पुराना नियम · यहेजकेल · अध्याय 10 / 48
यहेजकेल 10
1तब मैंने दृष्टि की और देखो, करूबों के सिरों के ऊपर जो आकाशमंडल था उसमें नीलमणि के समान कुछ दिखाई दिया जिसका रूप सिंहासन का सा था।
2यहोवा ने मलमल के वस्त्र पहने हुए उस व्यक्ति से कहा, “करूबों के नीचे घूमने वाले पहियों के बीच में प्रवेश कर और करूबों के बीच के धधकते हुए अंगारों से अपने हाथ भर ले और उन्हें नगर के ऊपर बिखेर दे।” फिर वह मेरे देखते उनके बीच प्रवेश कर गया।
3जब उसने प्रवेश किया, उस समय करूब भवन के दाहिनी ओर खड़े हुए थे, और बादल से भीतरी आंगन भर गया।
4तब यहोवा का तेज करूबों पर से उठ कर भवन के द्वार पर चला गया, और मन्दिर बादल से तथा आंगन यहोवा के तेज के प्रकाश से भर गया।
5इसके अतिरिक्त, करूबों के पंखों की आवाज बाहरी आंगन तक सुनाई देती थी। वह सर्वशक्तिमान परमेश्वर के बोलने की आवाज के समान थी।
6और ऐसा हुआ कि जब उसने मलमल के वस्त्र पहने हुए व्यक्ति को यह कहकर आज्ञा दी कि, “करूबों के बीच घूमते हुए पहियों के मध्य से आग ले,” तब वह प्रवेश करके पहिए की एक ओर खड़ा हो गया।
7तब करूबों में से एक करूब ने दूसरे करूबों के बीच आग में अपना हाथ बढ़ाया और आग में से कुछ लेकर मलमल के वस्त्र पहने हुए व्यक्ति के हाथों पर रख दिया, जो उसे लेकर बाहर चला गया।
8करूबों के पंखाें के नीचे मनुष्य के हाथों के समान आकर दिखाई दिए।
9तब मैंने दृष्टि की और देखो, करूबों के निकट चार पहिए थे, प्रत्येक करूब के समीप एक पहिया था और पहिए का रूप फीरोजे की चमक का सा था।
10और उनका रूप अर्थात उन चारों का आकार एक समान था, मानो एक पहिए के भीतर दूसरा पहिया हो।
11जब वे चलते तो चारों दिशाओं में से एक दिशा में चलते और चलते समय मुड़ते नहीं थे, परन्तु जिस दिशा में उनका मुख होता उसी ओर चलते और चलते समय मुड़ते नहीं थे।
12उनकी सम्पूर्ण देह, उनकी पीठ, उनके हाथ, उनके पंख, और उनके पहिए अर्थात् चारों के पहियों के चारों ओर आंखें ही आंखे थी।
13और मेरे सुनते हुए उन पहियों को घूमने वाले पहिए कहा गया।
14और प्रत्येक के चार मुख थे-पहला मुख करूब का, दूसरा मुख मनुष्य का, तीसरा मुख सिंह का और चौथा मुख उकाब का था।
15तब करूब ऊपर की ओर उठे। ये वे ही जीवित प्राणी थे जिन्हें मैंने कबार नदी के तट पर देखा था।
16जब करूब चलते तब पहिए भी उनके साथ-साथ चलते और जब कभी करूब पृथ्वी पर से ऊपर उठने के लिए अपने पंख फैलाते तो पहिए उनके पास से दूर नहीं हटते थे।
17जब करूब रुक जाते तो पहिए भी रूक जाते; और जब वे ऊपर उठ जाते तो पहिए भी उनके साथ उठ जाते; क्योंकि उन प्राणियों की आत्मा उनमें थी।
18तब यहोवा का तेज भवन की ड्योढ़ी पर से उठकर करूबों पर मंडराया।
19मेरे देखते जब करूबों ने प्रस्थान किया, वे अपने पंख फैलाकर पहियों सहित पृथ्वी पर से ऊपर उठ गए; और वे यहोवा के भवन के पूर्वी फाटक के प्रवेशद्वार पर ठहर गए। और इस्राएल के परमेश्वर का तेज उन पर मंडराता रहा।
20ये वे ही जीवित प्राणी हैं जिन्हें मैंने कबार नदी के तट पर इस्राएल के परमेश्वर के नीचे देखा था। अतः मुझे मालूम था कि वे करूब है।
21प्रत्येक के चार मुख और चार पंख थे और उनके पंखों के नीचे मनुष्य के हाथों के समान आकार थे।
22और उनके मुख के रूप वैसे ही थे जैसे उन मुखाें के रूप जो मैंने कबार नदी के तट पर देखे थे। प्रत्येक सामने की ओर सीधा चलता था।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)