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पुराना नियम · यहेजकेल · अध्याय 9 / 48

यहेजकेल 9

1तब मेरे सुनते उसने ऊंची आवाज में कहा, “हे नगर के जल्लादो, अपने-अपने विनाशकारी हथियार हाथ में लिए हुए मेरे समीप आओ।”

2तब छः पुरुष घातक हथियार अपने-अपने हाथ में लिए हुए उत्तर की ओर के ऊपरी फाटक से आए। उनके साथ महीन मलमल के वस्त्र धारण किए हुए एक व्यक्ति था जिसकी कमर में कलमदान था। फिर वे भीतर जाकर कांसे की वेदी के समीप खड़े हुए।

3तब इस्राएल के परमेश्वर का तेज जो करूबों पर विराजमान था, उठ गया और भवन की ड्योढ़ी पर चला गया और मलमल के वस्त्र धारण किए हुए जन को, जिसकी कमर में कलमदान था, यहोवा ने पुकारा,

4और कहा, “नगर के, हां, यरूशलेम के बीच से होकर जा और उन सबके माथे पर चिह्न लगा जो उसमें किए जाने वाले सब घृणित कार्यों के लिए आहें भरते और कराहते है।”

5परन्तु उसने दूसरों से मेरे सुनते कहा, “तुम उसके पीछे-पीछे नगर में जाओ और मारते चलो। तुम्हारी आंखों में जरा भी दया न हो, और किसी को भी न छोड़ना।

6बूढ़ों, जवानों, कुंवारियों, छोटे बच्चों और स्त्रियों सब को घात कर डालो, परन्तु किसी ऐसे मनुष्य को न छूना जिस पर चिह्न हो; मेरे पवित्रस्थान से आरम्भ करना।” अतः उन्होंने उन प्राचीनों से आरम्भ किया जो भवन के सामने थे।

7और उसने उनसे कहा, “भवन को अशुद्ध कर दो, हां, इसके आंगनों को मारे हुओं से भर दो। चले जाओ!” इस प्रकार उन्होंने जाकर नगर में लोगों को घात किया।

8फिर ऐसा हुआ कि जब वे मार रहे थे और मैं अकेला बचा था, तब मैं मुंह के बल गिर पड़ा और चिल्लाया, “हाय, हे प्रभु यहोवा! क्या तू अपने क्रोध की अग्नि यरूशलेम पर उंडेल कर इस्राएल के सब बचे हुओं का सर्वनाश कर देगा?”

9तब उसने मुझसे कहा, “इस्राएल और यहूदा के घराने का अधर्म अत्यधिक है, देश लहू से भर गया और नगर भ्रष्टता से परिपूर्ण हो गया है। वे तो कहते हैं कि यहोवा ने देश को त्याग दिया है और यहोवा कुछ नहीं देखता!

10परन्तु मेरी आंखों में तो कुछ भी दया न होगी और मैं उन्हें छोडूंगा नही। उनका आचरण मैं उन्हीं के सिर पर लौटा दूंगा।

11तब देखो, मलमल पहने हुए वह मनुष्य जिसकी कमर में कलमदान था, उसने यह कह कर सूचना दी, “जैसी तूने मुझे आज्ञा दी थी, मैंने वैसा ही किया है।”

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)