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पुराना नियम · निर्गमन · अध्याय 35 / 40

निर्गमन 35

1तब मूसा ने समस्त इस्राएली मंडली को एकत्र किया, और उनसे कहा, “जिन कामों को करने की आज्ञा यहोवा ने तुम्हें दी है, वे ये हैं:

2छः दिन तक काम किया जाए, परन्तु सातवां दिन तुम्हारे लिए पवित्र ठहरे। उस दिन जो कोई कुछ भी काम करे, वह मार डाला जाए।

3तुम सब्त के दिन अपने-अपने निवास स्थान में आग तक न जलाना।”

4मूसा ने इस्राएलियों की समस्त मंडली से कहा, “जिस बात की आज्ञा यहोवा ने दी है, वह यह हैः

5‘तुम अपने बीच में से यहोवा के लिए भेंट एकत्र करो; जो स्वेच्छा से देना चाहे, वह यहोवा के लिए भेंट लाए; सोना, चांदी और कांसा,

6और नीले, बैंजनी व लाल रंग के वस्त्र, महीन मलमल, बकरियों के बाल,

7मेढ़ों की लाल रंगी हुई खालें और सूइसों की खालें, और बबूल की लकड़ी,

8और प्रकाश देने के लिए तेल, अभिषेक के तेल और सुगन्ध द्रव्य के लिए मसाले,

9तथा एपोद और सीनाबन्द के लिए सुलैमानी पत्थर और भांति-भांति की मणिया।

10‘तुममें से जितने कार्यकुशल व्यक्ति हैं वे आएं और यहोवा के आज्ञानुसार ये वस्तुए बनाएं:

11निवासस्थान, उसके तम्बू और उसे पर्दे, उसके आंकड़े, तख़्ते, छड़े, खम्भे और खांचे;

12सन्दूक और उसके डंडे, प्रायश्चित का ढकना, और भीतर का पर्दा;

13मेज़ और उसके डंडे, और उसके सब पात्र और भेंट की रोटियां;

14प्रकाश के लिए दीवट और उसके अन्य सामान तथा दीपक और प्रकाश देने हेतु तेल;

15धूपवेदी के साथ उसके डंडे, और अभिषेक का तेल, सुगन्धित धूप तथा निवासस्थान के प्रवेशद्वार के लिए पर्दा;

16अग्निबलि की वेदी के साथ उसकी कांसे की झँझरी, उसके डंडे, और उसके सब सामान तथा हौदी और उसके पाए;

17आंगन के पर्दे, उसके खम्भे और आंकड़े तथा आंगन के द्वार का पर्दा;

18निवासस्थान की खूंटियां और आंगन की खूंटिया और उनकी रस्सियां;

19पवित्रस्थान में सेवा करने के लिए बुने हुए वस्त्र, हारून याजक के लिए पवित्र वस्त्र, और याजकीय सेवा के लिए उसके पुत्रों के वस्त्र’।”

20तब इस्राएलियों की समस्त मंडली मूसा के सामने से लौट गई।

21प्रत्येक मनुष्य जिसके मन ने उसे प्रोत्साहित किया और प्रत्येक जिसकी आत्मा ने उसे उभारा वह मिलाप वाले तम्बू के कार्य और उसकी समस्त सेवकाई और पवित्र वस्त्रों को बनाने के लिए यहोवा के लिए भेंट लेकर आया।

22तब क्या स्त्री क्या पुरुष, जिनके मनों ने उन्हें उभारा था, वे सब जुगनू, बालियां, अंगूठियां और कंगन आदि सोने के सब प्रकार के आभूषण लाए; यहोवा के लिए सोने की भेंट देने वाले प्रत्येक व्यक्ति ने ऐसा ही किया।

23और जिस-जिस के पास नीले, बैंजनी व लाल रंग के कपड़े, महीन मलमल तथा बकरियों के बाल, लाल रंग में रंगी हुई मेढ़ों की खालें व सूइसों की खालें थीं वह उन्हें ले आया।

24जितने लोग चांदी व कांसे की भेंट ला सकते थे वे यहोवा के लिए भेंट लाए। जिस-जिस के पास सेवकाई के किसी काम के लिए बबूल की लकड़ी थी वह उसे ले आया।

25जितनी स्त्रियां कार्य-कुशल थीं उन्होंने अपने हाथों से सूत काता और वे नीले, बैंजनी, तथा लाल रंग की सूत, और महीन मलमल के काते हुए सूत को ले आईं।

26और जितनी स्त्रियों के मन ने उन्हें कार्यकुशलता के लिए उभारा उन्होंने बकरियों के बाल भी काते।

27और प्रधान लोग एपोद और सीनाबन्द के लिए सुलैमानी पत्थर और मणियां;

28तथा प्रकाश करने, अभिषेक करने और सुगन्धित धूप जलाने के लिए मसाले और तेल लाए।

29जिन सब कामों को करने के लिए यहोवा ने मूसा को आज्ञा दी थी, उनके लिए इस्राएली अर्थात् सब स्त्री और पुरुष जिनके हृदयों ने उन्हें भेंट लाने को उभारा था यहोवा के लिए स्वेच्छा से भेंट ले आए।

30तब मूसा ने इस्राएलियों से कहा, “सुनो, यहोवा ने यहूदा के गोत्रवाले बसलेल को जो ऊरी का पुत्र और हूर का पोता है, नाम लेकर बुलाया है,

31और उसने उसे बुद्धि, समझ, ज्ञान और सब प्रकार के शिल्प-कौशल के लिए परमेश्वर के आत्मा से परिपूर्ण किया है,

32कि वह सोना, चांदी और कांसे में,

33और जड़ने के लिए मणि काटने में, और लकड़ी पर खुदाई का काम करने में कलात्मक नमूने निकाले जिससे वह प्रत्येक रचनात्मक कार्य कर सके।

34यहोवा ने उसके तथा दान के गोत्रवाले अहीसामाक के पुत्र अहोलीआब दोनों को शिक्षा देने वाला हृदय दिया कि वे दूसरों को प्रशिक्षित कर सके।

35यहोवा ने उनको कार्यकुशलता से भर दिया कि वे गढ़ने वाले और कलात्मक नमून बनानेवालों, नीले, बैंजनी, और लाल रंग के वस्त्रों पर तथा महीन मलमल में काढ़ने और बुनने अर्थात् सब प्रकार की कलात्मक वस्तुओं के नमूने बनाने वालों व शिल्पियों के सब प्रकार के काम कर सके।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)