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पुराना नियम · निर्गमन · अध्याय 19 / 40

निर्गमन 19

1इस्राएलियों को जिस दिन मिस्र के निकले हुए तीन महीने बीते, ठीक उसी दिन, वे सीनै के जंगल में आए।

2रपीदीम से कूच करने के पश्चात् वे सीनै के जंगल में आए और जंगल में डेरे खड़े किए। और वहां इस्राएल ने पर्वत के सामने छावनी डाली।

3तब परमेश्वर के पास मूसा ऊपर चढ़ गया और यहोवा ने पर्वत पर से उसे पुकारकर कहा, “तू याकूब के घराने से इस प्रकार कह और इस्राएलियों को बताः

4‘तुमने आप ही देखा है कि मैंने मिस्रियों के साथ क्या-क्या किया है और तुम्हें मानो उकाब के पंखों पर बैठाकर अपने पास ले आया हूँ।

5इसलिए अब यदि तुम निश्चय मेरी बात मानोगे और मेरी वाचा का पालन करोगे तो सब जातियों में से तुम ही मेरी निज सम्पत्ति बनोगे, क्योंकि समस्त पृथ्वी मेरी है।

6तुम मेरे लिए याजकों का राज्य और पवित्र जाति ठहरोगे। ये बातें तू इस्राएलियों से कहना।”

7तब मूसा ने आकर सब लोगों के पुरनियों को बुलवाया और इन सब बातों को जिन्हें कहने की आज्ञा यहोवा ने उसे दी थी उनके समक्ष रखी।

8सब लोगों ने एक साथ मिलकर उत्तर दिया, “जो कुछ यहोवा ने करने के लिए कहा है वह सब हम करेंगे!” मूसा ने जाकर लोगों की ये बातें यहोवा को कह सुनाईं।

9तब यहोवा ने मूसा से कहा, “देख, मैं घने बादल में तेरे पास आऊँगा जिससे जब मैं तुझसे बातें करूँ तो ये लोग सुन सकें और सदा तेरी प्रतीति करे।” तब मूसा ने यहोवा से लोगों की बातें कह सुनाईं।

10तब यहोवा ने मूसा से कहा, “लोगों के पास जा और उन्हें आज और कल पवित्र कर, और वे अपने-अपने वस्त्र धो लें;

11और वे तीसरे दिन के लिए तैयार हो जाएं, क्योंकि तीसरे दिन सब लोगों के देखते यहोवा सीनै पर्वत पर उतरेगा।

12­और तू लोगों के चारों और बाड़ा बांधना और कहना, ‘सावधान रहो कि कोई पर्वत पर न चढ़े और न उसके सिवानों को छुएः जो कोई पर्वत को छुए वह निश्चय ही मार डाला जाए।

13उसे कोई हाथ से न छुए पर उसका निश्चय ही पथराव किया जाए या वह तीरों से मार दिया जाए। चाहे मनुष्य हो या पशु, वह जीवित न बचेगा।’ जब नरसिंगे का महाशब्द देर तक सुनाई दे, तब लोग पर्वत के निकट आए।”

14तब मूसा ने पर्वत से उतरकर और लोगों के पास जाकर उन्हें पवित्र किया, और लोगों ने अपने-अपने वस्त्र धोए।

15उसने लोगों से कहा, “तीसरे दिन के लिए तैयार रहो; स्त्री के पास न जाना।”

16तीसरे दिन ऐसा हुआ कि भोर होते ही बादल गरजने और बिजली चमकने लगी और पर्वत पर काली घटा छा गई और नरसिंगे का इतना भारी स्वर सुनाई दिया कि छावनी में जितने लोग थे सब कांप उठे।

17तब मूसा लोगों को परमेश्वर से भेंट कराने के लिए छावनी से बाहर ले आया और वे पर्वत के निचले भाग में खड़े हुए।

18सीनै पर्वत तो धुंए से आच्छादित था, क्योंकि यहोवा उस पर आग में होकर उतरा था, और उसका धुआं भट्ठे के धुएं के समान ऊपर उठ रहा था और सम्पूर्ण पर्वत अत्यन्त कांपने लगा।

19जब नरसिंगे का शब्द ऊँचा और ऊँचा होता गया, तब मूसा बोला और परमेश्वर ने गर्जन में से उसे उत्तर दिया।

20यहोवा सीनै पर्वत की चोटी पर उतर आया, और यहोवा ने मूसा को पर्वत की चोटी पर बुलाया और मूसा ऊपर गया।

21तब यहोवा ने मूसा से कहा, “उतर कर नीचे जा और लोगों को सावधान कर, ऐसा न हो कि वे बाड़ा तोड़कर यहोवा को देखने का प्रयत्न करें और उनमें से बहुत-से नाश हो जाए।

22और इसी तरह याजक जो यहोवा के समीप आया करते हैं वे भी अपने आपको पवित्र करें, ऐसा न हो कि यहोवा उन पर टूट पड़े।”

23और मूसा ने यहोवा से कहा, “लोग सीनै पर्वत पर नहीं चढ़ सकते, क्योंकि तूने तो हमें यह कहकर चिताया है, ‘पर्वत के चारों और बाड़ा बांधो और उसे पवित्र रखो’।”

24तब यहोवा ने उससे कहा, “नीचे उतर जा और हारून सहित तू फिर ऊपर आ; परन्तु याजक और लोग यहोवा के पास ऊपर आने के लिए बाड़े को न तोड़ दें, अन्यथा वह उन पर टूट पड़ेगा।”

25अतः मूसा ने नीचे उतर कर लोगों से ये बातें कही।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)