पुराना नियम · निर्गमन · अध्याय 20 / 40
निर्गमन 20
1तब परमेश्वर ने ये सब वचन कहेः
2“मैं तेरा परमेश्वर यहोवा हूं, जो तुझे मिस्र देश अर्थात् दासत्व के घर से निकाल ले आया।
3“तू मुझे छोड़ दूसरों को ईश्वर करके न मानना।
4“तू अपने लिए कोई मूर्ति गढ़कर न बनाना, अथवा न किसी की प्रतिमा बनाना जो ऊपर आकाश में, या नीचे धरती पर या धरती के नीचे जल में है।
5न तो तू उनको दण्डवत् करना और न ही उनकी उपासना करना; क्योंकि मैं तेरा परमेश्वर यहोवा जलन रखने वाला परमेश्वर हूं; जो मुझसे बैर करते हैं उनकी सन्तान को तीसरी और चौथी पीढ़ी तक बापदादों की दुष्टता का दण्ड देता हू।
6जो मुझसे प्रेम रखते हैं और मेरी आज्ञाओं का पालन करते हैं, उन हजारों-हजार पर करुणा करता हू।
7“तू अपने परमेश्वर यहोवा का नाम व्यर्थ न लेना क्योंकि जो यहोवा का नाम व्यर्थ लेता है, उसको यहोवा दण्ड दिए बिना नहीं छोड़ेगा।
8“विश्रामदिन को पवित्र मानने के लिए स्मरण रखना।
9छः दिन तक तू परिश्रम करके अपना सब काम कर लेना,
10परन्तु सातवाँ दिन तेरे परमेश्वर यहोवा का विश्रामदिन है। उसमें तू कुछ भी काम न करना, न तो तू, न तेरा पुत्र, न तेरी पुत्री, न तेरा दास, न तेरी दासी, न तेरे पशु, न तेरे साथ ठहरा हुआ कोई परदेशी।
11क्योंकि यहोवा ने छः दिन में आकाश और पृथ्वी, समुद्र और जो कुछ उनमें है, सबको बनाया और सातवें दिन विश्राम किया, इसलिए यहोवा ने विश्रामदिन को आशीष दी और उसे पवित्र ठहराया।
12“तू अपने पिता और अपनी माता का आदर करना, जिससे जो देश तेरा परमेश्वर यहोवा तुझे देता है उसमें तू बहुत दिन तक रहने पाए।
13“तू हत्या न करना।
14“तू व्यभिचार न करना।
15“तू चोरी न करना।
16“तू अपने पड़ोसी के विरुद्ध झूठी साक्षी न देना।
17“तू अपने पड़ोसी के घर का लालच न करना। तू न तो अपने पड़ोसी की पत्नी, न उसके दास, न उसकी दासी, न उसके बैल, न उसके गदहे, न अपने पड़ोसी की किसी भी वस्तु का लालच करना।”
18और सब लोगों ने बादल गरजते और बिजली चमकते और नरसिंगे का शब्द होते हुए सुना और पर्वत से धुआं उठते हुए देखा; और जब लोगों ने यह देखा तो कांप उठे और दूर खड़े हो गए।
19तब उन्होंने मूसा से कहा, “तू ही हमसे बोल तो हम सुनेंगे। परन्तु परमेश्वर हमसे न बोले, अन्यथा हम मर जाएंगे।”
20और मूसा ने लोगों से कहा, “डरो मत, क्योंकि परमेश्वर इसलिए आया है कि तुम्हारी जांच करे, और इसलिए भी कि उसका भय तुममें बना रहे, जिससे कि तुम पाप न करो।”
21और वे लोग तो दूर ही खड़े रहे, जब कि मूसा उस घोर अन्धकार के निकट गया जहां परमेश्वर था।
22तब यहोवा ने मूसा से कहा, “तू इस्राएलियों से यों कहनाः तुमने तो आप ही देख लिया है कि मैंने आकाश से तुमसे बातें की है।
23तुम मेरे साथ किसी को सम्मिलित न करना, अर्थात् तुम अपने लिए न तो चांदी के देवता और न ही सोने के देवता गढ़ना।
24तुम मेरे लिए मिट्टी की एक वेदी बनाना और उस पर तुम अपने बैलों और भेड़ों की होमबलि चढ़ाना; जहां-जहां मैं अपने नाम का स्मरण कराऊं, वहां-वहां मैं आकर तुम्हें आशीष दूँगा।
25और यदि तुम मेरे लिए पत्थर की वेदी बनाओ तो तुम उसे तराशे हुए पत्थरों से न बनाना; क्योंकि यदि तुम उस पर अपना औजार लगाओगे तो तुम उसे अशुद्ध कर दोगे।
26और मेरी वेदी पर तुम सीढ़ी से न चढ़ना, ऐसा न हो कि उस पर से तुम्हारा नंगापन दिखाई पड़े।”
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)