पुराना नियम · निर्गमन · अध्याय 34 / 40
निर्गमन 34
1फिर यहोवा ने मूसा से कहा, “पहली पटियाओं के समान पत्थर की दो और पटियाएं काट कर बना ले, और उन पहली पटियाओं पर जो वचन लिखे थे, जिन्हें तूने तोड़ डाला था वे ही वचन मैं उन पटियाओं पर लिखूँगा।
2और सुबह तक तैयार हो जाना और सवेरे ही सीनै पर्वत पर चढ़कर उसकी चोटी पर मेरे सामने उपस्थित होना।
3तेरे साथ और कोई चढ़कर न आए, न ही पर्वत पर किसी जगह कोई व्यक्ति दिखाई दे यहां तक कि भेड़-बकरी और गाय-बैल भी उस पर्वत के आगे न चरने पाए।”
4अतः मूसा ने पहली पटियाओं के समान दो और पटियाएं काट कर बना ली। फिर वह यहोवा की आज्ञा के अनुसार भोर को उठा और अपने हाथ में पत्थर की दोनों पटियाएं लेकर सीनै पर्वत पर चढ़ गया।
5तब यहोवा ने बादल में उतरकर और उसके साथ वहां खड़े होकर यहोवा नाम का प्रचार किया।
6उस समय यहोवा उसके आगे-आगे यह प्रचार करता हुआ चलाः “यहोवा, यहोवा परमेश्वर, दयालु और अनुग्रहकारी, कोप करने में धीमा, और करुणा तथा सत्य से भरपूर;
7हजारों पर करुणा करनेवाला; अधर्म, अपराध और पाप क्षमा करनेवाला; फिर भी दोषी को वह किसी भी प्रकार दण्ड दिए बिना नहीं छोड़ेगा। वह तो पूर्वजों के अधर्म का दण्ड उनके बेटों और पोतों वरन् पर-पोतों को भी देने वाला है।”
8तब मूसा ने शीघ्रता से भूमि की ओर झुक कर दण्डवत् किया।
9और उसने कहा, “हे प्रभु, यदि तेरी अनुग्रह की दृष्टि मुझ पर हो तो मैं विनती करता हूँ कि यघपि ये लोग बहुत हठीले हैं फिर भी तू हम लोगों के बीच में होकर चल; तू हमारे अधर्म और पाप को क्षमा कर और अपना निज भाग मान कर हमें ग्रहण कर।”
10तब परमेश्वर ने कहा, “सुन, मैं एक वाचा बांधता हू। मैं तेरे सब लोगों के सामने ऐसे आश्चर्यकर्म करूंगा जैसे पृथ्वी पर और सब जातियों में कभी नहीं हुए और वे सब लोग जिनके बीच तू रहता है यहोवा के कार्यों को दखेंगे, क्योंकि जो मैं तुम लोगों से करने पर हूं वह भययोग्य है।
11जो आज्ञा आज मैं तुम्हें देता हूं उसे तुम अवश्य मानना। देखो, मैं तुम्हारे सामने से एमोरी, कनानी, हित्ती, परिज्जी, हिव्वी और यबूसी लोगों को खदेड़ने पर हू।
12इसलिए सावधान! जिस देश में तू जाने वाला है उसके निवासियों से वाचा न बांधना, कहीं ऐसा न हो कि वह तेरे लिए फंदा ठहरे।
13परन्तु तू उनकी वेदियों को गिरा देना और उनकी लाटों को तोड़ डालना और उनकी अशेराओं को काट डालना;
14क्योंकि किसी दूसरे को ईश्वर करके दण्डवत् करने की तुमको आज्ञा नहीं, क्योंकि यहोवा जिसका नाम जलन रखने वाला है वह जल उठने वाला परमेश्वर है।
15कहीं ऐसा न हो कि तू उस देश के निवासियों से वाचा बांधे और वे अपने देवताओं के पीछे हो लेने का व्यभिचार करें और उनके लिए बलिदान चढ़ाएं और कोई तुझे उस बलिदान में से खाने का निमंत्रण दे,
16और तू उनकी बेटियों में से अपने बेटों के लिए ले और उनकी बेटियां जो स्वयं अपने देवताओं के पीछे होने का व्यभिचार करती हैं, तेरे बेटों से भी अपने-अपने देवताओं के पीछे हो लेने का व्यभिचार करवाए।
17तुम अपने लिए ढालकर देवता न बनाना।
18“तुम अख़मीरी रोटी का पर्व मनाना। उसमें तू मेरी आज्ञा के अनुसार अबीब महीने के नियत समय पर सात दिन तक अख़मीरी रोटी खाया करना क्योंकि तू मिस्र से अबीब महीने में निकल आया था।
19हर एक गर्भ का पहलौठा मेरा है। चाहे बछड़ा या मेमना तेरे पशुओं में से हर एक पहलौठा नर मेरा ही है।
20गदही के पहलौठे के बदले मेमना देकर उसको छुड़ाना, परन्तु यदि तू उसको छुड़ाना न चाहे तो उसकी गर्दन तोड़ देना। परन्तु अपने सब पहलौठे पुत्रों को बदला देकर छुड़ाना। मुझे कोई खाली हाथ अपना मुहं न दिखाए।
21“ छः दिन तक तू परिश्रम करना, सातवें दिन विश्राम करना; वरन् हल जोतने और कटनी के समय भी विश्राम करना।
22और तू सप्ताहों का पर्व मनाना अर्थात् गेहूं की उपज के पहले फल का पर्व और वर्ष के अन्त में बटोरने का पर्व भी मनाना।
23वर्ष में तीन बार तेरे सब पुरुष इस्राएल के परमेश्वर, प्रभु यहोवा को अपना मुंह दिखाए।
24क्योंकि मैं अन्यजातियों को तेरे सामने से निकालकर तेरे सिवानों को बढ़ाऊंगा और जब तू वर्ष में तीन बार अपने परमेश्वर यहोवा के सामने उपस्थित होने के लिए जाएगा तब कोई तेरी भूमि का लालच नहीं करेगा।
25“तू मेरे लिए बलिदान के लहू को ख़मीर सहित न चढ़ाना और न फसह के पर्व के बलिदान में से सुबह तक कुछ रख छोड़ना।
26तू अपनी भूमि की पहली उपज का सबसे पहला भाग अपने परमेश्वर यहोवा के भवन में ले आना। तू मेमने को उसकी मां के दूध में न उबालना।”
27तब यहोवा ने मूसा से कहा, “इन वचनों को लिख ले, क्योंकि मैंने इन्हीं वचनों के अनुसार तुझसे और इस्राएल से वाचा बांधी है।”
28अतः मूसा वहां यहोवा के साथ चालीस दिन और चालीस रात रहा, उसने न तो रोटी खाई और न पानी पिया। और उसने उन पटियाओं पर वाचा के वचन अर्थात् दस आज्ञाएं लिख ली।
29और ऐसा हुआ कि जब मूसा सीनै पर्वत से नीचे उतर रहा था और पर्वत से नीचे उतरते समय साक्षी की दोनों पटियाएं मूसा के हाथ में थीं, उसे नहीं मालूम था कि परमेश्वर के साथ बातें करने के कारण उसके चेहरे से किरणें निकल रही थी।
30अतः जब हारून और सब इस्राएलियों ने मूसा को देखा कि उसके चेहरे से किरणें निकल रही हैं, तो वे उसके पास आने से डरे।
31तब मूसा ने उनको बुलाया और हारून तथा मण्डली के सब प्रधान उसके पास लौटेे और मूसा ने उनसे बातें की।
32इसके बाद सब इस्राएली पास आए और उसने उन्हें वह सब कुछ करने की आज्ञा दी जिसके लिए यहोवा ने सीनै पर्वत पर उससे कहा था।
33जब मूसा उनसे बातें कर चुका तो उसने अपने मुहं पर ओढ़ना डाल लिया।
34परन्तु जब-जब मूसा परमेश्वर की उपस्थिति में उससे बातें करने जाता था तो वह बाहर निकलने तक ओढ़ने को उतारे रहता था; और जब-जब वह बाहर आकर मिली हुई आज्ञा के अनुसार इस्राएलियों से बोलता था
35तब इस्राएली मूसा के चेहरे को देखते थे कि उसके चेहरे से किरणें निकल रही है। अतः जब तक मूसा यहोवा से बातें करने भीतर न जाता तब तक वह अपने चेहरे पर ओढ़ना डाले रहता था।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)