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पुराना नियम · निर्गमन · अध्याय 21 / 40

निर्गमन 21

1“तब जो नियम तुझे उनको सिखाने पड़ेंगे वे ये हैं:

2यदि तू कोई इब्रानी दास को मोल ले तो वह छः वर्ष तक सेवा करे, परन्तु सातवें वर्ष वह स्वतन्त्र मनुष्य की तरह बिना दाम चुकाए चला जाए।

3यदि वह अकेला आया हो तो वह अकेला ही चला जाए, पर यदि वह विवाहित हो तब उसकी पत्नी भी उसके साथ जाए।

4यदि उसके स्वामी ने उसे पत्नी प्रदान की हो, और उससे उसके पुत्र व पुत्रियां उत्पन्न हुई हों तो बच्चे और पत्नी स्वामी के हों और वह अकेला ही चला जाए।

5परन्तु यदि वह दास स्पष्ट कहे, ‘मैं अपने स्वामी, अपनी पत्नी, और अपने बच्चों से प्रेम करता हूं, अतः मैं स्वतन्त्र होकर नहीं जाऊँगा;’

6तब उसका स्वामी उसे परमेश्वर के निकट लाए और उसे द्वार या चौखट के पास ले जाकर सुतारी से उसका कान छेदे; तब वह सदा उसकी सेवा करता रहेगा।

7यदि कोई मनुष्य अपनी पुत्री को दासी होने के लिए बेच दे तो वह दासों के समान स्वतन्त्र होकर नहीं जा सकती।

8यदि वह अपने स्वामी को, जिसने उसे अपने लिए मोल लिया हो, प्रसन्न न कर सके तो वह दाम लेकर उसे छुड़ाई जाने दे। उसके प्रति किए गए अन्याय के कारण उसे परदेशियों के हाथ बेच देने का अधिकार उसको न होगा।

9यदि उसने अपने पुत्र के लिए उसे चुन लिया हो, तो वह पुत्री जानकर उससे व्यवहार करे।

10यदि वह अपने लिए दूसरी स्त्री रख ले, फिर भी वह दासी के भोजन, वस्त्र, और दाम्पत्य सुख में घटी न करे।

11और यदि वह उसके लिए इन तीनों बातों को पूरी न करे, तो वह बिना दाम चुकाए अपने से ही चली जाए।

12“जो किसी मनुष्य पर ऐसा प्रहार करे कि वह मर जाए तो वह भी निश्चय मार डाला जाए।

13परन्तु यदि वह घात लगाकर न बैठा हो, वरन् परमेश्वर ने ही उसे उसके हाथ में कर दिया हो, तो मैं एक स्थान निश्चित करूंगा जहां वह भाग जाए।

14यदि कोई मनुष्य ढिठाई पूर्वक घात लगाए और छल करके अपने पड़ोसी को मार डाले, तो तू उसका वध करने के लिए उसे मेरी वेदी के पास से भी ले जाना।

15“और यदि कोई अपने पिता अथवा अपनी माता को मारे-पीटे तो वह निश्चय ही मार डाला जाए।

16“जो कोई किसी मनुष्य का अपहरण करे, फिर चाहे वह उसे बेच डाले अथवा वह उसके अधिकार में पाया जाए, तो उसे निश्चय मार डाला जाए।

17और जो कोई अपने पिता या अपनी माता को शाप दे, वह भी निश्चय मार डाला जाए।

18“यदि मनुष्य झगड़ते हों और वे एक दूसरे को पत्थर या मुक्के से ऐसा मारें कि वह मरे नहीं परन्तु पलंग पर पड़ा रहे,

19यदि वह उठकर अपनी लाठी के सहारे बाहर चलने-फिरने लगे तब तो वह मारने वाला दण्ड से मुक्त होगा; उसे केवल उसके पड़े रहने के समय की क्षतिपूर्ति करनी होगी और जब तक वह पूरी रीति से चंगा न हो जाए तब तक उसे उसकी देखभाल करनी होगी।

20“यदि कोई मनुष्य अपने दास पर, चाहे वह पुरुष हो या स्त्री, लाठी से मारे और वह उसके हाथ से मर जाए, तब तो उसको दण्ड दिया जाए।

21फिर भी यदि वह एक या दो दिन जीवित रहे तो उससे कोई बदला न लिया जाए, क्योंकि वह तो उसकी सम्पति है।

22“यदि मनुष्य आपस में मार-पीट करके किसी गर्भवती स्त्री को ऐसी चोट पहुँचाएं कि उसका गर्भ गिर जाए, परन्तु और कुछ हानि न हो, तो उस स्त्री के पति के दावे-अनुसार अर्थ-दण्ड लगाया जाए; और वह पंचों के ठहराए अनुसार अर्थ-दण्ड भरेगा।

23परन्तु यदि उसे और कुछ हानि पहुँचे, तब तू ऐसा दण्ड ठहराए कि प्राण के बदले प्राण,

24आंख के बदले आंख, दांत के बदले दांत, हाथ के बदले हाथ, पांव के बदले पांव,

25जले दाग के बदले जले दाग, घाव के बदले घाव, और चोट के बदले चोट।

26“यदि कोई मनुष्य अपने दास या दासी की आंख पर ऐसा मारे कि वह फूट जाए तो वह उसकी आंख के बदले उसे स्वतन्त्र कर दे।

27और यदि वह अपने दास या दासी को ऐसा मारे कि उसका दांत टूट जाए, तो वह उसके दांत के बदले उसे स्वतन्त्र कर दे।

28“यदि कोई बैल किसी पुरुष या स्त्री को ऐसा सींग मारे कि वह मर जाए, तो वह बैल अवश्य पथराव करके मार डाला जाए और उसका मांस खाया न जाए; परन्तु उस बैल का स्वामी निर्दोष माना जाए।

29परन्तु यदि किसी बैल को पहले से सींग मारने की आदत पड़ी हो और उसका स्वामी चेतावनी पाने पर भी उसे बांध कर न रखे और वह किसी पुरुष अथवा स्त्री को मार डाले, तो वह बैल पथराव करके मार डाला जाए, और उसका स्वामी भी मार डाला जाए।

30परन्तु यदि उससे फिरौती मांगी जाए, तो जो कुछ उससे मांगा जाए उसे वह अपने प्राण के छुटकारे के लिए दे।

31चाहे बैल किसी के पुत्र को सींग मारे अथवा किसी की पुत्री को, उसके साथ इसी नियम के अनुसार व्यवहार किया जाए।

32यदि बैल किसी दास अथवा दासी को सींग मारे, तो बैल का स्वामी उस दास के स्वामी को तीस शेकेल चांदी दे, और उस बैल का पथराव कर दिया जाए।

33“यदि कोई मनुष्य गड्ढा खोलकर अथवा खोदकर उसे न ढँके, और उसमें किसी का बैल या गदहा गिर पड़े,

34तो जिसका वह गड्ढा हो वह उस हानि को भर दे, अर्थात् उस पशु के स्वामी को उसका मूल्य चुकाए, और मृत पशु की लोथ गड्ढे वाले की हो।

35“यदि किसी मनुष्य का बैल किसी दूसरे के बैल को ऐसा घायल करे कि वह मर जाए, तो वे उस जीवित बैल को बेचकर उसके दाम को आधा-आधा बांट लें, और इसी प्रकार उस मरे हुए बैल को भी बांट ले।

36पर यदि यह मालूम हो कि उस बैल को पहले से सींग मारने की आदत पड़ी थी और फिर भी उसके स्वामी ने उसे बांधकर नहीं रखा, तो अवश्य ही वह बैल के बदले बैल चुकाए और मरा हुआ पशु उसका हो जाए।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)