुर जाए और चोर पकड़ा जाए तो वह दूना भरे।

8यदि चोर न पकड़ा जाए तो घर का स्वामी पंचों के पास आए जिससे कि जांच करके यह पता लगाया जाए कि उसने अपने पड़ोसी की सम्पत्ति पर हाथ डाला है या नही।

9हर एक लगाए गए अपराध के लिए चाहे वह बैल, या गदहे या भेड़ या पोशाक के लिए हो या खोई हुई किसी वस्तु के लिए हो जिसके लिए वह कहते हों, ‘यह मेरी है’ तो दोनों का मुकदमा पंचों के पास लाया जाए और जिसको पंच दोषी ठहराएं वह दूसरे को दूना भर दे।

10“यदि कोई अपने पड़ोसी को गदहा व बैल व भेड़ या कोई पशु रखने को दे और यदि वह देख-भाल के बिना मर जाए या घायल हो जाए या हांक दिया जाए,

11तो उन दोनों को यहोवा की शपथ खिलाई जाए कि मैंने पड़ोसी की सम्पत्ति पर हाथ नहीं लगाया है और सम्पत्ति का स्वामी इसको मान ले, तब दूसरे को हानि भरनी न पड़ेगी।

12परन्तु यदि वह सचमुच उसके यहां से चुराया गया हो तो वह उसके स्वामी को हानि भर दे।

13यदि वह फाड़ डाला गया हो तो वह प्रमाण के लिए उसे ले आए। तब उस फाड़े गए के लिए उसे हानि नहीं भरनी पड़ेगी।

14“और यदि कोई अपने पड़ोसी से पशु मांग लाए और उसके स्वामी के न रहते उसको चोट लगे और वह मर जाए तो वह निश्चय उसकी हानि भर दे।

15यदि उसका स्वामी साथ हो तो उसको हानि न भरना पड़े। यदि वह किराए का हो तो उसकी हानि किराए में आ गई।

16“यदि कोई पुरुष किसी कुंवारी को जिसके ब्याह की बात न लगी हो फुसलाकर उसके साथ कुकर्म करे तो वह निश्चय मूल्य देकर उसे पत्नी बना ले।

17यदि उसका पिता उसे देने से बिल्कुल इनकार करे तो कन्याओं के मूल्य की रीति के अनुसार, वह कुकर्मी रुपया चुका दे।

18“तू जादू-टोना करने वाली को जीवित न रहने देना।

19“जो कोई पशुगमन करे वह निश्चय मार डाला जाए।

20“जो कोई यहोवा को छोड़ किसी और देवता के लिए बलि चढ़ाए वह सत्यानाश किया जाए।

21तुम न तो किसी परदेशी की बुराई करना और न उस पर अन्धेर करना, क्योंकि तुम भी मिस्र देश में परेदशी थे।

22तुम किसी विधवा या अनाथ को दुःख न देना।

23यदि तुम ऐसों को कुछ भी दुःख दो और वे मेरी दुहाई दें तो मैं अवश्य उनकी दुहाई सुनूँगा।

24तब मेरा क्रोध भड़केगा और मैं तुम्हें तलवार से मारूँगा; और तुम्हारी पत्नियां विधवा और तुम्हारे बच्चे पितृहीन हो जाएंगे।

25“यदि तू मेरी प्रजा के अपने मध्य रहने वाले किसी दीन को ट्टण दे तो उससे महाजन के समान ब्याज न लेना।

26यदि तू कभी अपने पड़ोसी के कपड़े को बन्धक करके रख ले तो सूर्यास्त होने तक उसे लौटा देना,

27क्योंकि वह उसका एकमात्र ओढ़ना है, वह तो उसकी देह का एकमात्र वस्त्र है। फिर वह क्या ओढ़कर सोएगा? और ऐसा होगा कि जब वह मेरी दुहाई देगा, तब मैं उसकी सुनूंगा, क्योंकि मैं तो करुणामय हू।

28“तू परमेश्वर को शाप न देना और न ही अपने प्रधान को शाप देना।

29अपने अन्न की फसल और अपने अंगूर की फसल में से मुझे कुछ देने में विलम्ब न करना। अपने बेटों में से पहलौठे को मुझे देना।

30ऐसा ही तुम अपने बैलों और भेड़ों के साथ करना। सात दिन तक तो यह अपनी माता के साथ रहे, आठवें दिन तू उसे मुझको दे देना।

31और तुम मेरे लिए पवित्र मनुष्य बनना; इसलिए जो पशु मैदान में फाड़ा हुआ मिले उसका मांस न खाना, उसको कुत्तों के आगे फेंक देना।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)